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India Pakistan Ceasefire: 'ऑपरेशन सिंदूर' से भारत ने क्या पाया? सीजफायर के बाद उठ रहे ये सवाल
सार
India-Pakistan Ceasefire: शनिवार को सीजफायर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक व्यापाक संघर्ष फिलहाल टल गया है। हालांकि, संघर्षविराम की खबरें आने के तुरंत बाद पाकिस्तान की ओर से नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार इसके उल्लंघन की भी खबरें आईं। भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई के रूप में 7 मई की सुबह ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
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भारत पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ट्वीट ने केंद्र सरकार को उलझा दिया है। विपक्ष सरकार से सवाल कर रहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्यों की? कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस पर चर्चा कराने की मांग की है। वहीं, सीजफायर की घोषणा होने के बाद ऑपरेशन सिंदूर किन लक्ष्यों को लेकर शुरू किया गया था और क्या (सीजफायर के पहले) इसे हासिल कर लिया गया है, इस पर विशेषज्ञों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
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रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी जैसे कुछ विशेषज्ञों ने ऐसे समय में सीजफायर करने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भारत ने अपनी पुरानी गलती दोहराई है। भारत इस स्थिति में एक बेहतर डील कर सकता था, लेकिन बिना अच्छे समझौते के इसे सीजफायर के अंजाम पर पहुंचा दिया गया। वहीं, रिटायर्ड ब्रिगेडियर भुवनेश चौधरी और रिटायर्ड ब्रिगेडियर डीएस त्रिपाठी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में सरकार के इस निर्णय को बिल्कुल सही समय पर सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है।
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क्या ऑपरेशन सिंदूर का लक्ष्य पूरा कर लिया गया?
शनिवार 10 मई को जैसे ही यह खबर सामने आई कि भारत-पाकिस्तान ने आपसी सहमति से सीजफायर करने का निर्णय कर लिया है, हर तरफ केवल एक ही सवाल पूछा जाने लगा कि सरकार ने सीजफायर करने में इतनी जल्दी क्यों कर दी? यह सवाल भी पूछा जाने लगा कि क्या सेना और सरकार ने वह लक्ष्य हासिल कर लिया जिसको लेकर ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था?
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चूंकि सरकार के साथ-साथ सभी रक्षा विशेषज्ञ भी यह मान रहे हैं कि भारत इस समय मजबूत स्थिति में था, उसे इस परिस्थिति का उपयोग पाकिस्तान से आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत कदम उठाने के लिए बाध्य कर सकता था, भारत ने यह हासिल किए बिना सीजफायर पर सहमति क्यों जता दी?
रक्षा विशेषज्ञ (रि.) ब्रिगेडियर भुवनेश चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि जब हमारी वायुसेना ने स्वयं यह बात कह दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है, ऐसे में यह कहना सही नहीं है कि ऑपरेशन सिंदूर समाप्त हो गया है। लेकिन इसके बाद भी, उनका मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने वह लक्ष्य हासिल करने में सफलता हासिल कर ली है, जिसको लेकर उसने इस महत्त्वपूर्ण कार्रवाई को शुरू किया था।
आतंकियों के जनाजे में पाक सैनिकों के शामिल होने से पाकिस्तान बेनकाब
उनके अनुसार, इस ऑपरेशन के दो स्पष्ट लक्ष्य थे- एक तो पाकिस्तान को दुनिया के सामने आतंक को पालने वाले देश के रूप में बेनकाब करना। और दूसरा आतंकियों पर कठोर कार्रवाई करना। उन्होंने कहा कि सात मई को हुए ऑपरेशन सिंदूर में दर्जनों बड़े-बड़े आतंकी मारे गए। इसके बाद पाकिस्तान सेना के अधिकारियों ने उनकी अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया। पाकिस्तान सेनाध्यक्ष की ओर से आतंकियों के जनाजे पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। ये तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखीं। इससे यह साफ हो गया कि आतंकवाद पाकिस्तानी सेना का अहम हिस्सा है। इससे पाकिस्तान की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब हुई है। भारत ने यह लक्ष्य हासिल किया है।
(रि.) ब्रिगेडियर डी.एस. त्रिपाठी ने अमर उजाला से कहा कि भारत ने पहली प्रेस कांफ्रेंस में ही 21 आतंकी कैंपों की जानकारी दी, जिसमें नौ पर हमले कर उन्हें नष्ट कर दिया गया है। भारत ने सीजफायर के पहले यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में हुई कोई भी आतंकी वारदात को देश पर हुआ हमला करार दिया जाएगा। इससे यह भी संदेश है कि भविष्य में इन आतंकी कैंपों पर कार्रवाई की जा सकती है। अब यह पाकिस्तान पर निर्भर करता है कि वह इस स्थिति में कैसा व्यवहार करता है।
'मोदी का दृष्टिकोण समझना महत्वपूर्ण'
रक्षा विशेषज्ञ (रि.) ब्रिगेडियर भुवनेश चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच को समझना महत्त्वपूर्ण है। वे हमेशा आर्थिक प्रगति और विकास की बात करते रहे हैं। साथ ही आतंक जैसे मुद्दों पर कठोर कार्रवाई करने की बात भी करते रहे हैं। पहलगाम के बाद हुई घटना में उनके दोनों ही दृष्टिकोण उचित मात्रा में दिखाई पड़ते हैं। पहले तो वे पर्यटन बढ़ाकर जम्मू-कश्मीर का विकास करना चाहते हैं, लेकिन पहलगाम की घटना होने के बाद आतंकी कैंपों पर कठोर कार्रवाई भी करते हैं।
(रि.) ब्रिगेडियर भुवनेश चौधरी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भी यही बात कही थी कि यह समय युद्ध का नहीं है। कोई भी मसला बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। वे हमेशा विकास को महत्त्व देते हैं। उसे भारी नुकसान पहुंचाने के बाद हमने उसे सीजफायर के लिए मजबूर कर दिया। पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान ने सीजफायर के लिए भारत से लेकर अमेरिका तक गुहार लगाई। ऐसे में यह सेना और केंद्र सरकार की सफलता है कि उसने समयबद्ध तरीके से अपने दोनों लक्ष्य प्राप्त कर लिया।
सीजफायर क्यों?
(रि.) ब्रिगेडियर भुवनेश चौधरी ने कहा कि युद्ध किसी भी परिस्थिति में किसी भी देश का पहला विकल्प नहीं होता। वहीं, युद्ध शुरू हो जाने के बाद इसके कारण होने वाले आर्थिक और मानवीय नुकसान के बाद सबकी पहल सीजफायर या शांति की होती है। ऐसे में सीजफायर जितना भी जल्दी हो जाए, इसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में पहले ही हमले के बाद पाकिस्तान का जितना नुकसान किया गया, उसका एयर डिफेंस जिस तरह खराब कर दिया गया, उसके बाद सीजफायर, यदि पाकिस्तान इसका पालन करता है, एक बेहतर फैसला है। इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
भारत की सैन्य ताकत दिखी
(रि.) ब्रिगेडियर डीएस त्रिपाठी ने कहा कि इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय सेना ने पूरी दुनिया के सामने अपनी मजबूत स्थिति का परिचय दिया है। पाकिस्तान के एक भी नागरिक ठिकाने को कोई नुकसान पहुंचाए बिना केवल आतंकी कैंपों को नष्ट करना हमारी सैन्य क्षमता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि, इस युद्ध के दौरान यह भी साफ दिखाई पड़ गया है कि पाकिस्तान की आम जनता वहां की सेना और सरकार के खिलाफ है। भारत के लिए इससे बड़ी दूसरी सफलता नहीं हो सकती कि पाकिस्तान की जनता ही उनके हुक्मरानों का विश्वास न करे। जबकि उसके उलट इस विकट परिस्थिति में हमारा पूरा देश एकजुट नजर आया। उन्होंने कहा कि इससे पूरी दुनिया में भारत की स्थिति मजबूत हुई है और हमें इसका लाभ मिलेगा।