{"_id":"65ed405de3fb691cf40fbecc","slug":"india-s-samudrayaan-set-to-explore-ocean-bed-claims-union-minister-kiren-rijiju-news-and-updates-2024-03-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Samudryaan: समुद्र तल के अन्वेषण के लिए कब रवाना होगा समुद्रयान? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने किया ये दावा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Samudryaan: समुद्र तल के अन्वेषण के लिए कब रवाना होगा समुद्रयान? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने किया ये दावा
Sun, 10 Mar 2024 10:52 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 10 Mar 2024 10:52 AM IST
सार
रिजिजू ने कहा, "महासागर की गहराई में उतरने वाली भारत की समर्सिबल मत्स्य6000, जो कि हमारे लोगों को समुद्र में 6000 मीटर नीचे ले जाने वाली है, वह अपने शेड्यूल पर है। समुद्रयान का इस साल के अंत तक ही परीक्षण हो सकता है।"
विज्ञापन
समुद्रयान
- फोटो : AMAR UJALA
विस्तार
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दावा किया है कि भारत अगले साल के अंत तक महासागर की गहराइयों के राज जानने के लिए अपने समुद्री मिशन को रवाना कर सकता है। पृथ्वी विज्ञान मामलों के मंत्री रिजिजू ने कहा कि समुद्रयान मिशन के तहत भारतीय वैज्ञानिक 2025 के अंत तक भारत की समर्सिबल को समुद्री सतह के छह किलोमीटर नीचे भेजने में सफल होंगे।
रिजिजू ने कहा, "महासागर की गहराई में उतरने वाली भारत की समर्सिबल मत्स्य6000, जो कि हमारे लोगों को समुद्र में 6000 मीटर नीचे ले जाने वाली है, वह अपने शेड्यूल पर है। समुद्रयान का इस साल के अंत तक ही परीक्षण हो सकता है।"
'मत्स्य का काम सही दिशा में'
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, ‘‘जब आप समुद्रयान के बारे में बात करते हैं, तो आप समुद्र के अंदर लगभग 6,000 मीटर, छह किलोमीटर गहराई तक जाने के हमारे मिशन के बारे में बात करते हैं। वहां प्रकाश भी नहीं पहुंच सकता। मैं कह सकता हूं कि जहां तक मनुष्यों को समुद्र की गहराई में ले जाने वाली हमारी मत्स्य पनडुब्बी का सवाल है, तो उसका काम सही दिशा में है।’’
विज्ञापन
मंत्री ने कहा कि उन्होंने परियोजना की समीक्षा की है और वैज्ञानिक इस साल के अंत तक पहला सतही जल परीक्षण कर सकेंगे। रिजिजू ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि हम 2025 के अंत तक यानी अगले साल तक अपने मानव दल को 6,000 मीटर से अधिक गहरे समुद्र में भेजने में सक्षम होंगे।’’
समुद्रयान मिशन 2021 में शुरू किया गया था। इस मिशन के तहत मत्स्य6000 पनडुब्बी के जरिए इसमें सवार एक दल मध्य हिंद महासागर में 6,000 मीटर की गहराई तक उतरेगा। चालक दल के तीन सदस्यों को समुद्र के नीचे अध्ययन के लिए भेजा जाएगा। यह पनडुब्बी वैज्ञानिक सेंसर और उपकरणों से लैस होगी और इसकी परिचालन क्षमता 12 घंटे होगी, जिसे आपात स्थिति में 96 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है।
अब तक, अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने गहरे समुद्र में मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। भारत ऐसे मिशन के लिए विशेषज्ञता एवं क्षमता का प्रदर्शन करके इन देशों की श्रेणी में शामिल होने के लिए तैयार है।
विज्ञापन
रिजिजू ने कहा, "महासागर की गहराई में उतरने वाली भारत की समर्सिबल मत्स्य6000, जो कि हमारे लोगों को समुद्र में 6000 मीटर नीचे ले जाने वाली है, वह अपने शेड्यूल पर है। समुद्रयान का इस साल के अंत तक ही परीक्षण हो सकता है।"
विज्ञापन
'मत्स्य का काम सही दिशा में'
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, ‘‘जब आप समुद्रयान के बारे में बात करते हैं, तो आप समुद्र के अंदर लगभग 6,000 मीटर, छह किलोमीटर गहराई तक जाने के हमारे मिशन के बारे में बात करते हैं। वहां प्रकाश भी नहीं पहुंच सकता। मैं कह सकता हूं कि जहां तक मनुष्यों को समुद्र की गहराई में ले जाने वाली हमारी मत्स्य पनडुब्बी का सवाल है, तो उसका काम सही दिशा में है।’’
विज्ञापन
मंत्री ने कहा कि उन्होंने परियोजना की समीक्षा की है और वैज्ञानिक इस साल के अंत तक पहला सतही जल परीक्षण कर सकेंगे। रिजिजू ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि हम 2025 के अंत तक यानी अगले साल तक अपने मानव दल को 6,000 मीटर से अधिक गहरे समुद्र में भेजने में सक्षम होंगे।’’
समुद्रयान मिशन 2021 में शुरू किया गया था। इस मिशन के तहत मत्स्य6000 पनडुब्बी के जरिए इसमें सवार एक दल मध्य हिंद महासागर में 6,000 मीटर की गहराई तक उतरेगा। चालक दल के तीन सदस्यों को समुद्र के नीचे अध्ययन के लिए भेजा जाएगा। यह पनडुब्बी वैज्ञानिक सेंसर और उपकरणों से लैस होगी और इसकी परिचालन क्षमता 12 घंटे होगी, जिसे आपात स्थिति में 96 घंटे तक बढ़ाया जा सकता है।
अब तक, अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने गहरे समुद्र में मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। भारत ऐसे मिशन के लिए विशेषज्ञता एवं क्षमता का प्रदर्शन करके इन देशों की श्रेणी में शामिल होने के लिए तैयार है।