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भारत ने पाकिस्तान को सिंधु जल समझौता तोड़ने की दी चेतावनी

Fri, 23 Sep 2016 06:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Fri, 23 Sep 2016 06:05 AM IST
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India may revisit Indus Waters Treaty signed with Pakistan in 1960
- फोटो : getty

उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान की चौतरफा घेरेबंदी में जुटे भारत ने उसे सिंधु जल समझौता तोड़ने की चेतावनी दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि द्विपक्षीय संधि आपसी सहयोग और भरोसे के बिना नहीं चल सकती है। भारत ने पाक को चेताया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करे। बृहस्पतिवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने सिंधु जल समझौता तोड़ने के सवाल पर कहा कि किसी भी समझौते के लिए दोनों देशों में आपसी भरोसा और सहयोग होना जरूरी है।

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यह एकतरफा नहीं हो सकता है। उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई के मामले पर उन्होंने कहा कि हमारा काम अपने आप बोलता है और हमारे एक्शन से नतीजे आने शुरू हो गए हैं। स्वरूप ने कहा कि सिंधु समझौते की प्रस्तावना में ही कहा गया है कि यह भरोसे और सहयोग पर आधारित है। हालांकि उन्होंने 56 साल पुरानी संधि को तोड़ने या न तोड़ने पर इतना ही कहा कि कूटनीति में सब कुछ बताया नहीं जाता।
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स्वरूप ने यह भी कहा कि संधि को लागू करने के तरीके पर दोनों देशों के बीच मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की हर हरकत पर हमारी नजर है और दुनिया को हमने पाकिस्तान की असलियत बता दी है। मालूम हो कि एक दिन पहले ही भारत ने पाकिस्तान उच्चायुक्त को तलब कर उड़ी हमले को लेकर कड़ा एतराज जताया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में किसी भी देश ने कश्मीर के मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा, लेकिन पाक पीएम नवाज शरीफ के भाषण का 80 फीसदी हिस्सा कश्मीर पर केंद्रित था।
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उन्होंने कहा कि अमेरिका भी कश्मीर मुद्दे पर अपना दखल नहीं देना चाहता है, लेकिन पाकिस्तान बार बार चेतावनी के बाद भी कश्मीर के मामले में दखल देता है। उन्होंने कहा कि उड़ी हमले की अधिकांश देशों ने निंदा की है। लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान इस मामले में झूठ बोल रहा है। अब दुनिया के सामने पाकिस्तान का झूठ सामने आ चुका है। 

जानिए क्या है सिंधु जल समझौता, क्यों है पाक के लिए खास?

India may revisit Indus Waters Treaty signed with Pakistan in 1960

 सिंधु नदी संधि को सबसे उदार जल बंटवारा माना जाता है। इसके तहत पाकिस्तान को 80.52 फीसदी पानी यानी 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना दिया जाता है। सितंबर 1960 में हुए सिंधु समझौते के तहत उत्तर और दक्षिण को बांटने वाली एक रेखा तय की गई है।

जिसके तहत सिंधु क्षेत्र में आने वाली तीन नदियों का नियंत्रण भारत और तीन का पाकिस्तान को दिया गया है। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और तत्कालीन पाक पीएम अयूब खान ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे।

इसके तहत छह नदियों, ब्यास, रावी, सतलुज, सिंधु, चिनाब और झेलम का पानी दोनों देशों के बीच साझा होता है। पाकिस्तान पर्याप्त पानी नहीं मिलने की शिकायत को लेकर पाकिस्तान कई बार अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में गुहार लगा चुका है।

उड़ी हमला : पाक को पठानकोट मामले जैसी पेशकश नहीं करेगा भारत

India may revisit Indus Waters Treaty signed with Pakistan in 1960
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप - फोटो : ANI

विकास स्वरूप ने कहा कि पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर उन्हें बताया गया है कि पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकियों को किस तरह से करने दे रहा है। बासित को इसके सबूत भी दिखाए गए। स्वरूप ने कहा कि विदेश सचिव एस जयशंकर ने बासित को जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस, पाक ग्रेनेडों की तस्वीरें और फिंगर प्रिंट दिखाए।

साथ ही पेशकश की कि यदि पाक जांच करना चाहे तो आतंकियों की डीएनए सैंपल और फिंगर प्रिंट उसे मुहैया करा दिए जाएंगे। ताकि साबित हो सके कि आतंकी पाकिस्तानी नागरिक ही थे। उन्होंने साफ किया कि डीएनए सैंपल और फिंगर प्रिंट से ज्यादा पाक को कुछ नहीं दिया जाएगा।

इससे साफ है कि पठानकोट हमले की तरह उड़ी हमले के मामले में पाक टीम को जांच के लिए आने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

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