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भारत-चीन:12 घंटे की वार्ता में शांति कायम करने पर सहमति, दूसरी ओर उकसाने वाला बयान
Wed, 14 Oct 2020 02:27 AM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 14 Oct 2020 02:27 AM IST
सार
- चीन के नापाक इरादे: दोनों देशों के नेताओं में बनी समझ को ईमानदारी से लागू करने पर सहमति जताई तो दूसरी ओर कहा, नहीं देते लद्दाख और अरुणाचल को मान्यता
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भारत और चीन के बीच सातवें दौर की वार्ता
- फोटो : PTI
विस्तार
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनातनी कम करने के लिए भले ही चीन भारत के साथ सैन्य स्तर की बातचीत कर रहा हो, मगर दूसरी ओर वह उकसाने वाले बयान देने से बाज भी नहीं आ रहा है। दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के बीच करीब 12 घंटे तक चली सातवें दौर की वार्ता में सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमति बनी। हालांकि, नापाक इरादे जाहिर करने वाले चीन ने विवादित बयान देते हुए कहा कि वह केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता है।
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रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी इस संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारतीय सीमा में स्थित चुशुल में करीब 12 घंटे चली इस सकारात्मक और रचनात्मक वार्ता में दोनों तरफ के अफसर एलएसी से सटे टकराव वाली हर जगह से जल्द से जल्द सेना हटाने पर राजी हुए। इसमें कहा गया है कि भारत-चीन ने दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी आपसी महत्वपूर्ण समझ को ईमानदारी से लागू करने पर सहमति जताई।
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दोनों देश मतभेदों को विवादों में न बदलें और संयुक्त रूप से शांति की ढाल बनें और सीमा क्षेत्रों में सद्भाव बनाए रखेंगे। बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी पर सैनिकों को हटाए जाने को लेकर गंभीरता से और सकारात्मक रूप से आपसी नजरिए का आदान-प्रदान किया। दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत हुई और एक-दूसरे के प्रति आपसी समझ बढ़ाने पर सहमत हुए। इसमें कहा गया है कि कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के जरिये बातचीत और संपर्क कायम रहना चाहिए। साथ ही टकराव वाली जगहों से जल्द से जल्द सैनिकों को हटाने के लिए आपसी सहमति से स्वीकार्य योग्य समाधान पर पहुंचने पर भी रजामंद हुए।
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...और इधर, सीमा के पास 44 नए पुलों को खोले जाने से बौखलाया चीन
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की ओर से सीमा के नजदीक 44 नए पुल खोले जाने से भड़के चीन ने कहा, हम भारत की ओर से अवैध रूप से बनाए गए केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देते हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लीजियान ने सीमा पर बुनियादी ढांचों के निर्माण को दोनों पक्षों के बीच तनाव का प्रमुख कारण बताया है। उन्होंने कहा, किसी भी पक्ष को ऐसी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए जिससे कि तनाव और बढ़े। झाओ ने कहा, हम सैन्य उद्देश्य से सीमा के पास बुनियादी सुविधाओं के विकास के खिलाफ हैं। सहमति के आधार पर किसी भी पक्ष को सीमा के आसपास ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे तनाव बढ़े। इससे हालात सामान्य करने के दोनों पक्षों की कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा।