{"_id":"64b282f32320d50aa20ef1c9","slug":"india-france-inks-scorpene-submarines-deal-here-are-the-specifications-of-the-subs-2023-07-15","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Scorpene: पीएम के फ्रांस दौरे में स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की डील पक्की, जानें दुश्मनों की काल इस सबमरीन की खूबी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Scorpene: पीएम के फ्रांस दौरे में स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की डील पक्की, जानें दुश्मनों की काल इस सबमरीन की खूबी
Sat, 15 Jul 2023 05:21 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Sat, 15 Jul 2023 05:21 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
स्कॉर्पीन पनडुब्बी
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय फ्रांस यात्रा रविवार को संपन्न हो गई। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम रक्षा समझौते हुए। दोनों देशों ने फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर इंजन के संयुक्त विकास और भारतीय नौसेना के लिए स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण सहित कई रक्षा परियोजनाओं की घोषणा की है। इससे पहले रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने गुरुवार को नौसेना के लिए तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों और 26 राफेल समुद्री लड़ाकू जेट खरीदने के लिए हजारों करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी।आइए जानते हैं कि स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए भारत-फ्रांस का समझौता क्या है? भारत को इन पनडुब्बियों की जरूरत क्यों है? आखिर इस पनडुब्बी की खासियत क्या है?
नरेंद्र मोदी, इमैनुएल मैक्रों
- फोटो :
अमर उजाला
स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए भारत-फ्रांस का समझौता क्या है?
13-14 जुलाई को हुई पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा भारत के रक्षा क्षेत्र के नजरिए से बेहद खास रही। इस दौरान दोनों देशों के बीच तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद की घोषणा हुई। जानकारी के अनुसार, पनडुब्बियों को नौसेना द्वारा रिपीट क्लॉज के तहत हासिल किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें मुंबई में मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड (एमडीएल) में बनाया जाएगा।
एमडीएल प्रोजेक्ट-75 के तहत छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है। इसके लिए एमडीएल ने फ्रांस की एक रक्षा कंपनी 'नेवल ग्रुप' के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का सौदा किया था। छह में से पांच पनडुब्बियां पहले ही चालू हो चुकी हैं और आखिरी अगले साल की शुरुआत में चालू होने की संभावना है।
इस परियोजना के तहत पांचवीं पनडुब्बी आईएनएस वागीर इस साल जनवरी में कमीशन की गई थी। अन्य आईएनएस कलवरी, आईएनएस खंडेरी, आईएनएस करंज और आईएनएस वेला को 2017 और 2021 के बीच चालू किया गया था। इस साल मई में छठी पनडुब्बी वाग्शीर ने अपना समुद्री परीक्षण शुरू किया।
अब, डीएसी ने एमडीएल द्वारा निर्मित की जाने वाली तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों को मंजूरी दे दी है। इनमें पहले जैसे ही स्पेसिफिकेशन होने की संभावना है।
13-14 जुलाई को हुई पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा भारत के रक्षा क्षेत्र के नजरिए से बेहद खास रही। इस दौरान दोनों देशों के बीच तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद की घोषणा हुई। जानकारी के अनुसार, पनडुब्बियों को नौसेना द्वारा रिपीट क्लॉज के तहत हासिल किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें मुंबई में मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड (एमडीएल) में बनाया जाएगा।
एमडीएल प्रोजेक्ट-75 के तहत छह स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है। इसके लिए एमडीएल ने फ्रांस की एक रक्षा कंपनी 'नेवल ग्रुप' के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का सौदा किया था। छह में से पांच पनडुब्बियां पहले ही चालू हो चुकी हैं और आखिरी अगले साल की शुरुआत में चालू होने की संभावना है।
इस परियोजना के तहत पांचवीं पनडुब्बी आईएनएस वागीर इस साल जनवरी में कमीशन की गई थी। अन्य आईएनएस कलवरी, आईएनएस खंडेरी, आईएनएस करंज और आईएनएस वेला को 2017 और 2021 के बीच चालू किया गया था। इस साल मई में छठी पनडुब्बी वाग्शीर ने अपना समुद्री परीक्षण शुरू किया।
अब, डीएसी ने एमडीएल द्वारा निर्मित की जाने वाली तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों को मंजूरी दे दी है। इनमें पहले जैसे ही स्पेसिफिकेशन होने की संभावना है।
स्कॉर्पीन श्रेणी की पांचवी पनडुब्बी वागीर
- फोटो :
Twitter/@DefPROMumbai
भारत को इन पनडुब्बियों की जरूरत क्यों है?
इस डील से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट 75 के तहत पनडुब्बियों की डिलीवरी में देरी के साथ-साथ भारत के घटते पनडुब्बी बेड़े को मजबूत करने के लिए तीन अतिरिक्त पनडुब्बियों की खरीद की आवश्यकता महसूस की गई थी।
फिलहाल नौसेना के पास सेवा में 16 पारंपरिक पनडुब्बियां हैं। इनमें से सात सिंधुघोष श्रेणी (रूसी किलो श्रेणी), चार शिशुमार श्रेणी (संशोधित जर्मन टाइप 209) और पांच कलवरी श्रेणी (फ्रेंच स्कॉर्पीन श्रेणी) की हैं। हालांकि, अपने सभी ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए नौसेना को कम से कम 18 ऐसी पनडुब्बियों की आवश्यकता है।
इसके अलावा बीच-बीच में कई पनडुब्बियों की मरम्मत होती है, जिससे परिचालन पनडुब्बियों की ताकत में और कमी आती है। यहां तक कि हाल ही में कमीशन हुई कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों को भी जल्द ही आगामी मरम्मत के लिए भेजा जाना है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन पनडुब्बियों की खरीद से न केवल नौसेना के जरूरी फोर्स लेवल और ऑपरेशन तत्परता को बनाए रखने में मदद मिलेगी, बल्कि घरेलू क्षेत्र में रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर भी पैदा होंगे। गुरुवार को एक बयान में कहा गया, 'इससे एमडीएल को पनडुब्बी निर्माण में अपनी क्षमता और विशेषज्ञता को और बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।'
इस डील से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट 75 के तहत पनडुब्बियों की डिलीवरी में देरी के साथ-साथ भारत के घटते पनडुब्बी बेड़े को मजबूत करने के लिए तीन अतिरिक्त पनडुब्बियों की खरीद की आवश्यकता महसूस की गई थी।
फिलहाल नौसेना के पास सेवा में 16 पारंपरिक पनडुब्बियां हैं। इनमें से सात सिंधुघोष श्रेणी (रूसी किलो श्रेणी), चार शिशुमार श्रेणी (संशोधित जर्मन टाइप 209) और पांच कलवरी श्रेणी (फ्रेंच स्कॉर्पीन श्रेणी) की हैं। हालांकि, अपने सभी ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए नौसेना को कम से कम 18 ऐसी पनडुब्बियों की आवश्यकता है।
इसके अलावा बीच-बीच में कई पनडुब्बियों की मरम्मत होती है, जिससे परिचालन पनडुब्बियों की ताकत में और कमी आती है। यहां तक कि हाल ही में कमीशन हुई कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों को भी जल्द ही आगामी मरम्मत के लिए भेजा जाना है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन पनडुब्बियों की खरीद से न केवल नौसेना के जरूरी फोर्स लेवल और ऑपरेशन तत्परता को बनाए रखने में मदद मिलेगी, बल्कि घरेलू क्षेत्र में रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर भी पैदा होंगे। गुरुवार को एक बयान में कहा गया, 'इससे एमडीएल को पनडुब्बी निर्माण में अपनी क्षमता और विशेषज्ञता को और बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।'
कलवरी
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खासियत क्या हैं?
1,565 टन वजनी इस पनडुब्बी का नाम हिंद महासागर के गहरे समुद्री शिकारी बाघ शार्क की एक प्रजाति के नाम पर रखा गया है। पनडुब्बियों में सटीक निर्देशित हथियारों का उपयोग करके दुश्मन पर विनाशकारी हमला करने की क्षमता जैसी बेहतर स्टील्थ विशेषताएं होती हैं। दरअसल, स्कॉर्पीन पनडुब्बियां पारंपरिक हमलावर पनडुब्बियां होती हैं। उन्हें विरोधी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने और डुबाने के लिए डिजाइन किया गया है। ये टॉरपीडो और मिसाइलों की एक बड़ी श्रृंखला को लॉन्च करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही पनडुब्बियां कई प्रकार की निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने वाले सिस्टम से भी लैस हैं।
इनकी लंबाई 220 फीट जबकि ऊंचाई 40 फीट है। सतह पर आने पर ये 11 समुद्री मील (20 किमी/घंटा) और पानी में डूबने पर 20 समुद्री मील (37 किमी/घंटा) की अधिकतम गति तक पहुंच सकती हैं।
स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां लगभग 50 दिन बिना ईंधन भरे स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता रखती हैं। इनमें डीजल इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार की प्रणोदन प्रणाली डीजल (सतह पर काम करने के लिए) और बिजली (पानी के नीचे काम करने के लिए) दोनों का विकल्प देती है। हालांकि, इन इलेक्ट्रिक बैटरियों को लंबे समय तक डूबे रहने के बाद डीजल इंजन द्वारा रिचार्ज करने की आवश्यकता होती है। यानी कि पनडुब्बी को ऑपरेशन जारी रखने के लिए समय-समय पर सतह पर आना पड़ता है।
1,565 टन वजनी इस पनडुब्बी का नाम हिंद महासागर के गहरे समुद्री शिकारी बाघ शार्क की एक प्रजाति के नाम पर रखा गया है। पनडुब्बियों में सटीक निर्देशित हथियारों का उपयोग करके दुश्मन पर विनाशकारी हमला करने की क्षमता जैसी बेहतर स्टील्थ विशेषताएं होती हैं। दरअसल, स्कॉर्पीन पनडुब्बियां पारंपरिक हमलावर पनडुब्बियां होती हैं। उन्हें विरोधी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने और डुबाने के लिए डिजाइन किया गया है। ये टॉरपीडो और मिसाइलों की एक बड़ी श्रृंखला को लॉन्च करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही पनडुब्बियां कई प्रकार की निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने वाले सिस्टम से भी लैस हैं।
इनकी लंबाई 220 फीट जबकि ऊंचाई 40 फीट है। सतह पर आने पर ये 11 समुद्री मील (20 किमी/घंटा) और पानी में डूबने पर 20 समुद्री मील (37 किमी/घंटा) की अधिकतम गति तक पहुंच सकती हैं।
स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां लगभग 50 दिन बिना ईंधन भरे स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता रखती हैं। इनमें डीजल इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार की प्रणोदन प्रणाली डीजल (सतह पर काम करने के लिए) और बिजली (पानी के नीचे काम करने के लिए) दोनों का विकल्प देती है। हालांकि, इन इलेक्ट्रिक बैटरियों को लंबे समय तक डूबे रहने के बाद डीजल इंजन द्वारा रिचार्ज करने की आवश्यकता होती है। यानी कि पनडुब्बी को ऑपरेशन जारी रखने के लिए समय-समय पर सतह पर आना पड़ता है।