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चीन की चुनौती: खुले और स्वतंत्र हिंद-प्रशांत के लिए काम करेंगे भारत-जर्मनी

Fri, 11 Jun 2021 03:08 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 11 Jun 2021 03:08 AM IST
सार

  • समुद्र में चीन की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ भारत और जर्मनी ने एक साथ काम करने की जताई इच्छा
  • विदेश सचिव शृंगला ने कहा, यूरोपीय संघ में बेहद महत्वपूर्ण दोस्तों में से एक है जर्मनी

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India and Germany will work together for open and free Indo-Pacific region
विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला - फोटो : ANI

विस्तार

समुद्र में चीन की विस्तारवादी नीतियों को देखते हुए भारत और जर्मनी खुले और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए मिलकर काम करने के लिए इच्छुक हैं। विदेश सचिव हर्ष वर्धन शृंगला ने कहा, यूरोपीय संघ में जर्मनी भारत के सबसे महत्वपूर्ण दोस्तों में से एक है। शृंगला ने कहा, कोरोना महमारी के बाद वैश्विक व्यवस्था को समान विचारों वाले उन देशों के इस दिशा में समन्वित प्रयासों की जरूरत होगी जो बहुपक्षीय सिद्धांतों और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का सम्मान करें।

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विदेश सचिव ने भारत-जर्मनी में कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत के 70 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा, पिछले साल जर्मनी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए दिशा-निर्देश जारी करने वाला यूरोपीय संघ का दूसरा देश बन गया, जिसका हम स्वागत करते हैं।
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हम एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अपने साझा दृष्टिकोण पर जर्मनी के साथ मिलकर काम करने को आशान्वित हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के मद्देनजर क्षेत्र में उभरती परिस्थितियां दुनिया की अग्रणी महा शक्तियों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय हैं। इस बारे में कई देश पहले ही क्षेत्र के लिए अपना दृष्टिकोण जता चुके हैं। समारोह में एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया गया।
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व्यापार और निवेश से रणनीतिक संबंधों को मिलेगी मजबूती
शृंगला ने अपने बयान में कहा, भारत और जर्मनी को अपनी रणनीतिक साझेदारी का स्तर और गुणवत्ता बढ़ानी चाहिए, क्योंकि दोनों के पास विशेष ताकत है, जिसे दुनिया में भलाई के लिए एक शक्ति के रूप में जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा, 2000 में बनी भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी से व्यापार और निवेश के संबंधों को मजबूती मिलती है।


विदेश सचिव ने कहा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान और उच्चतर एवं व्यावसायिक शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विस्तृत सहयोग ने भारत और जर्मनी के बीच छात्रों तथा पेशेवरों के आवागमन को भी विस्तार दिया है।

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