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India-China Tension: भारत की तरफ से LAC पर चीन को लग रहे झटके पर झटके! दहशत में आए ड्रैगन ने रखी ये अटपटी मांग

Sat, 28 Sep 2024 08:36 PM IST
Harendra Chaudhary हरेंद्र चौधरी
Updated Sat, 28 Sep 2024 08:36 PM IST
सार

चीन के साथ चल रही तनातनी को देखते हुए चीन के साथ लगीं उत्तरी सीमाओं पर स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम की दो नई रेजिमेंट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि इन रेजिमेंटों के लिए जवानों को ट्रेनिंग दी जा रही है और यह प्रक्रिया अगले छह महीनों में पूरी हो जाएगी।

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India-China Tension: China is getting shock from India on LAC! The terrified dragon made this strange demand
LAC Row - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश में तवांग-पश्चिम कामेंग इलाके में स्थित हिमालय के गोरीचेन रेंज में एक अनाम और अनछुई चोटी का नाम दलाई लामा के नाम पर रखने के बाद भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन को झटके पर झटका देने की तैयारी की है। पहला झटका तो चीन के लिए यह है कि भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम की दो नई रेजिमेंट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, भारत ने तवांग सेक्टर में एक नई आर्टिलरी फायरिंग रेंज भी शुरू की है, जो हाई एल्टीट्यूड इलाके में पहली रेंज है। वहीं भारत की इन तीन पहल के बाद चीन दहशत में आ गया है और अरुणाचल प्रदेश के दो संवेदनशील क्षेत्रों में गश्ती का अधिकार देने की बात कही है। 

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पीक के नामकरण से चीन को दिया कड़ा संदेश
हाल ही में अरुणाचल प्रदेश स्थित राष्ट्रीय पर्वतारोहण और साहसिक खेल संस्थान (NIMAS) की एक टीम ने अरुणाचल प्रदेश के  तवांग-पश्चिम कामेंग इलाके में स्थित हिमालय के गोरीचेन रेंज में 20,942 फीट (6383 मीटर) ऊंची एक अनाम और अनछुई 6383 MSL चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की। खास बात यह रही कि इस चोटी का नाम छठे दलाई लामा के सम्मान में त्सांगयांग ग्यात्सो चोटी रखा गया है, जिनका पूरा नाम रिग्जेन त्सांगयांग ग्यात्सो है। छठे दलाई लामा, त्सांगयांग ग्यात्सो का जन्म 1682 में भारत के वर्तमान अरुणाचल प्रदेश के मोन तवांग क्षेत्र में हुआ था। बता दें कि NIMAS रक्षा मंत्रालय के अधीन एक ऑटोनॉमस बॉडी है। वहीं, भारत का यह कदम चीन के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि भारत ने यह कदम उठा कर न केवल वैश्विक बौद्ध समुदाय बड़ा संदेश दिया है, बल्कि चीन जिस इलाके तवांग पर अपना दावा ठोकता रहा है और अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे इलाकों का नामकरण करता रहा है, इस रणनीति से उसे भी तगड़ा झटका लगा है। 
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पीक के नामकरण को मिलेगी वैश्विक मान्यता
निमास के डायरेक्टर कर्नल रणवीर सिंह जामवाल के मुताबिक निमास ने भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन (IMF) को इस चढ़ाई और शिखर का नाम दलाई लामा के नाम पर रखने के लिए पहले ही सूचित कर दिया था। शिखर के नामकरण के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि "त्सांगयांग ग्यात्सो शिखर" को आधिकारिक मानचित्र पर मान्यता मिले। वहीं सूत्रों का कहना है कि निमास रक्षा मंत्रालय के तहत आता है, और नामकरण के लिए मंत्रालय से ही हरी झंडी मिली है। वहीं निमास की इस पहल के बाद आईएमएफ इस चोटी का आधिकारिक नाम "त्सांगयांग ग्यात्सो पीक" रखेगा, जो वैश्विक स्तर पर मान्य होगा, जो चीन को बर्दाश्त नहीं होगा। क्योंकि चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है, जिसका भारत विरोध करता रहा है, क्योंकि भारत 1914 की मैकमोहन रेखा के आधार पर इसे भारतीय क्षेत्र बताता है। 
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चीन ने जांगनान (अरुणाचल प्रदेश) को बताया चीनी इलाका
वहीं, जिसकी उम्मीद की जा रही थी, चीन ने भी वैसी ही प्रतिक्रिया आई। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, "मैं अधिक व्यापक रूप से कहना चाहता हूं कि जांगनान (अरुणाचल प्रदेश) चीनी का इलाका है, और भारत की तरफ से चीनी क्षेत्र में तथाकथित 'अरुणाचल प्रदेश' की स्थापना करना अवैध और अमान्य है।" उन्होंने दोहराया कि यह चीन का लगातार रुख रहा है। बता दें, कि चीन अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है और अपने क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने के लिए 2017 से इन इलाकों का नाम बदलता रहा है। हालांकि, भारत ने चीन के दावों को दृढ़ता से खारिज करते हुए लगातार कहता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और नाम बदलने के प्रयासों से यह वास्तविकता नहीं बदलेगी।

चीन सीमाओं पर तैनात होंगी पिनाका की नई रेजिमेंट
वहीं भारत चीन के साथ चल रही तनातनी देखते हुए चीन के साथ लगीं उत्तरी सीमाओं पर स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम की दो नई रेजिमेंट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्षा सूत्रों ने बताया कि इन रेजिमेंटों के लिए जवानों को ट्रेनिंग दी जा रही है और यह प्रक्रिया अगले छह महीनों में पूरी हो जाएगी। फिलहाल भारतीय सेना के पास पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सीमा और चीन के साथ उत्तरी सीमा पर चार पिनाका रेजिमेंट हैं। छह स्वीकृत पिनाका रेजिमेंटों में से एक, 214-एमएम मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्च सिस्टम को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चल रहे सीमा गतिरोध के बीच चीन के साथ उत्तरी सीमाओं पर तैनात किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि इन सभी छह रेजिमेंटों को 2024 तक खड़ा किया जाना था। फिलहाल केवल दो रेजिमेंटों को खड़ा करने की प्रक्रिया चल रही है और जो अगले कुछ महीनों में पूरी हो जाएगी। इन सभी छह पिनाका रेजिमेंटों में ऑटोमेटेड गन एमिंग एंड पोजिशनिंग सिस्टम (AGAPS) के साथ 114 लॉन्चर और TPCL और एलएंटी से खरीदे जाने वाले 45 कमांड पोस्ट और BEML से खरीदे जाने वाले 330 वाहन शामिल हैं। बता दें कि अर्मेनिया-अजरबैजान संघर्ष के बीच अर्मेनिया ने भारत को 2,000 करोड़ रुपये की कीमत की चार पिनाका बैटरियों का ऑर्डर दिया है। 

तवांग में नई आर्टिलरी फायरिंग रेंज शुरू
इसके साथ ही, भारतीय सेना ने चीन के साथ चल रहे गतिरोध को देखते हुए वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से सटे तवांग सेक्टर में एक नई आर्टिलरी फायरिंग रेंज भी शुरू की है, जो हाई एल्टीट्यूड इलाके में पहली रेंज है। सेना की आर्टिलरी डिविजन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अदोष कुमार ने बताया कि उत्तरी सीमा पर इस रेंज को सक्रिय करने से तोपों को “वास्तविक ऑपरेशनल माहौल का एहसास” होगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में सेना ने अरुणाचल प्रदेश में दो फायरिंग रेंज खोजी हैं, इनमें तवांग में एक फायरिंग रेंज शुरू हो गई है, जबकि दूसरी को नोटिफाइड करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर में दो और रेंज की पहचान की गई है और संबंधित राज्य सरकारों के साथ मिलकर इस पर बातचीत चल रही है। लेफ्टिनेंट जनरल कुमार ने माना कि हाई एल्टीट्यूड इलाके में फायरिंग रेंज शुरू होने से ट्रेनिंग में काफी सुधार हुआ है।

नई फायरिंग रेंज बनने से चीनी सेना पर लगेगी लगाम
सेना के सूत्रों ने बताया कि पिछले साल अरुणाचल प्रदेश सरकार ने नई फायरिंग रेंज बनाने के लिए भारतीय सेना को मंडला और कमराला में जमीन ट्रांसफर करने पर सहमति जताई थी। तवांग में यांग्त्से के पास 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इन जगहों पर 9 दिसंबर, 2022 को भारतीय और चीनी सेना आमने-सामने थीं। वहीं इन क्षेत्रों में फायरिंग रेंज बनाने के फैसले से संवेदनशील बॉर्डर इलाकों में सेना की स्थिति मजबूत होगी, जो एक अहम रणनीतिक कदम है। सूत्रों का कहना है कि एलएसी के फायरिंग रेंज बनने के बाद चीनी पीएलए की लगातार और आक्रामक कार्रवाइयों पर लगाम लगेगी। क्योंकि पीएलए एलएसी का लगातार उल्लंघन करती रही है, जिसके चलते अक्सर दोनों सेनाओं के बीच झड़पें और गतिरोध की घटनाएं होती हैं। 

यांग्त्से और सुबनसिरी नदी घाटी में मांगी गश्त की मंजूरी
वहीं भारत के इन कदमों के बाद चीन 'सकते' में है। 2020 में गलवां हिंसा के बाद भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए वार्ताओं का दौर जारी है। वहीं चीन की तरफ से भारत सरकार को सुझाव दिया गया है कि उनके सैनिकों को अरुणाचल प्रदेश के दो संवेदनशील इलाकों में गश्त की अनुमति दी जाए। इनमें से एक तवांग के उत्तर-पूर्व में यांग्त्से इलाका है, जहां दोनों सेनाओं के बीच दिसंबर 2022 में घातक झड़प हुई थी। वहीं दूसरा इलाका सुबनसिरी नदी घाटी है, जो मध्य अरुणाचल में हैं और कई दशकों से उस इलाके पर भारत का नियंत्रण है। हालांकि भारत की तरफ से चीन की इन मांगों को अनुचित और तर्कहीन बताया गया है। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में इन दोनों जगहों पर चीन के सैनिकों को गश्त की मंजूरी देने का कोई सवाल ही नहीं उठता है, क्योंकि दोनों ही जगहे भारत के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। 

यांग्त्से में पहले भी कई बार हो चुकी है झड़प
सूत्रों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश की जिन दो जगहों पर चीन गश्त करने की मांग कर रहा है, उन पर चीन ने पहले भी कब्जा करने की कोशिश की है। दिसंबर 2022 में यांग्त्से में हुई झड़प के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बताया था कि चीनी सैनिकों ने 9 दिसंबर को तवांग के यांग्त्से इलाके में एलएसी का उल्लंघन किया था और एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की कोशिश की थी। अक्तूबर 2021 में भी यांग्त्से में दोनों सेनाओं के बीच झड़प हो चुकी है। तब चीन ने 17,000 फुट ऊंची चोटी पर कब्जे की कोशिश की थी, क्योंकि इस चोटी का टैक्टिकल महत्व था और वहां से एलएसी के दोनों तरफ का क्लियर व्यू देखा जा सकता है, इसलिए चीन इस पर कब्जा करना चाहता था। वहीं, मध्य अरुणाचल की सुबनसिरी घाटी में दोनों सेनाएं पहले भी आमने-सामने आ चुकी हैं। 


मुख्य मुद्दा पेट्रोलिंग
बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस हफ्ते मंगलवार को अमेरिका में एक कार्यक्रम में बोलते हुए पहली बार माना था कि एलएसी पर जारी भारत-चीन विवाद का एक हिस्सा पेट्रोलिंग एरिया की पहुंच से जुड़ा हुआ है और इस समय मुख्य मुद्दा पेट्रोलिंग है। उन्होंने बताया कि 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवां में हुई हिंसा के बाद दोनों देशों के बीच पेट्रोलिंग को लेकर तनाव रहा है, जिससे भारत-चीन संबंध काफी हद तक गड़बड़ा गए हैं। पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच एलएसी को लेकर चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए पिछले चार सालों में दोनों पक्षों के बीच हुई 21 दौर की बातचीत हो चुकी है।

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