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Army: चीनी सीमा के पास 14500 फुट की ऊंचाई पर भारत ने स्थापित किया टैंक मरम्मत केंद्र, यह अपने आप में रिकॉर्ड

Wed, 15 May 2024 09:47 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Wed, 15 May 2024 09:47 PM IST
सार

भारतीय सेना ने चीनी सीमा के पास न्योमा में और डीबीओ सेक्टर में 14,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर दो बख्तरबंद वाहन रखरखाव और मरम्मत सुविधाएं स्थापित की है। ये इलाका दुनिया में टैंक और सेना के लड़ाकू वाहनों के लिए सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है।

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India established a tank repair centre at a height of 14500 feet near Chinese border
भारतीय सेना (File Photo) - फोटो : प्रतीकात्मक/Wikipedia

विस्तार

भारतीय सेना ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र में दो बख्तरबंद टैंक मरम्मत सुविधाएं स्थापित की हैं। यह अपने आप में एक तरह का रिकॉर्ड है। भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर 500 से अधिक टैंकों और पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों को तैनात किया हुआ है। 

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भारतीय सेना ने चीनी सीमा के पास न्योमा में और डीबीओ सेक्टर में 14,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर दो बख्तरबंद वाहन रखरखाव और मरम्मत सुविधाएं स्थापित की है। ये इलाका दुनिया में टैंक और सेना के लड़ाकू वाहनों के लिए सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है। अप्रैल-मई में चीन सैनिकों की हिमाकत के चलते उत्पन्न गतिरोध के बाद पूर्वी लद्दाख में बड़ी संख्या में टैंक और बीएमपी लड़ाकू वाहनों के साथ-साथ क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल जैसे भारतीय निर्मित बख्तरबंद वाहनों को तैनात किया गया।

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सेना के अधिकारियों ने बताया कि टैंकों और लड़ाकू वाहनों को इन अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया गया है। यहां रखरखाव और मरम्मत के लिए इन वाहनों को वापस ले जाना बहुत मुश्किल काम है। बख्तरबंद वाहनों के संचालन को बनाए रखने के लिए हमने न्योमा और डीबीओ सेक्टर में डीएस-डीबीओ रोड पर केएम-148 के पास मध्यम रखरखाव (रीसेट) सुविधाएं स्थापित की हैं। ये दो मुख्य क्षेत्र हैं जहां पूर्वी लद्दाख सेक्टर में टैंक और आईसीवी संचालन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

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बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रही सेना
सेना बहुत ऊंचाई वाले इलाकों जहां सर्दियों में तापमान बेहद कम रहता है, वहां टी-90, टी-72, बीएमपी और के-9वज्र स्व-चालित हॉवित्जर सहित अपने टैंकों को संचालन लायक बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रही है। हाल ही में सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों (एएफवी) के लिए मध्यम रखरखाव (रीसेट) सुविधा का दौरा किया था। अधिकारियों ने कहा कि नई सुविधाएं टैंकों और लड़ाकू वाहनों की बेहतर सेवाक्षमता और मिशन विश्वसनीयता को बढ़ावा देंगी। ये सुविधाएं ऊबड़-खाबड़ इलाकों और शून्य से 40 डिग्री नीचे तापमान वाले चुनौतीपूर्ण मौसम में भी लड़ाकू बेड़े को परिचालन के लिए तैयार रखने में मददगार होंगी।

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