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India-EU trade deal: व्यापार समझौते से टैरिफ बाधाएं होंगी कम, 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने मदद
Tue, 27 Jan 2026 04:49 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 27 Jan 2026 04:49 PM IST
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भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल
- फोटो : एएनआई
भारत–यूरोपीय संघ व्यापार समझौता, भारत की वैश्विक आर्थिक सहभागिता में एक ऐतिहासिक और रणनीतिक उपलब्धि है। यह पीएम नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक है, जिसके तहत भारत को एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित किया जा रहा है। व्यापार समझौते से टैरिफ/गैर-टैरिफ बाधाएं कम होंगी। यह समझौता, भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा मददगार साबित होगा। चांदनी चौक से सांसद एवं कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने मंगलवार को यह बात कही है।
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खंडेलवाल ने कहा कि यह समझौता, यूरोपीय संघ, जो विश्व के सबसे बड़े आर्थिक समूहों में से एक है, भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार पहुंच को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगा। भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ और अधिक मजबूती से जोड़ेगा। यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती आर्थिक मजबूती, नीति-स्थिरता और सुधार आधारित विकास का स्पष्ट प्रमाण है। इस समझौते के प्रमुख लाभों को रेखांकित करते हुए खंडेलवाल ने कहा, भारत–ईयू व्यापार समझौते से टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम होंगी। निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। मैन्युफैक्चरिंग और सेवाओं में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को प्रोत्साहन मिलेगा।
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इसके साथ ही तकनीकी हस्तांतरण, नवाचार और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को भी बल मिलेगा। कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यह समझौता एमएसएमई को नए वैश्विक बाजार उपलब्ध कराएगा। इससे आत्मनिर्भर भारत के विजन को वैश्विक एकीकरण के साथ सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। इस समझौते से वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग वस्तुएं एवं ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स एवं हेल्थकेयर, आईटी एवं डिजिटल सेवाएं, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ सहित एमएसएमई और स्टार्टअप्स को विशेष लाभ होगा।
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खंडेलवाल ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने तथा व्यापारियों, निर्माताओं, किसानों और उद्यमियों के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित करने के विजन के पूर्णतः अनुरूप है। भारत–ईयू व्यापार समझौता केवल एक व्यापारिक करार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदारी है, जो भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और वैश्विक व्यापार में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाएगा।