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हाई अलर्ट पर नौसेना, हिंद महासागर में आईएनएस कुलिश और राणा चीन को देंगे मुंहतोड़ जवाब
Tue, 30 Jun 2020 01:20 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Tue, 30 Jun 2020 01:20 PM IST
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भारतीय नौसेना (फाइल फोटो)
पूर्वी लद्दाख में तनातनी के बीच हिंद महासागर में चीन की नापाक हरकत पर नजर रखने के लिए भारतीय नौसेना को हाई अलर्ट किया गया है। नौसेना के जंगी जहाजों ने चीन की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है। सूत्रों ने बताया कि हिंद महासागर में चीन को रोकने के लिए भारतीय नौसेना ने अमेरिकी और जापान की नौसेनाओं के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ा दिया है। नौसेना ने जापान की नौसेना मैरिटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स के साथ हिंद महासागर में शनिवार से युद्ध अभ्यास शुरू किया।
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युद्धाभ्यास में भारतीय नौसेना की आईएनएस राणा और आईएनएस कुलिश ने हिस्सा लिया। वहीं, जापान की नौसेना की ओर से जेएस काशिमा और जेएस शिमायुक्ति ने भागीदारी की। समुद्र में यह युद्धाभ्यास उस जगह हुआ जहां चीन की घातक पनडुब्बियों और जंगी जहाज अक्सर देखे गए हैं।
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चीन का आक्रामक रुख देखकर युद्धाभ्यास
इस युद्धाभ्यास का मकसद पूर्वी लद्दाख में चीन से जारी गतिरोध और दक्षिण चीन सागर के साथ-साथ भारत प्रशांत क्षेत्र में चीनी नौसेना के आक्रामक रवैये को देखते हुए किया गया है। सूत्रों ने बताया कि इस युद्धाभ्यास का मकसद दो देशों की नौसेनाओं के बीच आंतरिक सहयोग को बढ़ाना है।
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चीन ने सैनिक तो हटाए पर कैंप वाहन और मशीनें जस की तस
गलवां घाटी में खूनी संघर्ष के दो हफ्ते बाद भी पेट्रोल पॉइंट-14 (पीपी-14) पर तनाव बरकरार है। सहमति के बाद चीनी सैनिक पीछे हटे। लेकिन 28 जून की सेटेलाइट तस्वीरों में उनकी गाड़ियां उपकरण और कैंप वही देख रहे हैं। चीन भिड़ंत के दो दिन बाद 17 जून से ही गलवां नदी के पास सैन्य तैनाती बड़ा कदम गई दिखा रहा था।
हालांकि, भारत की कड़ी मोर्चाबंदी से उसे सीधी चुनौती मिली। सूत्रों का कहना है कि भारत द्वारा अधिक होकर तेजी से ढांचागत निर्माण करने और सैन्य तैनाती के बाद चीन भी निश्चिंत नहीं है। यही वजह है कि चीन अड़ियल रुख दिखाना चाह रहा है।
सेना सतर्क...
चीन पहले भी वादा निभाने में दोहरी चाल चल चुका है। यही वजह है कि भारतीय सेना ने सैनिकों और सैन्य साजो सामान की तैनाती में कमी नहीं की है।
कैंप हटाने में लेगा वक्त...
सूत्रों का कहना है कि वाहनों और कैंपों को एलएसी से हटाने में चीन समय लगा सकता है। 25 जून को वरिष्ठ सैन्य अफसरों की बातचीत के बाद चीन ने पीछे हटना शुरू किया था। इसके चलते, भारत ने कोई कार्रवाई नहीं की।