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हितों की रक्षा के लिए भारत कर रहा है मालदीव में हस्तक्षेप पर विचार

Tue, 06 Feb 2018 09:08 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Tue, 06 Feb 2018 09:08 PM IST
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India is looking to intervene in the Maldives to protect interests
मालदीव में लगातार बदल रहे घटनाक्रम ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इसके बाबत एक बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने वहां के उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस समेत अन्य जजों तथा राजनीतिक दलों के नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर चिंता जताई है। जारी विज्ञप्ति में भारत ने कहा कि वहां के हालात पर नई दिल्ली गहराई से नजर रख रही है। इस क्रम में उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि नई दिल्ली मालदीव में हितों की रक्षा तथा वहां के लोगों के लिए प्रजातंत्र की वापसी के क्रम में हस्तक्षेप किए जाने पर भी विचार कर रही है।
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हालांकि भारत द्वारा मालदीव में हस्तक्षेप करने की खबर पुष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन माना जा रहा है कि भारत पड़ोसी देश को लेकरे गंभीर है और सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति आने के बाद इसे पुष्टि के तौर पर भी देखा जा रहा है। इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को मालदीव में आपातकाल लागू होने के बाद अपने नागरिकों को वहां न जाने, सावधानी बरतने की सलाह दी थी। 
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सूत्र बताते हैं कि भारत फिलहाल मालदीव के हालात को लेकर वेट एंड वॉच की मुद्रा में है। मालदीव भारत का पड़ोसी देश है। समुद्री सुरक्षा के लिहाज से मालदीव का भारत के लिए खास महत्व है। पिछले काफी समय से चीन भी मालदीव में अपनी मजबूत पकड़ बनाने में लगा है। वहां के मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल मामून गयूम के सौतेले भाई हैं। यामीन 2013 में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को सत्ता से हटाकर काबिज हुए थे और उन्हें चीन का हितैषी भी माना जाता है। कहां जाता है कि जब से राष्ट्रपति यामीन सत्ता में आए हैं, मालदीव में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की पैठ भी बढ़ी है। 
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पहले भी भारत ने रोका था तख्तापलट

India is looking to intervene in the Maldives to protect interests
भारत क्यों? 

मालदीव के विपक्षी दलों ने भारत, अमेरिका, श्रीलंका समेत यूरोपीय देशों से वहां के प्रजातंत्र पर मंडरा रहे खतरे के प्रति आगाह करते हुए मालदीव में हस्तक्षेप करने की अपील की है। अमेरिका ने भी मालदीव के हालात पर गंभीर चिंता जताई है और मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन से संविधान तथा प्रजातंत्र के अनुपालना की अपील की है। मालदीव के उच्चतम न्यायालय ने वहां के राजनीतिक दलों के कैदियों को रिहा करने का फैसला दिया था। लेकिन इसके जवाब में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने न केवल इस निर्णय को मानने में असमर्थता जताई बल्कि पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल मामून गयूम, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद, जज अली हमीद, ज्यूडिशियल एमिनिस्ट्रेटर हसन सईद को गिरफ्तार कर लिया और 15 दिन के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी। इससे वहां न केवल प्रजातंत्र खतरे में है, बल्कि आपातकाल के चलते नागरिक संवैधानिक अधिकारों से वंचित है।

पहले भी भारत ने रोका था तख्तापलट

भारत 1980 के दशक में भी मालदीव में तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल मामून गयूब का तख्ता पलट की कोशिश को नाकाम किया था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मालदीव में सेना भेजने और अपरेशन कैक्टस को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अनुमति दी थी। वायुसेना ने मालदीव में सेना के जवानों को पहुंचाया था और भारतीय सुरक्षा बलों ने वहां के विद्रोह को कुचल दिया था। इसमें विद्रोही नेता अब्दुल लुतूफी को पकड़कर मालदीव की सरकार को सौंपने में कामयाबी मिली थी। 
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