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इसरो की कामयाबी: देश के पहले अंतरिक्ष आधारित रिसीवर का काम शुरू; सहारा रेगिस्तान, प्रशांत महासागर का भेजा डाटा

Wed, 28 Aug 2024 10:57 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 28 Aug 2024 10:57 PM IST
सार

ISRO: अंतरिक्ष एजेंसी ने 16 अगस्त को पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-08 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। यह उपग्रह छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएसएलवी-डी3 पर सवार हुआ था। उपग्रह पर लगे जीएनएसएस-रिफ्लेक्टोमेट्री (जीएनएसएस-आर) उपकरण ने 18 अगस्त से अपना काम करना शुरू कर दिया है। 

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India's first space-borne precision receiver commences operations
पृथ्वी - फोटो : आईस्टॉक

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को बताया कि ईओएस-08 उपग्रह पर जीएनएसएस-रिफ्लेक्टोमेट्री (जीएनएसएस-आर) उपकरण ने काम करना शुरू कर दिया है। यह भारत का पहला अंतरिक्ष आधारित रिसीवर है, जिसे अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी-इसरो) ने विकसित किया है। जीएनएसएस-आर ने पहला डाटा सहारा रेगिस्तान और फिर प्रशांत महासागर के एक क्षेत्र का एकत्र किया।

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अपेक्षा के अनुरूप मिले परिणाम
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि पहला भूमि डाटा सहारा रेगिस्तान (उत्तरी अफ्रीका) में 1 किमी के उच्च-रिजॉल्यूशन मोड का उपयोग करके एकत्र किया गया था। यह समकालीन सीवाईजीएनएसएस सेंसर की तुलना में काफी बेहतर है। इस डाटा को उच्च रिजॉल्यूशन पर मिट्टी की नमी प्राप्त करने के लिए संसाधित किया गया और परिणाम अपेक्षित सीमा के भीतर पाए गए।
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21 अगस्त को अमेजन वर्षावन पर एक और उच्च-रिजॉल्यूशन भूमि डाटासेट प्राप्त किया गया। इस डाटा का उपयोग स्पेक्युलर रिफ्लेक्शन ट्रैक के साथ सतही जलप्लावन मास्क बनाने के लिए किया गया है, जो उप-किलोमीटर नदी की चौड़ाई के प्रति भी संवेदनशीलता दर्शाता है। पहला महासागर डाटा 19 अगस्त को प्रशांत महासागर के एक क्षेत्र में एकत्र किया गया था।
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12 दिन पहले हुआ था सफल प्रक्षेपण
अंतरिक्ष एजेंसी ने 16 अगस्त को पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-08 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। यह उपग्रह छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएसएलवी-डी3 पर सवार हुआ था। उपग्रह पर लगे जीएनएसएस-रिफ्लेक्टोमेट्री (जीएनएसएस-आर) उपकरण ने 18 अगस्त से अपना काम करना शुरू कर दिया था। जीएनएसएस-आर भारत का पहला अंतरिक्ष में स्थापित रिसीवर है, जो पृथ्वी की सतह से लौटे सिग्नल को मापता है। यह उपकरण एसएसी-इसरो ने विकसित किया है और यह नई तकनीक का उपयोग करके पृथ्वी की विभिन्न सतहों की जानकारी प्रदान करता है। 

उपग्रह से प्राप्त डाटा को हैदराबाद के शादनगर स्थित राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) में प्रोसेस किया जा रहा है। इसके लिए अहमदाबाद स्थित एसएसी द्वारा विकसित एल्गोरिदम और डाटा प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया से विभिन्न स्तरों पर डाटा उत्पाद तैयार किए हैं। 

इसरो ने बताया कि जीपीएस और एनएवीआईसी जैसे वैश्विक और क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली से मिलने वाले सिग्नल पृथ्वी की सतहों (जैसे महासागर, कृषि भूमि और नदियां) से लौटते हैं। ये परावर्तित सिग्नल उपग्रह पर लगे रिसीवर द्वारा एकत्र किए जाते हैं, जो पृथ्वी की 475 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा करते हैं। 



यह मापने वाली प्रणाली बिना किसी विशेष ट्रांसमीटर के काम करता है और इसके लिए बहुत कम संसाधनों की जरूरत होती है। इसका आकार और वजन कम होता है और इसको उर्जा की जरूरत भी बहुत कम होती है। इसके अलावा, इसे कई रिसीवर्स के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे इसका कवरेज तेजी से बढ़ाया जा सकता है। यह नई तकनीक बहुत प्रभावी और उपयोगी है। 

जीएनएसएस-आर प्रणाली उस सिग्नल को इकट्ठा करती है, जो धरती की सतह से वापस लौटती हैं। यह सिग्नल को मापकर हमें मिट्टी की नमी, सतह पर पानी की स्थिति और समुद्र की सतह पर हवा और लहरों के हाल की जानकारी देता है। यह उपकरण महासागरों पर 15 किलोमीटर x 15 किलोमीटर का रेजॉल्यूशन देता है और भूमि पर 1 किलोमीटर x 1 किलोमीटर से भी बेहतर रेजॉल्यूशन प्रदान करता है। 

भारत और रूस ने अंतरिक्ष निगरानी प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर चर्चा की
भारत और रूस ने बुधवार को अपने संयुक्त आयोग की दूसरी बैठक के दौरान जोखिम पूर्वानुमान और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए अंतरिक्ष निगरानी प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल पर चर्चा की। एक सरकारी बयान में यह जानकारी दी गयी है।

बयान के मुताबिक रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित इस बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आयोग की कार्ययोजना पर हस्ताक्षर किए जिसे 2025-26 के दौरान क्रियान्वित किया जाएगा। इसमें कहा गया है, ‘‘दोनों देशों ने 2025-2026 के दौरान इस योजना को लागू करने पर सहमति व्यक्त की और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं तथा सीखों का आदान-प्रदान जारी रखने का भी निर्णय लिया।’’


भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय कर रहे थे, जबकि रूसी पक्ष का नेतृत्व नागरिक सुरक्षा, आपात स्थिति और प्राकृतिक आपदाओं के परिणामों के उन्मूलन मंत्री कुरेनकोव अलेक्सांद्र व्याचेस्लावोविच ने किया। बैठक के दौरान, सहयोग के समग्र ढांचे के भीतर तीन प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया - जोखिम पूर्वानुमान और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए अंतरिक्ष निगरानी प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल, बड़े पैमाने पर आपदाओं का जवाब देने के अनुभवों का आदान-प्रदान और अग्निशमन एवं बचाव विशेषज्ञों के प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग।

दोनों पक्षों ने आयोग की अगली बैठक 2026 में भारत में आयोजित करने की मंशा भी व्यक्त की। आपातकालीन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर भारत-रूस संयुक्त आयोग की पहली बैठक 2016 में यहां आयोजित की गई थी।

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