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...इसलिए भारत ने एस-400 सौदे में नहीं की अमेरिकी धमकी की परवाह
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Updated Fri, 05 Oct 2018 04:19 AM IST
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रूस से अहम एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम सौदे में भारत ने खुद को अमेरिकी प्रतिबंध झेलने के लिए भी तैयार कर लिया है। भारत नहीं चाहता कि दशकों पुराना और विश्वस्त मित्र रूस अमेरिका से बढ़ती नजदीकी के कारण पाकिस्तान और चीन के करीब हो जाए। यही कारण है कि भारत ने पांच अरब अमेरिकी डॉलर वाले इस सौदे में अमेरिकी दबाव और धमकियों की परवाह न करते हुए शुक्रवार को इस समझौते पर मुहर लगाने का फैसला किया है।
दरअसल बीते डेढ़ दशक में यूपीए और वर्तमान मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति में बड़ा परिवर्तन आया है। दोनों ही सरकारों ने रूस के मुकाबले अमेरिका से संबंध बेहतर बनाने को तरजीह दी। इस कारण आतंकवाद मामले में अमेरिका का पाकिस्तान पर दबाव तो बढ़ा, मगर भारत-अमेरिका की बढ़ती निकटता के बीच पाकिस्तान और रूस एक दूसरे केकरीब आते गए। पाकिस्तान को रूस के करीब लाने में चीन ने अहम भूमिका निभाई। जबकि इससे पहले भारत के संदर्भ में रूस जहां चीन से अपने संबंधों में संतुलन साधता रहा था, वहीं पाकिस्तान उसकी सूची में कहीं नहीं था।
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दरअसल बीते डेढ़ दशक में यूपीए और वर्तमान मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति में बड़ा परिवर्तन आया है। दोनों ही सरकारों ने रूस के मुकाबले अमेरिका से संबंध बेहतर बनाने को तरजीह दी। इस कारण आतंकवाद मामले में अमेरिका का पाकिस्तान पर दबाव तो बढ़ा, मगर भारत-अमेरिका की बढ़ती निकटता के बीच पाकिस्तान और रूस एक दूसरे केकरीब आते गए। पाकिस्तान को रूस के करीब लाने में चीन ने अहम भूमिका निभाई। जबकि इससे पहले भारत के संदर्भ में रूस जहां चीन से अपने संबंधों में संतुलन साधता रहा था, वहीं पाकिस्तान उसकी सूची में कहीं नहीं था।
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रूस से बेहतर संबंध इसलिए भी जरूरी
इस मामले में भारत के कान तब खड़े हुए जब साल 2016 में पहली बार रूस और पाकिस्तान ने साझा युद्धाभ्यास किया तो बीते साल वर्ष 1981 के बाद रूस और चीन दोनों ने साझा युद्धाभ्यास किया। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने अमेरिका से हथियार आयात में कटौती की और रूस के साथ एसयू-35 लड़ाकू विमान और टी-90 टैंक हासिल करने के लिए बातचीत शुरू की। रूस से कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का बचाव शुरू किया तो भारत की संप्रभुता के सीधी चुनौती देने वाली पाकिस्तान-चीन से जुड़ी वन बेल्ट वन रोड परियोजना पर कूटनीतिक चुप्पी साध ली।
इसके अलावा एनएसजी और यूएन स्थाई सदस्यता पर चीन के विरोध के बीच भारत के दावे पर भी उदासीन रुख अपनाना शुरू कर दिया। इन बदली परिस्थितियों में भारत ने एक बार फिर से रूस से अपने रिश्तों में संतुलन बनाने की कवायद शुरू की और इसी साल रूस में पीएम नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता में इस सौदे का खाका तैयार किया गया।
इसके अलावा एनएसजी और यूएन स्थाई सदस्यता पर चीन के विरोध के बीच भारत के दावे पर भी उदासीन रुख अपनाना शुरू कर दिया। इन बदली परिस्थितियों में भारत ने एक बार फिर से रूस से अपने रिश्तों में संतुलन बनाने की कवायद शुरू की और इसी साल रूस में पीएम नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता में इस सौदे का खाका तैयार किया गया।
अमेरिका को ज्यादा तवज्जो नहीं
इस सौदे पर अमेरिका की ओर से लगातार दबाव डाले लाने और प्रतिबंध की धमकियों के बाजवूद भारत ने पीछे न हटने का साफ संदेश दिया। भारत ने अमेरिका को पड़ोसी चीन की बढ़ती ताकत का हवाला देते हुए इस सौदे के लिए राजी करने की कोशिश की। हालांकि अमेरिका अब भी भारत के पक्ष से संतुष्ट नहीं है।