चीन पर नकेल कसने के लिए नेपाल में रेल और सड़कों का जाल बिछाएगा भारत
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नेपाल में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए भारत ने कमर कस ली है। इसके लिए भारत ने नेपाल में सड़क का जाल बिछाने संबंधी परियोजना में तेजी लाने और दोनों देशों के बीच रेल संपर्क बढ़ाने के लिए पांच रेल परियोजनाओं पर को अमली जामा पहनाने का फैसला लिया है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाली पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड के बीच हुई वार्ता में नेपाल में भारत के सहयोग से चल रही परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर सहमति बनी।
दोनों देशों के बीच भूकंप के बाद की दो परियोजनाओं के अलावा तराई क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इस दौरान पीएम मोदी ने दोनों देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक, राजनीतिक और भौगोलिक रिश्तों को अद्वितीय करार दिया और नेपाल में विकास के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया। प्रचंड ने नेपाल के विकास में भारत की भूमिका की सराहना की।
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई वार्ता के बाद विदेश सचिव एस जयशंकर और नेपाल में भारत के राजदूत रंजीत रे ने बताया कि रेल संपर्क बढ़ाने के लिए जयनगर से जनकपुर और जोगबनी से विराटनगर रेल परियोजना में तेजी लाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा बढनी से काठमांडू और कुशीनगर से कपिलवस्तु सहित एक अन्य रेल परियोजना शुरू करने पर सहमति बनी।
जल्द नेपाल जाएंगे मोदी
विदेश सचिव के मुताबिक वार्ता में पर्यटन खासतौर से बुद्धिस्ट सर्किट पर गंभीरता से बातचीत हुई। दोनों देशों का मानना था कि यह सर्किट दुनिया के लोगों को आकर्षित करने में सफल होगा।
भूकंप के बाद नेपाल में 50 हजार घर बनाने की सहमति दे चुके भारत ने इस क्रम में प्रति मकान दी जाने वाली राशि को दो लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर दिया है।
भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए नेपाली पीएम प्रचंड ने पीएम मोदी को नेपाल आने का निमंत्रण दिया। मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। अगले महीने राष्ट्रपति नेपाल जाएंगे। इसके बाद पीएम मोदी के जाने का कार्यक्रम तय किया जाएगा।
संविधान पर भारत-नेपाल की तकरार हो सकती है खत्म
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड के भारत दौरे में नेपाली संविधान को लेकर बिगड़े रिश्तों के फिर से पटरी पर आने के आसार बन गए हैं। प्रचंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस विवाद का हल निकालने के लिए भारत के सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है। दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच हुई करीब डेढ़ घंटे की वार्ता में संविधान विवाद पर लंबी चर्चा हुई। दरअसल, नेपाल के नए संविधान में मधेसियों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर दोनों देशों के बीच शुरू हुई कूटनीतिक तनातनी काफी बढ़ गई थी।
विदेश सचिव एस जयशंकर ने बताया कि नेपाल के पीएम प्रचंड ने प्रधानमंत्री मोदी को संविधान में संशोधनों का सिलसिला जारी रखने का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी कोशिश संविधान में सभी वर्गों और क्षेत्रों को समान भागीदारी सुनिश्चित करने की है। इस विवाद का हल निकालने के लिए सभी दलों को नए सिरे से एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है।
मालूम हो कि प्रचंड की यात्रा से पहले यहां आए नेपाल के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने भी संविधान विवाद मामले में सकारात्मक रुख दिखाने का संकेत दिया था। संविधान सहित अन्य पक्षों पर आम सहमति बनाने के लिए अगले महीने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच भी बातचीत होगी।