{"_id":"67ce22bb0ac65b3db2056613","slug":"india-eu-talks-on-fta-start-today-amid-trump-s-tariff-threats-know-all-updates-in-hindi-2025-03-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"उम्मीद: ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच FTA पर भारत-ईयू वार्ता आज से, द्विपक्षीय व्यापार को मिल सकता है फायदा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
उम्मीद: ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच FTA पर भारत-ईयू वार्ता आज से, द्विपक्षीय व्यापार को मिल सकता है फायदा
Mon, 10 Mar 2025 04:52 AM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Mon, 10 Mar 2025 04:52 AM IST
सार
यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक की हालिया यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने एफटीए वार्ता को तेजी से आगे बढ़ाने पर बात की थी। इससे पहले बीते महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच भी इस साल के अंत तक समझौते को पूरा करने पर सहमति बनी।
विज्ञापन
उर्सुला वॉन डेर लेयेन और पीएम मोदी।
- फोटो : PTI
विस्तार
भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच 10वें दौर की मुक्त व्यापार समझौता (एफटीओ) वार्ता 10 से 14 मार्च को ब्रसेल्स में होगी। यह वार्ता ऐसे वक्त में हो रही है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से उच्च टैरिफ लगाने की आशंका बनी हुई है। एक अधिकारी के मुताबिक, दोनों ही पक्ष समझौते को इस साल के अंत तक अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं।
यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक की हालिया यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने एफटीए वार्ता को तेजी से आगे बढ़ाने पर बात की थी। इससे पहले बीते महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच भी इस साल के अंत तक समझौते को पूरा करने पर सहमति बनी।
भारत और ईयू के बीच एफटीए वार्ता 2013 में रुक गई थी, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच बाजार खोलने के स्तर को लेकर मतभेद थे। हालांकि, जून 2022 में वार्ता फिर से शुरू हुई। इसके अलावा, निवेश सुरक्षा समझौते और भौगोलिक संकेत (जीआई) समझौते पर भी चर्चा हो रही है। थिंक टैंक वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव कहते हैं कि सरकारी खरीद, निवेश संरक्षण और कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) जैसे पर्यावरण नियम वार्ता को और पेचीदा बनाते हैं। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद, दोनों पक्षों के बीच एक सफल समझौता द्विपक्षीय व्यापार को बड़ा फायदा मिल सकता है। वित्त वर्ष 2024 में भारत-ईयू का कुल व्यापार 190 अरब डॉलर से अधिक हो गया था।
विज्ञापन
भारत ने ईयू को 76 अरब डॉलर का माल और 30 अरब डॉलर की सेवाएं निर्यात कीं। ईयू ने भारत को 61.5 अरब डॉलर का माल और 23 अरब डॉलर की सेवाएं निर्यात कीं।
कई मुद्दे अब भी अनसुलझे
जीटीआरआई के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। खासतौर से कृषि शुल्क, विशेष रूप से डेयरी और शराब के आयात शुल्क, ऑटोमोबाइल शुल्क सहित श्रम-प्रधान वस्तुओं पर असर डालने वाली नियामक बाधाएं अभी भी बनी हुई हैं। एफटीए वार्ता में कृषि अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है। ईयू चाहता है कि भारत डेयरी उत्पादों (जैसे चीज और स्किम्ड मिल्क पाउडर) पर आयात शुल्क घटाए, लेकिन भारत अपने घरेलू डेयरी उद्योग की रक्षा के लिए इन्हें उच्च रखता है। वहीं, ईयू चाहता है कि भारत यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क घटाए, लेकिन भारत अपने स्थानीय कार निर्माताओं की सुरक्षा को लेकर सतर्क है।
भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर की चिंता
भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो इसके विनिर्माण सकल घरेलू उत्पाद का एक तिहाई हिस्सा है और 4 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। यदि पूरी तरह से निर्मित कारों पर आयात शुल्क कम किया जाता है, तो भारतीय वाहन निर्माताओं को नुकसान हो सकता है।
शराब पर टैक्स
ईयू चाहता है कि भारत शराब पर टैक्स घटाए। यूरोपीय शराब उत्पादक भारत में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल, भारत में आयातित शराब पर 150 फीसदी आयात शुल्क लगता है। ईयू चाहता है कि भारत इसे 30-40 फीसदी तक घटा दे। भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ईसीटीए) में वाइन पर 10 वर्षों में टैरिफ को 50 फीसदी तक घटाने की इजाजत दी थी।
विज्ञापन
यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक की हालिया यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने एफटीए वार्ता को तेजी से आगे बढ़ाने पर बात की थी। इससे पहले बीते महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच भी इस साल के अंत तक समझौते को पूरा करने पर सहमति बनी।
विज्ञापन
भारत और ईयू के बीच एफटीए वार्ता 2013 में रुक गई थी, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच बाजार खोलने के स्तर को लेकर मतभेद थे। हालांकि, जून 2022 में वार्ता फिर से शुरू हुई। इसके अलावा, निवेश सुरक्षा समझौते और भौगोलिक संकेत (जीआई) समझौते पर भी चर्चा हो रही है। थिंक टैंक वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव कहते हैं कि सरकारी खरीद, निवेश संरक्षण और कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) जैसे पर्यावरण नियम वार्ता को और पेचीदा बनाते हैं। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद, दोनों पक्षों के बीच एक सफल समझौता द्विपक्षीय व्यापार को बड़ा फायदा मिल सकता है। वित्त वर्ष 2024 में भारत-ईयू का कुल व्यापार 190 अरब डॉलर से अधिक हो गया था।
विज्ञापन
भारत ने ईयू को 76 अरब डॉलर का माल और 30 अरब डॉलर की सेवाएं निर्यात कीं। ईयू ने भारत को 61.5 अरब डॉलर का माल और 23 अरब डॉलर की सेवाएं निर्यात कीं।
कई मुद्दे अब भी अनसुलझे
जीटीआरआई के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। खासतौर से कृषि शुल्क, विशेष रूप से डेयरी और शराब के आयात शुल्क, ऑटोमोबाइल शुल्क सहित श्रम-प्रधान वस्तुओं पर असर डालने वाली नियामक बाधाएं अभी भी बनी हुई हैं। एफटीए वार्ता में कृषि अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है। ईयू चाहता है कि भारत डेयरी उत्पादों (जैसे चीज और स्किम्ड मिल्क पाउडर) पर आयात शुल्क घटाए, लेकिन भारत अपने घरेलू डेयरी उद्योग की रक्षा के लिए इन्हें उच्च रखता है। वहीं, ईयू चाहता है कि भारत यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क घटाए, लेकिन भारत अपने स्थानीय कार निर्माताओं की सुरक्षा को लेकर सतर्क है।
भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर की चिंता
भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो इसके विनिर्माण सकल घरेलू उत्पाद का एक तिहाई हिस्सा है और 4 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। यदि पूरी तरह से निर्मित कारों पर आयात शुल्क कम किया जाता है, तो भारतीय वाहन निर्माताओं को नुकसान हो सकता है।
शराब पर टैक्स
ईयू चाहता है कि भारत शराब पर टैक्स घटाए। यूरोपीय शराब उत्पादक भारत में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल, भारत में आयातित शराब पर 150 फीसदी आयात शुल्क लगता है। ईयू चाहता है कि भारत इसे 30-40 फीसदी तक घटा दे। भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ईसीटीए) में वाइन पर 10 वर्षों में टैरिफ को 50 फीसदी तक घटाने की इजाजत दी थी।