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संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर एशिया में सिर्फ भारत पिछड़ा
एजेंसी/ संयुक्त राष्ट्र
Updated Wed, 08 Mar 2017 03:49 AM IST
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एशिया में भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां की संसद में 2016 में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को झटका लगा है। यह बात अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्वसंध्या पर वैश्विक अंतर-संसदीय संस्था की रिपोर्ट में कही है।
8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले अंतर-संसदीय संगठन (आईपीयू) द्वारा जारी की गई ‘वुमेन इन पार्लियामेंट इन 2016 : दि ईयर इन रिव्यू’ में कहा गया है कि संसद में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए अधिक महत्वाकांक्षी निर्णयों और मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। इसके साथ ही पिछले दशकों में दुनियाभर में हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति को बनाए रखने की भी आवश्यकता है। रिपोर्ट में निर्णय लेने की प्रक्रिया के साथ महिलाओं की आवाज को सशक्त करने के लिए नई मुहिम छेड़ने पर भी जोर दिया गया।
रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि पिछले सालों की तरह महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को हल्के में नहीं लिया जा सकता। क्षेत्रीय समूहों की गुणवत्ता को रेखांकित करते हुए इसमें कहा गया है कि संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 0.5 फीसदी बढ़ा है। वर्ष 2015 में जहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व 18.8 फीसदी था वहीं पर 2016 में 19.3 फीसदी रहा।
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8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले अंतर-संसदीय संगठन (आईपीयू) द्वारा जारी की गई ‘वुमेन इन पार्लियामेंट इन 2016 : दि ईयर इन रिव्यू’ में कहा गया है कि संसद में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए अधिक महत्वाकांक्षी निर्णयों और मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। इसके साथ ही पिछले दशकों में दुनियाभर में हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति को बनाए रखने की भी आवश्यकता है। रिपोर्ट में निर्णय लेने की प्रक्रिया के साथ महिलाओं की आवाज को सशक्त करने के लिए नई मुहिम छेड़ने पर भी जोर दिया गया।
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रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि पिछले सालों की तरह महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को हल्के में नहीं लिया जा सकता। क्षेत्रीय समूहों की गुणवत्ता को रेखांकित करते हुए इसमें कहा गया है कि संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 0.5 फीसदी बढ़ा है। वर्ष 2015 में जहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व 18.8 फीसदी था वहीं पर 2016 में 19.3 फीसदी रहा।
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2008 में एक प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन पेश किया गया
यह बढ़ोतरी मामूली रही लेकिन चुनाव कराने वाले सभी देशों मसलन ईरान, जापान, लाओस, मंगोलिया, फिलिपींस, दक्षिण कोरिया और वियतनाम में यह दर्ज की गई और केवल भारत पिछड़ गया। 1994 में स्थानीय चुनावों में महिलाओं के लिए सफलतापूर्वक सीटों के आरक्षण की शुरूआत की गई थी। हालांकि 2008 में एक प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन पेश किया गया जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करना था लेकिन संसद में हुई चर्चा में इस विषय पर गतिरोध बना रहा।
जून और जुलाई 2016 में राज्यसभा में प्रत्यक्ष और परोक्ष चुनावों तथा सरकारी मनोनयनों में कुल 244 सदस्यों में 24 महिलाएं ही चुनकर आईं। पिछले वर्ष जहां उच्च सदन में महिलाओं की संख्या 12.8 फीसदी थी वहीं पर इस साल 1.7 फीसदी की कमी के साथ महिलाओं की संख्या 11.1 फीसदी रह गयी।
जून और जुलाई 2016 में राज्यसभा में प्रत्यक्ष और परोक्ष चुनावों तथा सरकारी मनोनयनों में कुल 244 सदस्यों में 24 महिलाएं ही चुनकर आईं। पिछले वर्ष जहां उच्च सदन में महिलाओं की संख्या 12.8 फीसदी थी वहीं पर इस साल 1.7 फीसदी की कमी के साथ महिलाओं की संख्या 11.1 फीसदी रह गयी।