रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची अमेरिका से भारत की कच्चे तेल की खरीद, ट्रेड वॉर का मिला फायदा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 12 Jul 2018 06:53 PM IST
India oil import from US hits record levels, benefit of Trade war
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अमेरिका से भारत की कच्चे तेल की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ईरान पर प्रतिबंध लागू होने से पहले ही ऐसा दिखाई दिया है। कई एशियाई देशों ने तेल आपूर्ति के लिए अमेरिका का रुख किया है। ईरान और वेनेजुएला को छोड़ एशियाई देशों का तेल के लिए अमेरिका पर निर्भर होना ट्रंप प्रशासन की जीत है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों से ईरान से नवंबर तक किसी भी तरह के आयात को पूरी तरह खत्म करने को कहा है। 
ऐसे में भारत की ओर से उससे तेल की खरीद में इजाफा होना अमेरिका के लिए क्रूड के जरिए राजनीतिक हितों को साधने के प्रयास में सफलता की तरह है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर दिन 1.76 मिलियन बैरल कच्चे तेल का निर्यात कर अमेरिका क्रूड के बड़े एक्सपोर्ट्स में से एक हो गया है। यह आंकड़ा अप्रैल महीने का है।

सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में वैश्विक तेल की आपूर्ति में हो रही वृद्धि दबाव में आ सकती है, क्योंकि कई प्रमुख तेल उत्पादकों को व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है। यह बात बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने अपनी जुलाई की रिपोर्ट में कही। आईईए ने रिपोर्ट में पिछले महीने पेट्रोलियम उत्पादक देशों के संगठन (ओपेक) और रूस के बीच तेल की ऊंची कीमतों को घटाने के लिए उत्पादन बढ़ाने के समझौते का स्वागत किया है।

एक दिन पहले ही डॉलर की मजबूती और वैश्विक व्यापार युद्ध का मांग पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंता से दोनों प्रमुख तेल कांट्रैक्ट में गिरावट दर्ज की गई थी। तेल कांट्रैक्ट की बिकवाली में बुधवार को लीबिया से तेल निर्यात खुलने से भी बढ़ावा मिला था। लीबिया से भले ही निर्यात शुरू हो गया हो, आईईए फिर भी भविष्य को लेकर चिंतित है। आईईए ने कहा कि रिपोर्ट लिखने तक स्थिति में सुधार दिरख रहा है, लेकिन हम यह नहीं कह सकते कि स्थिरता आएगी या नहीं। 

रिपोर्ट में हालांकि इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हुए कई हमलों के बाद लीबिया में उत्पादन में पड़ने वाले व्यवधान की ओर इशारा किया गया है। रिपोर्ट में वेनेजुएला में जारी अस्थिरता की ओर भी इशारा किया गया है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान के तेल निर्यात में गिरावट का भी उल्लेख किया गया है। ट्रंप ने कहा है कि वह 2015 में हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग करने जा रहे हैं। आईईए ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में व्यवधान हमें वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव की याद दिला रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक जुलाई तक अमेरिका के प्रडयूर्स और ट्रेडर्स 15 मिलियन बैरल क्रूड ऑइल भारत भेजेंगे, जबकि 2017 में यह आंकड़ा महज 8 मिलियन बैरल ही था। यदि अमेरिका से आने वाले सामान पर चीन ने टैरिफ में इजाफा किया तो फिर भारत की ओर से अमेरिकी कच्चे तेल का आयात बढ़ सकता है। चीन के टैरिफ के चलते भारत को फायदा होगा क्योंकि अमेरिका को कीमतें घटानी पड़ सकती हैं। 

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