कोरोना वायरस महामारी से एक लाख मौतों के करीब पहुंचा भारत
फिलहाल 98,678 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में पहला कोरोना संक्रमित 30 जनवरी को सामने आया था। विश्व स्तर पर भारत में कोरोना से मृत्युदर काफी नियंत्रित स्थिति में रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में अब तक करीब 10 लाख से अधिक लोगों की वायरस से मौत हो चुकी है। जिन तीन देशों में सर्वाधिक मौतें हुई हैं उनमें भारत भी शामिल है।
पिछले एक महीने की स्थिति पर गौर करें तो भारत में रोजाना जितने लोगों की मौत हो रही है उतनी किसी देश में नहीं हो रही है। अगर स्थिति में सुधार नहीं आया तो दुनिया में कोरोना से सर्वाधिक मौतें भारत में हो सकती है।
बच्चे तेजी से फैला सकते हैं संक्रमण
कोरोना वायरस का संक्रमण बच्चों के जरिए तेजी से फैल सकता है। यह खुलासा पहली बार देश के दो राज्यों तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में एक अध्ययन से हुआ है। करीब पांच लाख लोगों पर किए गए अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कुल संक्रमितों का 10 भाग सुपर स्प्रेर है। यानी इन मरीजों की वजह से राज्य में सबसे अधिक लोगों को कोरोना संक्रमण हुआ।
इसके अलावा एक कमरे में रहने वाले किसी मरीज से सभी सदस्यों को संंक्रमण फैलने की भी पुष्टि हुई है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज डायनामिक्स इकनॉमिक्स एंड पॉलिसीज की ओर से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में 5,75,071 लोगों पर संक्रमण के तरीकों का अध्ययन किया गया जिनमें 84,965 लोग संक्रमित निकले।
कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाएं, बच्चे और किशोर: हर्षवर्धन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर मौजूदा कोविड-19 महामारी के कारण पड़ रहे भारी दबाव के बावजूद प्रयास किए जा रहे हैं कि महिलाओं, बच्चों और किशारों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जाएं।
मेटरनल, न्यूबॉर्न ऐंड चाइल्ड हेल्थ (पीएमएनसीएच) के एक कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोविड-19 का सर्वाधिक प्रभाव महिलाओं, बच्चों और किशोरों को झेलना पड़ा है और इसके लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हम सतत संवाद कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि कोविड-19 महामारी के कारण स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़े भारी दबाव के बावजूद महिलाओं, बच्चों और किशोरों को स्वास्थ्य सेवाएं निरंतर मिलती रहें।
कार्यक्रम ‘अकाउंटेबिलिटी ब्रेकफास्ट 2020’ का आयोजन 29 सितंबर को हुआ था। इसमें दुनियाभर के 1,600 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। व्हाइट रिबन अलायंस और एवरी वुमन एवरी चाइल्ड इस कार्यक्रम के सह आयोजक थे।
हर्षवर्धन ने यह भी कहा कि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को सेवा प्रदान नहीं किए जाने को बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।