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Xi Jinping: 'ड्रैगन और हाथी एक साथ आएं, यही सही विकल्प', ट्रंप के मनमाने टैरिफ के बीच PM मोदी से बोले जिनपिंग
Sun, 31 Aug 2025 12:28 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तियानजिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तियानजिन
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 31 Aug 2025 12:28 PM IST
सार
पीएम मोदी और जिनपिंग की बैठक लगभग दस महीनों में दोनों की पहली बैठक थी। यह व्यापार और शुल्कों पर अमेरिका की नीतियों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में अचानक आई गिरावट के मद्देनजर यह महत्वपूर्ण थी।
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शी जिनपिंग की पीएम मोदी से मुलाकात
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत रविवार से सोमवार तक तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन से इतर हुई।
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डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा नीतियों पर कटाक्ष
उन्होंने कहा, 'दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाइयों और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना और संभालना होगा, ताकि हमारे द्विपक्षीय संबंधों का निरंतर, सुदृढ़ और स्थिर विकास हो सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा नीतियों पर कटाक्ष करते हुए शी ने कहा कि दोनों देशों को बहुपक्षवाद को कायम रखना चाहिए। शी ने कहा कि भारत और चीन को एक बहुध्रुवीय विश्व और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अधिक लोकतंत्र के लिए भी काम करना चाहिए।
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'चीन और भारत पूर्व की दो प्राचीन सभ्यताएं'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, 'चीन और भारत पूर्व की दो प्राचीन सभ्यताएं हैं। हम दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं, और हम ग्लोबल साउथ के भी महत्वपूर्ण सदस्य हैं। हम दोनों अपने लोगों की भलाई में सुधार लाने, विकासशील देशों की एकजुटता और कायाकल्प को बढ़ावा देने, और मानव समाज की प्रगति को बढ़ावा देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाते हैं। दोनों देशों के लिए यह सही विकल्प है कि वे ऐसे मित्र बनें जिनके अच्छे पड़ोसी और सौहार्दपूर्ण संबंध हों, ऐसे साझेदार बनें जो एक-दूसरे की सफलता में सहायक हों, और ड्रैगन और हाथी एक साथ आएं।'
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'रिश्तों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने और संभालने की आवश्यकता'
उन्होंने कहा कि आज दुनिया सदी में एक बार होने वाले बदलावों से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय स्थिति अस्थिर और अराजक दोनों है। इस वर्ष चीन-भारत राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है। दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने और संभालने की आवश्यकता है। हमें बहुपक्षवाद को बनाए रखने, एक बहुध्रुवीय विश्व और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अधिक लोकतंत्र लाने के लिए मिलकर काम करने और एशिया और दुनिया भर में शांति और समृद्धि में अपना सच्चा योगदान देने की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी को भी पूरा करना होगा।
दस महीनों में दोनों की पहली बैठक
पीएम मोदी और जिनपिंग की बैठक लगभग दस महीनों में दोनों की पहली बैठक थी। यह व्यापार और शुल्कों पर अमेरिका की नीतियों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में अचानक आई गिरावट के मद्देनजर यह महत्वपूर्ण थी।
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