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COP27: अमीर देशों की मनमानी पर भारत चिंतित, कहा- विकासशील देशों पर डाल रहे जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी

Fri, 18 Nov 2022 06:57 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 18 Nov 2022 06:57 AM IST
सार

भारत ने कहा कि हर जलवायु शिखर सम्मेलन में विकसित देश अपने ऐतिहासिक उत्सर्जन से उत्पन्न होने वाली अपनी जिम्मेदारियों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे से ध्यान हटाने वाले साधनों का उपयोग करके अंतर्राष्ट्रीय जलवायु व्यवस्था के लक्ष्यों को बदलना चाहते हैं। 

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India flags concerns over rich nations efforts to extend mitigation to agriculture
सीओपी27 से इतर यूएनएफसीसीसी पवेलियन में सिड्स सत्र को संबोधित करते केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव। - फोटो : Twitter@byadavbjp

विस्तार

हर बार की तरह इस बार भी जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में अमीर देशों ने पर्यावरण असंतुलन के लिए विकासशील देशों पर दबाव बनाने की कोशिश की है। हालांकि, भारत सहित कई विकासशील देश उनके प्रस्तावों को नहीं मानने पर अड़े रहे। भारत ने मिस्र के शहर शर्म अल-शेख में चल रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में गुरुवार को विकसित दुनिया के प्रयासों का विरोध किया। सूत्रों ने बताया कि भारत ने कहा कि अमीर देश अपनी जीवन शैली को बदलकर उत्सर्जन को कम नहीं करना चाहते हैं और विदेशों में सस्ता समाधान खोज रहे हैं। भारत ने कहा कि विकसित देश कृषि क्षेत्र को छोटा करने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहे हैं, हम इसका विरोध करते हैं।

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भारतीय प्रतिनिधिमंडल के एक सूत्र ने कहा कि कोरोनिविया संयुक्त कार्य (Koronivia Joint Work) द्वारा कृषि क्षेत्र को लेकर तैयार किए गए मसौदा निर्णय पाठ (Draft Decision Text) पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत ने कहा कि विकसित देश कृषि के क्षेत्र में कमी के दायरे का विस्तार करने पर जोर देकर गरीब और किसान-समर्थक निर्णय को रोक रहे हैं। इस प्रकार विश्व में खाद्य सुरक्षा की बुनियाद से समझौता किया जा रहा है।
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भारत ने कहा कि हर जलवायु शिखर सम्मेलन में विकसित देश अपने ऐतिहासिक उत्सर्जन से उत्पन्न होने वाली अपनी जिम्मेदारियों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे से ध्यान हटाने वाले साधनों का उपयोग करके अंतर्राष्ट्रीय जलवायु व्यवस्था के लक्ष्यों को बदलना चाहते हैं। ये अमीर देश जलवायु परिवर्तन के लिए अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी से मुंह फेर लेना चाहते हैं। 
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विकसित देश सम्मेलन के संयुक्त घोषणा पत्र में ‘प्रमुख उत्सर्जक’ और ‘शीर्ष उत्सर्जक’ जैसे शब्दों को शामिल करने के लिए जोर लगा रहे हैं, लेकिन भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। यह जानकारी भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल एक सदस्य के हवाले से सामने आई है। भारत का कहना है कि विकसित देश चाहते हैं कि भारत और चीन सहित सभी 20 शीर्ष उत्सर्जक देश अपने उत्सर्जन के स्तर में कटौती करें और ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने को अपना लक्ष्य बनाएं।

अमीर देशों पर भारत का तंज
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि कुछ प्रमुख अनसुलझे मुद्दों में उत्सर्जन कम करने के कार्यक्रम, दूसरी आवधिक समीक्षा, अनुकूलन पर वैश्विक लक्ष्य, नुकसान और क्षति जैसे मामले हैं। उन्होंने भारत की स्थिति को साफ करते हुए कहा कि पर्यावरण असंतुलन में विकसित देशों के ऐतिहासिक योगदान और उनकी जिम्मेदारियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत शीर्ष उत्सर्जक की दलील का समर्थन नहीं कर सकता है। 

  • ऐसी श्रेणियों के आधार पर किसी देश पर कोई जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती, जिसका पेरिस समझौते में कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि आवरण पाठ का फैसला करने से पहले 2020 से पहले की परिस्थितियों का आकलन करना भी जरूरी है।


साथ आया यूरोपीय यूनियन
जलवायु सम्मेलन के दौरान महत्वपूर्ण मुद्दों पर यूरोपीय यूनियन भी भारत के साथ खड़ा नजर आ रहा है। जलवायु वार्ता के पहले सप्ताह के दौरान भी अन्य विकासशील देशों द्वारा समर्थित भारत ने कार्बन डाइऑक्साइड के सभी शीर्ष 20 उत्सर्जकों पर ध्यान केंद्रित करने के अमीर देशों के प्रयास को अवरुद्ध कर दिया था। भारत ने कहा कि कार्रवाई के लिए किसी विशिष्ट संसाधन, क्षेत्र या गैस को नहीं चुना जा सकता। भारत के इस पक्ष का यूरोपीय संघ ने भी समर्थन किया है।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने COP27 वार्ताओं को विभाजित करने की धमकी पर चिंता जताई
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को कहा कि सीओपी27 24 घंटे में पूरा होने वाला है, लेकिन कई देश ''हानि और क्षति' सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बंटे हुए हैं। शर्म अल-शेख के इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में बोलते हुए गुटेरेस ने सभी पक्षों से अनुरोध किया कि वे समय की तात्कालिकता पर उठें और मानवता की सबसे बड़ी चुनौती को हल करने के लिए वास्तविक समाधान पर सहमति जताएं।

गुटेरेस ने पत्रकारों से कहा कि "सीओपी27 24 घंटे में बंद होने वाला है और पार्टियां कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बंटी हुई हैं, जैसा कि पहले संदर्भित किया गया था।। स्पष्ट रूप से पिछले समय की तरह, उत्तर और दक्षिण के बीच और विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच भरोसे का टूटना देखा गया है। यह उंगली उठाने का समय नहीं है। आरोप-प्रत्यारोप का खेल पारस्परिक रूप से सुनिश्चित विनाश का नुस्खा है।"

उन्होंने कहा कि "मैं यहां सभी पक्षों से अपील करने आया हूं कि वे इस क्षण और मानवता के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौती के लिए उठ खड़े हों।" संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने सभी देशों से उस तरह की सार्थक कार्रवाई करने को कहा जिसकी लोगों और पृथ्वी को सख्त जरूरत है। उन्होंने रेखांकित किया कि "दुनिया देख रही है और एक सरल संदेश है: समस्या का सामना करो और कार्य कर के दिखाओ"।

दुनिया को बचाने के लिए भारत लड़ रहा अपने हिस्से की लड़ाई: भूपेंद्र 
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वजह से मानवता के सामने जो अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है, भारत उससे निपटने के लिए संकल्पित है। अनंत ब्रह्मांड में मनुष्य के एक मात्र घर पृथ्वी की रक्षा के लिए भारत अपने स्तर पर लड़ाई जारी रखेगा। ग्लोबल वार्मिंग, बाढ़, सूखा और तूफानों जैसी चरम मौसमी घटनाओं को प्रकृति की आखिरी चेतावनी बताते हुए उन्होंने कहा कि समानता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना वैश्विक पर्यावरण समस्याओं का समाधान संभव नहीं।

वह कॉप27 के एक्सिलेरेटिंग रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर इन स्मॉल आइलैंड डेवलपिंग स्टेट्स (सिड्स) सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की आईपीसीसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत उन देशों में शामिल है, जो जलवायु परिवर्तन के मामले में बहुत संवेदनशील है। हम द्वीपीय देशों के प्रति सहानुभूति रखते, क्योंकि 7,500 किलोमीटर की तट रेखा और 1000 से समुद्री द्वीपों वाले देश के तौर पर उनकी चिंताएं साझा करते हैं।

काश...भारत की राह पर चलती दुनिया
प्रति व्यक्ति उत्सर्जन हवाला देते हुए यादव ने कहा कि भारत का उत्सर्जन आज भी वैश्विक औसत का लगभग एक-तिहाई ही है। अगर पूरी दुनिया प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के लिहाज से भारत की राह पर चलती, तो आज जलवायु संकट पैदा ही नहीं होता। जलवायु संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उन्होंने कहा कि कोई भी पीछे न छूटे की भावना बेहद जरूरी है, क्योंकि कोई भी देश अकेले कामयाब नहीं हो सकता। इस मामले में विकसित और भौगोलिक परिस्थितियों के लिहाज से कुछ देश सौभाग्यशाली हैं, उन्हें आगे बढ़कर मदद करनी होगी।

महत्वपूर्ण पहल है आईरिस
कॉप27 में पिछले सप्ताह आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) की तरफ से शुरू की गई इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर रेजिलिएंट आईलैंड स्टेट्स (आईरिस) पहल शुरू की गई। इस पहल का विजन डॉक्युमेंट पेश करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि आईरिस एक प्रमुख रणनीतिक पहल है, जिसे एक ऐसे उपकरण के तौर पर तैयार किया गया है, जिसके जरिये अत्यधिक कमजोर देशों के मामले में जलवायु अनुकूल समाधान देने में आसानी होगी। 



क्या है आईरिस?
यह एक संयुक्त मंच है, जो सिड्स के हवाले से सर्व-सक्षम अवंसरचना के समाधानों को सीखने, उन्हें साझा करने और उनके क्रियान्वयन में सहायक है। इसकी संकल्पना कॉप26 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत, ऑस्ट्रेलिया, जमैका, मॉरीशस और फीजी ने की थी। इस वर्ष इसके तहत परियोजनाएं शुरू करने का लक्ष्य रक्षा गया है।

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