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PAK के साथ बातचीत बंद करने के पक्ष में नहीं है भारत
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 18 Aug 2016 08:43 AM IST
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- फोटो : file photo
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भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सौहार्दपूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए पड़ोसी देश के साथ आपसी संवाद प्रक्रिया को जारी रखेगा। इसी क्रम में भारत ने कश्मीर पर वार्ता के पाकिस्तान के प्रस्ताव को ठुकराते हुए विदेश सचिव स्तर की वार्ता का न्यौता स्वीकार कर लिया है।
पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज चौधरी ने सोमवार 15 अगस्त को इस्लामाबाद में भारत के उच्चायुक्त गौतम बंबावले को एक चिट्ठी सौंपी थी। इसमें विदेश सचिव एस जयशंकर इस्लामाबाद आकर जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर वार्ता का प्रस्ताव था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने भी इसी आशय का बयान दिया।
नई दिल्ली ने इस्लामाबाद के विदेश सचिव स्तरीय वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार लिया है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि वह जम्मू-कश्मीर पर नहीं बल्कि सीमापार के आतंकवाद पर विदेश सचिव स्तरीय चर्चा चाहता है। विदेश मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत हमेशा से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मुद्दों का वार्ता के जरिए समाधान का पक्षधर है। प्रस्ताव स्वीकार करके एक बार फिर भारत ने यही प्रतिबद्धता दोहराई है। इसे दोनों देशों के बीच संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के क्रम में भी देखा जा रहा है।
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इससे पहले पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी 26 अप्रैल 2016को हार्ट आफ एशिया सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे। इस दौरान वह विदेश सचिव एस जयशंकर के कार्यालय में उनसे मिले थे। दोनों विदेश सचिवों की यह भेंट पठानकोट पर आतंकी हमले के बाद हुई थी।
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पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज चौधरी ने सोमवार 15 अगस्त को इस्लामाबाद में भारत के उच्चायुक्त गौतम बंबावले को एक चिट्ठी सौंपी थी। इसमें विदेश सचिव एस जयशंकर इस्लामाबाद आकर जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर वार्ता का प्रस्ताव था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने भी इसी आशय का बयान दिया।
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नई दिल्ली ने इस्लामाबाद के विदेश सचिव स्तरीय वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार लिया है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि वह जम्मू-कश्मीर पर नहीं बल्कि सीमापार के आतंकवाद पर विदेश सचिव स्तरीय चर्चा चाहता है। विदेश मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत हमेशा से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मुद्दों का वार्ता के जरिए समाधान का पक्षधर है। प्रस्ताव स्वीकार करके एक बार फिर भारत ने यही प्रतिबद्धता दोहराई है। इसे दोनों देशों के बीच संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के क्रम में भी देखा जा रहा है।
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इससे पहले पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी 26 अप्रैल 2016को हार्ट आफ एशिया सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे। इस दौरान वह विदेश सचिव एस जयशंकर के कार्यालय में उनसे मिले थे। दोनों विदेश सचिवों की यह भेंट पठानकोट पर आतंकी हमले के बाद हुई थी।
प्रधानमंत्री मोदी सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नवंबर इस्लामाबाद जाएंगे
माना यह जा रहा है कि इसी कड़ी में पाकिस्तान ने भारत को विदेश सचिव स्तरीय वार्ता को आगे बढ़ाने की कूटनीतिक पहल की है और भारत ने भी इसे उसी स्तर पर पहल करके स्वीकार लिया है। ऐसे में विदेश सचिव एस जयशंकर जल्द ही पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं और दोनों विदेश सचिव के बीच में वार्ता प्रक्रिया को ठोस आधार दिया जा सकता है।
भारत द्वारा विदेश सचिव स्तरीय वार्ता स्वीकारने के बाद माना जा रहा है कि भारत किसी भी सूरत में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन(सार्क) के मंच को कमजोर करने के पक्ष में नहीं है। इससे इसका साफ संकेत हैं कि राजनीतिक स्तर पर चाहे जो बयानबाजी हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सार्क शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नवंबर 2016 में इस्लामाबाद जाएंगे।
पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर ने इस मामले में पूछने पर बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते तल्ख और बेकाबू हो रहे थे। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान और भारत के विदेश सचिव ने संवाद प्रक्रिया की गुंजाइश को बनाए रखने की पहल की है। पाकिस्तान के विदेश सचिव ने एक एजेंडे के साथ प्रस्ताव भेजा और उस एजेंडे को खारिज करते हुए नए एजेंडे के साथ भारतीय विदेश सचिव ने इसे स्वीकार कर लिया है। कूटनीति में यह चलता है और ऐसे में यदि विदेश सचिव पाकिस्तान गए तो दोनों देशों के बीच रिश्तों को समान्य बनाने की दिशा में बड़ी पहल होगी।
भारत द्वारा विदेश सचिव स्तरीय वार्ता स्वीकारने के बाद माना जा रहा है कि भारत किसी भी सूरत में दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन(सार्क) के मंच को कमजोर करने के पक्ष में नहीं है। इससे इसका साफ संकेत हैं कि राजनीतिक स्तर पर चाहे जो बयानबाजी हो लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सार्क शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नवंबर 2016 में इस्लामाबाद जाएंगे।
पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर ने इस मामले में पूछने पर बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते तल्ख और बेकाबू हो रहे थे। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान और भारत के विदेश सचिव ने संवाद प्रक्रिया की गुंजाइश को बनाए रखने की पहल की है। पाकिस्तान के विदेश सचिव ने एक एजेंडे के साथ प्रस्ताव भेजा और उस एजेंडे को खारिज करते हुए नए एजेंडे के साथ भारतीय विदेश सचिव ने इसे स्वीकार कर लिया है। कूटनीति में यह चलता है और ऐसे में यदि विदेश सचिव पाकिस्तान गए तो दोनों देशों के बीच रिश्तों को समान्य बनाने की दिशा में बड़ी पहल होगी।