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Health Report: कालाजार मुक्त हुआ भारत, स्वास्थ्य मंत्रालय ने 15 साल की समीक्षा रिपोर्ट तैयार की

Tue, 20 Feb 2024 06:27 AM IST
जलज मिश्रा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 20 Feb 2024 06:27 AM IST
सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीते 15 साल की समीक्षा रिपोर्ट में बताया है कि 10 हजार की आबादी पर अगर मरीजों की संख्या एक से नीचे रहती है तो उस स्थिति को रोग मुक्त माना जाता है। भारत में 31 दिसंबर 2023 तक कुल 583 मामले सामने आए हैं।

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India Kala Azar free Health Ministry review report
अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एक्स/मनसुख मंडाविया

विस्तार

एक लंबी लड़ाई के बाद भारत कालाजार मुक्त हो गया है। साल 2023 में 140 करोड़ की आबादी पर केवल 583 मामले सामने आए जो वैश्विक मानकों के अनुसार, रोग उन्मूलन की स्थिति है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने यह स्वीकार किया है कि भारत में अब कालाजार का संक्रमण काबू में है। पिछले वर्ष बांग्लादेश कालाजार मुक्त हुआ था। बांग्लादेश के बाद भारत ऐसा करने वाला दूसरा देश बन गया है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीते 15 साल की समीक्षा रिपोर्ट में बताया है कि 10 हजार की आबादी पर अगर मरीजों की संख्या एक से नीचे रहती है तो उस स्थिति को रोग मुक्त माना जाता है। भारत में 31 दिसंबर 2023 तक कुल 583 मामले सामने आए हैं। यह आंकड़ा वैश्विक मानक को पूरा करता है। साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल के 633 ब्लॉक में 99 फीसदी अब रोग मुक्त हैं। मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि भारत को बहुत जल्द कालाजार रोग उन्मूलन का प्रमाणपत्र हासिल होगा।

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कई साल की लड़ाई के बाद सफलता
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव मांझी के मुताबिक, कई साल की लड़ाई के बाद भारत को अब सफलता मिली है। इस बीमारी से मुक्त होने के लिए साल 2014 से लगातार प्रयास किए जा रहे थे। यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल चार सर्वाधिक प्रभावित वाले राज्य हैं, जहां एक समय पहले तक हजारों लोगों की सालाना इस बीमारी से मौत हुई। केंद्र सरकार ने साल 2023 तक रोग मुक्ति का लक्ष्य रखा जिसे 31 दिसंबर 2023 को हासिल किया गया।

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अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण स्त्रोत की पहचान करने और प्रसार को रोकने के लिए माइक्रो स्तर पर काम किया गया। इसका नतीजा यह रहा कि 633 स्थानिक ब्लॉक में प्रति 10 हजार पर एक से कम मामले पहुंचे हैं। भारत में 2022 से अब तक कालाजार से एक भी रोगी की मौत नहीं हुई है।

आंकड़े बढ़ाते गए हौसला
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हर साल जैसे-जैसे नए मामलों की संख्या कम होती दिखाई दी तो स्वास्थ्य कर्मचारियों के हौसला भी बढ़ता गया। 2015 में 8,500 मामले व पांच मौत हुईं। 2016 में 6,249 मामले, 2017 में 5,758 और 2018 में 4,386 मरीज मिले। 2019 और 2020 में एक भी मरीज की मौत नहीं हुई, लेकिन कोरोना के चलते नए मरीजों की पहचान काफी प्रभावित हुई। इसके बाद 2021 में 1,267 मामले सामने आए लेकिन इसके बाद से नए मरीजों की संख्या एक हजार से नीचे है।

2026 में पूरा दक्षिण पूर्व एशिया हो सकता है मुक्त
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कालाजार के खिलाफ किए प्रयासों से एक दशक में दक्षिण पूर्व एशिया में इसके मामले 95% घटे हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के सभी 11 सदस्यों को 2026 तक कालाजार मुक्त करने के लिए रूपरेखा भी पेश की गई।

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