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Pre-Monsoon: भारत में प्री-मानसून सीजन में अबतक 28 फीसदी अधिक बारिश हुई, गेहूं और अन्य फसलों को नुकसान

Fri, 05 May 2023 07:15 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 05 May 2023 07:15 PM IST
सार

आईएमडी के अनुसार, 21 अप्रैल के बाद से भारत में एक भी जगह पर लू चलने की सूचना नहीं है। आईएमडी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि अप्रैल और मई में बिना लू के इतनी लंबी अवधि "बहुत दुर्लभ" है।

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India received 28 percent excess rainfall in the pre-monsoon season so far
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत में अब तक प्री-मानसून सीजन में 28 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जबकि मध्य क्षेत्र में सामान्य से 268 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। वहीं, एक मार्च से तीन मई तक पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 29 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई। इन इलाकों में 199.9 मिमी सामान्य बारिश के मुकाबले 141.5 मिमी बारिश दर्ज की गई।

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उत्तर-पश्चिम भारत, यानी पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड में 18 फीसदी अधिक बारिश (83.4 मिमी के सामान्य के मुकाबले 98.3 मिमी) दर्ज की गई, जबकि इस अवधि के दौरान प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 88 फीसदी अधिक (54.2 मिमी के सामान्य के मुकाबले 102 मिमी) बारिश दर्ज की गई। 

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मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र सहित मध्य भारत में 268 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई। इन इलाकों में 18.2 मिमी सामान्य के मुकाबले 67 मिमी बारिश दर्ज की गई। 21-22 अप्रैल से देश के बड़े हिस्सों में, पूर्वी और पूर्वोत्तर भागों को छोड़कर, कई बैक-टू-बैक मौसम प्रणालियों के कारण लंबे समय तक बारिश हुई। नतीजतन, देश के अधिकांश हिस्सों में इस अवधि के दौरान सामान्य दिन के तापमान की तुलना में काफी कम तापमान दर्ज किया गया।

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आईएमडी के अनुसार, 21 अप्रैल के बाद से भारत में एक भी जगह पर लू चलने की सूचना नहीं है। आईएमडी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि अप्रैल और मई में बिना लू के इतनी लंबी अवधि "बहुत दुर्लभ" है। मई महीने में आमतौर पर भारत में सबसे अधिक गर्मी देखी जाती है। इस महीने के दौरान तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, खासकर देश के उत्तर, उत्तर पश्चिम और मध्य भागों में।


कब घोषित किया जाता है हीटवेव
अगर किसी मौसम केंद्र का अधिकतम तापमान मैदानी इलाकों में कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस, तटीय क्षेत्रों में कम से कम 37 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में कम से कम 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री सेल्सियस तापमान ऊपर हो जाता है तब हीटवेव घोषित किया जाता है। 1901 में रिकॉर्ड रखने की परंपरा शुरू होने के बाद से भारत में इस साल फरवरी में सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई और आईएमडी ने अप्रैल से जून तक देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम तापमान और मध्य, पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में अधिक गर्मी के दिनों की भविष्यवाणी की है।

मौसम कार्यालय ने अप्रैल में भविष्यवाणी की थी कि अलनीनो की स्थिति विकसित होने के बावजूद भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम (जून से सितंबर) के दौरान सामान्य बारिश होगी। मौसम विभाग ने कहा था कि यह लगभग 87 सेमी की लंबी अवधि के औसत के मुकाबले 96 प्रतिशत (5 प्रतिशत की त्रुटि मार्जिन के साथ) होने की संभावना है।

आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2019 में मानसून के मौसम में 971.8 मिमी, 2020 में 961.4 मिमी, 2021 में 874.5 मिमी और 2022 में 924.8 मिमी बारिश हुई। देश में 2018 में सीजन में 804.1 मिमी, 2017 में 845.9 मिमी, 2016 में 864.4 मिमी और 2015 में 765.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। पिछले साल भारत में गर्मी की लहरों के शुरुआती हमले ने भारत में गेहूं के उत्पादन को प्रभावित किया, जिससे दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक देश ने मई में अनाज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। इस साल मार्च में सरकार ने कहा कि गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक देश खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू आपूर्ति को लेकर सहज महसूस नहीं करता।


खराब मौसम के कारण गेहूं और अन्य फसलों को नुकसान
खराब मौसम के कारण हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में लगभग 10,000 हेक्टेयर भूमि पर बोई गई रबी फसल को नुकसान पहुंचा और अब तक लगभग 26.59 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।ऊना के उपायुक्त राघव शर्मा ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार लगभग 11,000 टन गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है और कृषि और बागवानी विभाग के अधिकारियों को फसलों के नुकसान पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। शर्मा ने कहा कि बागवानी क्षेत्र में, लगभग 2,250 किसानों को लगभग 18.25 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, क्योंकि खराब मौसम से फलदार पेड़ और पौधे प्रभावित हुए हैं।

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