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17 साल में सबसे सूखा मानसून: 15% कम बारिश से फसलों पर संकट, एशिया पर मंडरा रहा सुपर अल नीनो का खतरा
Sat, 19 Sep 2026 04:46 AM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 19 Sep 2026 04:46 AM IST
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क्या भारत में मचेगी तबाही? आ रहा विनाशकारी सुपर अल नीनो
- फोटो : AI
भारत 17 साल के सबसे सूखे मानसून की ओर बढ़ रहा है। 18 सितंबर तक जून से सितंबर के मानसून सीजन में देश में सामान्य से 15% कम बारिश हुई। मौसम विज्ञान विभाग ने सामान्य से 8% कम बारिश का अनुमान जताया था। बारिश की कमी बरकरार रही, तो यह 2009 के बाद सबसे कमजोर मानसून होगा। तब सामान्य से 18% कम पानी गिरा था।
मानसून के अंतिम चरण में भी बारिश की कमी बनी हुई है। आईएमडी के अनुसार, सितंबर में कुछ हिस्सों में सामान्य से 50% तक कम बारिश हुई। इससे पैदावार घटने व खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। भारत में बारिश का 70% हिस्सा मानसून से पूरा होता है।
बुआई 3.73% कम, दक्षिण में 50% तक चढ़े चावल के दाम
मौसम विभाग के अनुसार, कम बारिश का असर धान, दलहन, कपास और मक्का जैसी फसलों पर पड़ रहा है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 18 सितंबर तक खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल से 15 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में रिकॉर्ड की गई है। सबसे ज्यादा असर धान पर पड़ा है। उसका रकबा 3.73% घटकर 426.81 लाख हेक्टेयर रह गया है।
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एक अनुमान के मुताबिक, चावल उत्पादन एक करोड़ टन घटकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है। यह पिछले साल के रिकॉर्ड उत्पादन से 6.5% कम है। दक्षिण में रकबा 30-40% घटने से प्रीमियम चावल के दाम 50% तक बढ़ गए हैं। आंध्र प्रदेश में ग्रेड-1 चावल 4,000 रुपये/क्विंटल से चढ़कर 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। खाद्यान्न उपलब्धता को लेकर तत्काल बड़ा संकट इसलिए नहीं माना जा रहा, क्योंकि भारत के पास करीब 5.96 करोड़ टन चावल और धान है, जो सरकार के तय लक्ष्य से काफी अधिक है।
देशभर के 218 जिलों में सूखे जैसे हालात
पंजाब में 39, हरियाणा में 22% कम बारिश
इधर, दिल्ली में आठ फीसदी अधिक बारिश
देशभर के 802 में से 218 जिलों में जहां सूखे जैसी स्थिति है, वहीं दिल्ली में इस बार सामान्य से 8% अधिक बारिश हुई। इस बार 562.7 मिमी बारिश हुई। यहां औसतन 522.7 मिमी बारिश होती है। उत्तराखंड में 4 फीसदी अधिक बारिश हुई है।
हिमाचल प्रदेश में सामान्य से 9% कम और पूरे यूपी में 4% कम बारिश हुई। हालांकि गाजियाबाद में 59%, देवरिया में 73%, शामली में 68%, कानपुर देहात में 64% कम पानी गिरा।
178 जलाशयों में 30% कम पानी
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, 178 प्रमुख जलाशयों में क्षमता का 70.66% ही पानी है। कमजोर मानसून का कारण सुपरसाइज्ड अल नीनो का मजबूत होना माना जा रहा है। इसका खतरा भारत-चीन समेत पूरे एशिया पर मंडरा रहा है। प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, जिससे यह अल नीनो बेहद मजबूत हो सकता है। इससे सूखे की स्थिति हो सकती है। खाद्य संकट भी हो सकता है।
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मानसून के अंतिम चरण में भी बारिश की कमी बनी हुई है। आईएमडी के अनुसार, सितंबर में कुछ हिस्सों में सामान्य से 50% तक कम बारिश हुई। इससे पैदावार घटने व खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। भारत में बारिश का 70% हिस्सा मानसून से पूरा होता है।
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बुआई 3.73% कम, दक्षिण में 50% तक चढ़े चावल के दाम
मौसम विभाग के अनुसार, कम बारिश का असर धान, दलहन, कपास और मक्का जैसी फसलों पर पड़ रहा है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 18 सितंबर तक खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल से 15 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में रिकॉर्ड की गई है। सबसे ज्यादा असर धान पर पड़ा है। उसका रकबा 3.73% घटकर 426.81 लाख हेक्टेयर रह गया है।
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एक अनुमान के मुताबिक, चावल उत्पादन एक करोड़ टन घटकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है। यह पिछले साल के रिकॉर्ड उत्पादन से 6.5% कम है। दक्षिण में रकबा 30-40% घटने से प्रीमियम चावल के दाम 50% तक बढ़ गए हैं। आंध्र प्रदेश में ग्रेड-1 चावल 4,000 रुपये/क्विंटल से चढ़कर 6,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। खाद्यान्न उपलब्धता को लेकर तत्काल बड़ा संकट इसलिए नहीं माना जा रहा, क्योंकि भारत के पास करीब 5.96 करोड़ टन चावल और धान है, जो सरकार के तय लक्ष्य से काफी अधिक है।
देशभर के 218 जिलों में सूखे जैसे हालात
पंजाब में 39, हरियाणा में 22% कम बारिश
| राज्य | बारिश में कमी |
|---|---|
| मेघालय | 59% |
| आंध्र प्रदेश | 42% |
| पंजाब | 39% |
| बिहार | 36% |
| कर्नाटक | 30% |
| केरल | 28% |
| असम | 25% |
| तमिलनाडु | 23% |
| राजस्थान | 22% |
| हरियाणा | 22% |
| तेलंगाना | 20% |
इधर, दिल्ली में आठ फीसदी अधिक बारिश
देशभर के 802 में से 218 जिलों में जहां सूखे जैसी स्थिति है, वहीं दिल्ली में इस बार सामान्य से 8% अधिक बारिश हुई। इस बार 562.7 मिमी बारिश हुई। यहां औसतन 522.7 मिमी बारिश होती है। उत्तराखंड में 4 फीसदी अधिक बारिश हुई है।
हिमाचल प्रदेश में सामान्य से 9% कम और पूरे यूपी में 4% कम बारिश हुई। हालांकि गाजियाबाद में 59%, देवरिया में 73%, शामली में 68%, कानपुर देहात में 64% कम पानी गिरा।
178 जलाशयों में 30% कम पानी
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, 178 प्रमुख जलाशयों में क्षमता का 70.66% ही पानी है। कमजोर मानसून का कारण सुपरसाइज्ड अल नीनो का मजबूत होना माना जा रहा है। इसका खतरा भारत-चीन समेत पूरे एशिया पर मंडरा रहा है। प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, जिससे यह अल नीनो बेहद मजबूत हो सकता है। इससे सूखे की स्थिति हो सकती है। खाद्य संकट भी हो सकता है।