{"_id":"67f00e517bb40ba2ca07b5d3","slug":"india-s-goal-to-achieve-10-pc-of-global-space-market-next-10-yrs-not-easy-task-ex-isro-chief-2025-04-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"ISRO: 'अगले 10 वर्षों में अंतरिक्ष बाजार का 10% हासिल करना आसान काम नहीं', पूर्व इसरो प्रमुख सोमनाथ का बयान","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ISRO: 'अगले 10 वर्षों में अंतरिक्ष बाजार का 10% हासिल करना आसान काम नहीं', पूर्व इसरो प्रमुख सोमनाथ का बयान
Fri, 04 Apr 2025 10:22 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 04 Apr 2025 10:22 PM IST
सार
Ex-ISRO Chief: पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा- अंतरिक्ष क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना बहुत जटिल काम है। इस साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में फिलहाल अंतरिक्ष क्षेत्र में 250 स्टार्टअप काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
एस. सोमनाथ, पूर्व अध्यक्ष, इसरो
- फोटो : ANI
विस्तार
पूर्व इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि अगले 10 वर्षों में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का 10 प्रतिशत (50 बिलियन अमेरिकी डॉलर) हासिल करने का भारत का महत्वाकांक्षी लक्ष्य आसान काम नहीं है, क्योंकि इस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना बहुत जटिल है और यह वर्षों के अनुभव से आता है।
'रॉकेट और उससे जुड़ी इंजीनियरिंग की जटिलताएं पहले जैसी ही'
हैदराबाद में शुक्रवार को इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के स्नातक समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि हाल ही में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि पिछले 60 वर्षों के दौरान इसरो पर खर्च किए गए प्रत्येक रुपये पर 2.54 रुपये का रिटर्न मिला है। इससे हमें उम्मीद है कि भारत में भी एक बहुत ही जीवंत अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था बनाना संभव है। उन्होंने आगे कहा कि रॉकेट और उससे जुड़ी इंजीनियरिंग की जटिलताएं पहले जैसी ही हैं और निवेश करने और अंतरिक्ष कार्यक्रम बनाने की चाहत रखने वाली कंपनियों पर विफलता की संभावना अभी भी मंडरा रही है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें - Online Gaming पर सख्त कार्रवाई: ऑनलाइन मनी गेमिंग संस्थाओं की 357 वेबसाइट/यूआरएल ब्लॉक, 126 करोड़ रुपये फ्रीज
उन्होंने कहा कि भारत में फिलहाल अंतरिक्ष क्षेत्र में 250 स्टार्टअप काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, 60-70 प्रतिशत राजस्व अंतरिक्ष अनुप्रयोग क्षेत्र से आता है, लगभग 20 प्रतिशत उपग्रहों के निर्माण और संचालन से और लगभग 15 प्रतिशत रॉकेट और आवश्यक प्रक्षेपण अवसंरचना के निर्माण से आता है। इसलिए इस क्षेत्र में सबसे अधिक निवेश की आवश्यकता है।
वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत का केवल दो प्रतिशत योगदान
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में अंतरिक्ष क्षेत्र में नाटकीय रूप से बदलाव आया है, मुख्य रूप से अमेरिका और चीनी अंतरिक्ष कार्यक्रमों में हो रही गतिविधियों से और पिछले कुछ वर्षों में प्रक्षेपणों की संख्या में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है। सोमनाथ ने कहा कि भारत वर्तमान में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (500 अरब डॉलर) में केवल दो प्रतिशत का योगदान देता है। उन्होंने कहा, हमने अपने लिए जो लक्ष्य तय किए हैं, उनमें से एक यह है कि हमें अगले 10 वर्षों में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के 10 प्रतिशत के बराबर, यानी 45 से 50 अरब डॉलर के बराबर पहुंचना होगा।
यह भी पढ़ें - US: फेडरल रिजर्व प्रमुख बोले- ट्रंप के टैरिफ से बढ़ सकती है मुद्रास्फीति, आर्थिक विकास धीमा होने की संभावना
विज्ञापन
'रॉकेट और उससे जुड़ी इंजीनियरिंग की जटिलताएं पहले जैसी ही'
हैदराबाद में शुक्रवार को इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) के स्नातक समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि हाल ही में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि पिछले 60 वर्षों के दौरान इसरो पर खर्च किए गए प्रत्येक रुपये पर 2.54 रुपये का रिटर्न मिला है। इससे हमें उम्मीद है कि भारत में भी एक बहुत ही जीवंत अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था बनाना संभव है। उन्होंने आगे कहा कि रॉकेट और उससे जुड़ी इंजीनियरिंग की जटिलताएं पहले जैसी ही हैं और निवेश करने और अंतरिक्ष कार्यक्रम बनाने की चाहत रखने वाली कंपनियों पर विफलता की संभावना अभी भी मंडरा रही है।
विज्ञापन
#WATCH | Hyderabad | On attending graduation ceremony at Indian School of Business, former ISRO Chairman S Somnath says, "This is my first experience coming to ISB... It is one of the leading business schools having a global repute... In my speech, I talked about space business… pic.twitter.com/iZ9Kh2VSvS
— ANI (@ANI) April 4, 2025
विज्ञापन
यह भी पढ़ें - Online Gaming पर सख्त कार्रवाई: ऑनलाइन मनी गेमिंग संस्थाओं की 357 वेबसाइट/यूआरएल ब्लॉक, 126 करोड़ रुपये फ्रीज
उन्होंने कहा कि भारत में फिलहाल अंतरिक्ष क्षेत्र में 250 स्टार्टअप काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, 60-70 प्रतिशत राजस्व अंतरिक्ष अनुप्रयोग क्षेत्र से आता है, लगभग 20 प्रतिशत उपग्रहों के निर्माण और संचालन से और लगभग 15 प्रतिशत रॉकेट और आवश्यक प्रक्षेपण अवसंरचना के निर्माण से आता है। इसलिए इस क्षेत्र में सबसे अधिक निवेश की आवश्यकता है।
वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत का केवल दो प्रतिशत योगदान
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में अंतरिक्ष क्षेत्र में नाटकीय रूप से बदलाव आया है, मुख्य रूप से अमेरिका और चीनी अंतरिक्ष कार्यक्रमों में हो रही गतिविधियों से और पिछले कुछ वर्षों में प्रक्षेपणों की संख्या में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है। सोमनाथ ने कहा कि भारत वर्तमान में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (500 अरब डॉलर) में केवल दो प्रतिशत का योगदान देता है। उन्होंने कहा, हमने अपने लिए जो लक्ष्य तय किए हैं, उनमें से एक यह है कि हमें अगले 10 वर्षों में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के 10 प्रतिशत के बराबर, यानी 45 से 50 अरब डॉलर के बराबर पहुंचना होगा।
यह भी पढ़ें - US: फेडरल रिजर्व प्रमुख बोले- ट्रंप के टैरिफ से बढ़ सकती है मुद्रास्फीति, आर्थिक विकास धीमा होने की संभावना
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन