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सैन्य वार्ता में भारत अडिग, कहा- दो मई से पूर्व की स्थिति बहाल करे चीन

Tue, 23 Jun 2020 05:19 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 23 Jun 2020 05:19 AM IST
सार

  • दोनो देशों के सैन्य कमांडरों के बीच चली 11 घंटे की वार्ता में कोई ठोस नतीजा नहीं
  • चीन को दो टूक-गलवां वाली हिंसक स्थिति पैदा हुई तो भारत उठाएगा हथियार
  • चीन ने पहली बार माना कि गलवां में मारा गया था उसका कमांडर

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India China Corps Commander Level Officer Talks All Updates, India adamant on its stand, says China should restore the situation as before May 2nd
नरेंद्र मोदी-शी जिनपिंग

विस्तार

पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीन के मोल्डो में पहली बार हो रही सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। हालांकि, भारत ने अडिग रहते हुए दो टूक कहा है कि गलवां, पैंगोंग त्सो और हॉट स्प्रिंग पर जब तक 2 मई से पहले वाली स्थिति बहाल नहीं हो जाती पूरी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हालात नाजुक बने रहेंगे।

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कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने अपने चीनी समकक्ष मेजर जनरल लिऊ लिन को सीमा पर प्रोटोकॉल में बदलाव की जानकारी भी दे दी है। भारत ने साफ कर दिया है कि करीब 3500 किलोमीटर लंबी एलएसी पर कहीं भी चीन की तरफ से गलवां वाली हिंसक स्थिति पैदा होती है तो वहां मौजूद कमांडर आत्मरक्षा में हथियार इस्तेमाल करेंगे।
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सूत्रों के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल ने साफ कर दिया कि यह चीन की जिम्मेदारी है कि सीमा पर हालात हिंसक न होने दे, वर्ना हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल, कोई नतीजा नहीं निकलने की सूरत में अगली बातचीत इसी हफ्ते होने की संभावना है। पूर्वी लद्दाख के चुशुल के दूसरी तरफ चीन के मोल्डो में हुई इस बातचीत के लिए चीन ने ही पहल की थी।
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वहीं, सूत्रों के मुताबिक चीन यह बात मानने को तैयार नहीं कि भारत अपने इलाके में सड़कों का निर्माण कर रहा है और जब तक भारत यह निर्माण नहीं रोकता है तब तक वह पीछे नहीं हटेगा। इससे पहले 5 जून को भी कोर कमांडर की बातचीत इसी जगह हुई थी, जिसमें गलवां घाटी से दोनों सेनाओं केपीछे हटने पर सहमति बनी थी। सूत्रों के मुताबिक सोमवार की इस बातचीत के दौरान दोनों तरफ सेनाएं बड़ी संख्या में तैनात थीं।
 

पैंगोंग झील पर डटी है चीनी सेना

सूत्रों ने बताया कि गलवां के पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 और हॉट स्प्रिंग पर चीनी सेना अपनी तरफ बड़ी तैयारी के साथ तैनात है। पैंगोंग झील पर वह फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच करीब आठ वर्ग किमी के  भारतीय इलाके में डटी है।

 चीन ने पहली बार माना कि गलवां में मारा गया था उसका कमांडर

चीन ने पहली बार माना है कि गलवां घाटी में हुई झड़प में मरने वाले उसके सैनिकों में एक कमांडिग ऑफिसर भी शामिल था। चीन ने पिछले हफ्ते गलवां में भारत के साथ हुई सैन्य वार्ता में इस बात को स्वीकार किया था। सूत्रों ने यह जानकारी सोमवार को उस समय दी, जब चीनी पक्ष के चुशुल के मोल्डो में लेफ्टिनेंट जनरल-स्तरीय वार्ता हो रही थी।

हिंसक झड़प के एक हफ्ते बाद यह खबर सामने आई है। सेना के सूत्रों ने कहा है कि हिमालय की गलवां नदी के पास 15,000 फुट ऊंचाई पर हुए इस विवाद में 45 चीनी सैनिक मारे गए या घायल हो गए। हालांकि, चीन अभी तक हताहतों का आधिकारिक आंकड़ा देने से बचता रहा है। झड़प में भारतीय पक्ष के 20 जवान शहीद हो गए थे। सेना के सूत्रों ने कहा, झड़प में घायल 76 भारतीय सैनिक कुछ ही हफ्ते में फिर से ड्यूटी पर लौटने की उम्मीद है।

शीर्ष कमांडरों के साथ जनरल नरवणे ने की सुरक्षा हालात पर चर्चा

इस बीच, सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने सोमवार को दिल्ली में सेना के शीर्ष कमांडरों के साथ सुरक्षा हालात पर चर्चा की। अब कमांडरों के सम्मेलन के दूसरे चरण के लिए सभी कमांडर राष्ट्रीय राजधानी में हैं। सेना के कमांडरों की कॉन्फ्रेंस 22 और 23 जून को हो रही है। इस दौरान उत्तरी और पश्चिमी मोर्चे पर सैन्य तैयारियों की समीक्षा होनी है।

चीन सीमा पर 32 सड़कें अब तेजी से बनेंगी

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने चीन से लगती सीमा पर सड़कों के निर्माण का काम तेज करने का फैसला किया है। गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में भारत-चीन सीमा पर 32 सड़क परियोजनाओं की समीक्षा की गई और इनके काम में तेजी लाने और जल्द से जल्द परियोजनाओं को पूरा करने का फैसला लिया गया।

बैठक में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों ने भाग लिया। भारत एलएसी पर  कुल 73 सड़कें बना रहा है। गृह मंत्रालय की निगरानी में इनमें से 12 सड़कें सीपीडब्ल्यूडी और 61 बीआरओ बना रहा है।

 भ्रामक प्रचार मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं: मनमोहन

देश की सुरक्षा, सीमा से जुड़े मसलों और रणनीति संबंधी मामलों में बयान देने से पहले प्रधानमंत्री को सावधान रहना चाहिए। ऐसे बयान चीन की साजिश को बढ़ावा दे सकते हैं। भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीतिक और मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता।-मनमोहन सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता

 पूर्व पीएम द्वारा एकजुटता की बात करना महज दिखावा है। ये शब्दों का खेल मात्र है। असलियत में कांग्रेस खुद सुरक्षाबलों का मनोबल गिरा रही है। इनके सुर हमेशा देशविरोधी रहे हैं। आज पूरे देश को पीएम मोदी पर भरोसा है। -जेपी नड्डा, भाजपा अध्यक्ष

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