भारत का नया 'हॉक' विमान खत्म करेगा चीन की बादशाहत, जानें कैसे?
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भारत तेजी से हवाई क्षेत्र में आत्मनिर्भर होता जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण यह है नया व अपडेटेड हॉक विमान। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड (एचएएल) और बीएई (ब्रिटेन) द्वारा मिलकर दो साल में तैयार किया गया हॉक विमान चीन की डिफेंस मार्केट में सेंध लगाने के लिए काफी है।
भारत और ब्रिटेन ने इस विमान पर दो साल तक काम किया है। अब यह विमान पहले की अपेक्षा काफी हल्का व कई अहम हथियार ले जाने में सक्षम है। डिफेंस मार्केट में चीन की बढ़ती चमक को फीका करने के लिए भारत का यह विमान काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
इस तरह के विमान विकसित कर भारत डिफेंस मार्केट में बड़ा निर्यातक बनने की ओर अग्रसर है। भारत-ब्रिटेन द्वारा संयुक्त रूप से रूप से विकसित किए गए इस विमान को महीने के अंत में पेश किया जाएगा। इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक हॉक विमान को अगले हफ्ते बंगलुरु में होने वाले ऐरोइंडिया शो के लिए तैयार किए जा रहा है।
इस अपडेटेड विमान में नई डिजाइन के साथ-साथ कई नए फीचर हैं। खबर के मुताबिक विमान की नई डिजाइन इसे और भी ज्यादा खतरनाक बनाती है। यह विमान अब पहले से ज्यादा छोटे हथियारों को ले जा सकता है।
हॉक पर है कई देशों की नजर
इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक एचएएल के चेयरपर्सन टी सुवर्ण राजू का मानना है कि इस विमान पर कई देशों की नजर है। उन्होंने कहा कि कई देशों की वायुसेनाएं इस विमान में रुचि दिखा रही हैं। डिफेंस मार्केट में वैश्विक स्तर पर अपनी पैठ बनाने के लिए भारत का एडवांस हॉक विमान काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
खबर के मुताबिक एडवांस हॉक विमान सात स्टेशनों पर 3000 किलोग्राम तक पेलोड के हथियार ले जा सकता है। आपको बता दें कि हॉक आमतौर पर पायलटों के प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल होते हैं लेकिन कुच समय पहले तक युद्ध की स्थिति में इनसे जमीन पर हमले किए जा सकते थे, लेकिन नया हॉक विमान पहले की अपेक्षा काफी एडवांस है और अब इससे बड़े हमले भी किए जा सकते थे।
भारतीय वायु सेना आधुनिक प्रशिक्षण विमान, हॉक इस्तेमाल करने वाली दुनिया की 19 वीं वायु सेना है।

जानें क्यों पड़ी हॉक विमानों की जरूरत?
आपको बता दें कि नए पायलटों के विमान उड़ाते वक्त दुर्घटनाग्रस्त होने की कई घटनाओं के बाद 1985 में भारतीय वायु सेना ने प्रशिक्षण विमान की तलाश शुरू की थी। ये तो मान लिया गया था कि भारत को प्रशिक्षण विमानों की सख्त आवश्यकता है और इसको लेकर पिछले एक दशक से बातचीत चल रही थी।
सन 1999 में इस सौदे के लिए भारत ने फ्रांस की कंपनी दासॉल के अल्फाजेट और ब्रिटिश एयरोस्पेस के हॉक विमानों का चयन किया गया था। लेकिन इसकी कीमत को लेकर यह मामला उलझता रहा। बाद में ब्रिटिश एयरोस्पेस सिस्टम से हॉक प्रशिक्षण विमानों की खरीद के लिए समझौता हो गया था।
