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Independence Day: अंतरिक्ष से लेकर पर्यटन तक बढ़ता-संवरता-खिलता भारत, जानें देश को कैसे होगा फायदा

Tue, 15 Aug 2023 05:36 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 15 Aug 2023 05:36 AM IST
सार

अंतरिक्ष, तकनीक, सेना और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में हमारे काम और उपलब्धियां न केवल घरेलू, बल्कि वैिश्वक स्तर पर भी उपयोगी साबित हो रही हैं। इनसे दुनिया में भारत की छवि मजबूत राष्ट्र के रूप में बन रही है। 

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Independence Day 2023 achievements of india From Space to tourism
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंतरिक्ष, तकनीक, सेना और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में हमारे काम और उपलब्धियां न केवल घरेलू, बल्कि वैिश्वक स्तर पर भी उपयोगी साबित हो रही हैं। इनसे दुनिया में भारत की छवि मजबूत राष्ट्र के रूप में बन रही है। सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और सुदूर अंतरिक्ष शोध जैसे क्षेत्रों में भारत अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में खुद को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठापित कर रहा है। आने वाले वर्षों में इनसे देश को क्या फायदे हो सकते हैं, लोगों के जीवन पर इनका क्या असर होगा। पढ़ें विश्लेषण- 

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Independence Day 2023 achievements of india From Space to tourism
ई-कॉमर्स कंपनियां

डिजिटल बुनियादी ढांचा नए कारोबारों में मददगार
जून 2022 में गूगल व अन्य कंपनियों ने भारत में ई-कॉमर्स, खाना डिलिवरी, कैब, आदि इंटरनेट आधारित सेवाओं पर रिपोर्ट में दावा किया कि इसका आकार 2022 के 17,500 करोड़ डॉलर से साल 2030 तक पौने 6 गुना बढ़कर 1 लाख करोड़ डॉलर पहुंच सकता है। भारत का मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा इसकी सबसे बड़ी वजह माना गया। यह नए कारोबार खड़े करने में मददगार बन रहा है।

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Independence Day 2023 achievements of india From Space to tourism
ligo india - फोटो : Social Media

लिगो-इंडिया प्रोजेक्ट : गुरुत्व तरंगों पर अमेरिका के बाहर पहली लैब
दुनिया कैसे बनी, इसमें क्या बदलाव आ रहे हैं, यह समझने के लिए अमेरिका के बाहर पहली लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (लिगो) भारत के हिंगोली में बनाई जा रही है। इसे साल 2030 तक पूरा किया जाना है। इसमें सरकार खुद 2,600 करोड़ रुपये निवेश कर रही है, अमेरिका द्वारा तकनीकी उपकरण भेजे जा रहे हैं।

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NPCI Real Time Payment Dispute Resolution - फोटो : Istock

दुनिया में रियल टाइम पेमेंट का नेतृत्व
हमारा यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) सिंगापुर, मलयेशिया, ओमान, यूएई, फ्रांस, यूके, थाईलैंड, फिलीपीन, हांगकांग, ताइवान, दक्षिण कोरिया व जापान में भी भुगतान के लिए उपयोग होने लगा है। अगले कुछ समय बाद में नीदरलैंड, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड भी इसे अपनाने वाले हैं।

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If Someone Dies In Space, What Happens To The Body? - फोटो : iStock

अंतरिक्ष: गगन, सूर्य, चंद्र... सब जगह भारत
स्वतंत्रता दिवस के सात दिन बाद ही 23 अगस्त को चंद्रमा पर अपना चंद्रयान 3 उतारकर हम दुनिया के चौथे और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर यान उतारने वाले पहले देश बनेंगे। सितंबर में सूर्य के अध्ययन के लिए पृथ्वी से 15 लाख किमी दूर आदित्य एल-1 मिशन भेजा जा सकता है। इसके बाद खगोलीय एक्स-रे व प्रकाश के स्रोतों के अध्ययन के लिए देश का पहला धुवनमापन (पोलरीमीटर) मिशन एक्सपोसेट भेजा जाएगा। 2024 में गगनयान मिशन में 3 भारतीय पृथ्वी की सतह से 400 किमी ऊंचाई पर तीन दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे और सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाए जाएंगे। अमेरिका और चीन जहां अंतरिक्ष पर्यटन में अग्रणी बनने में जुटे हैं, 2030 तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन भी 6 करोड़ रुपये में अंतरिक्ष यात्रा शुरू करवा सकता है।

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Quantum computing - फोटो : Social Media

क्वांटम कंप्यूटिंग: भविष्य की तकनीक बनाने पर जोर
साल 2030-31 तक भारत राष्ट्रीय क्वांटम मिशन में 6 हजार करोड़ रुपये निवेश कर रहा है। इसका लक्ष्य क्वांटम तकनीक के लिए भारत में अनुकूल माहौल बनाना और अगले 8 साल में 50 से 1000 क्यूबिट्स के कंप्यूटर का विकास है। वजह, भारत नहीं चाहता कि वह आईटी क्षेत्र की तरह दुनिया के लिए नई तकनीकों का महज उपयोगकर्ता और सेवाप्रदाता बना रहे। बल्कि इनके विकास में योगदान देकर विश्व के लिए अग्रणी भूमिका हासिल करना चाहता है।

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भारतीय सेना का सैन्य अभ्यास (फाइल) - फोटो : पीटीआई

थल सेना : कमांड सेंटर में आधुनिक तकनीकें
कमांड सेंटर को सैन्य कार्रवाई में निर्णय लेने में मददगार सिचुएश्नल अवेयरनेस मॉड्यूल फॉर आर्मी (समा) और सिचुएश्नल रिपोर्टिंग ओवर एंटरप्राइज-क्लास जीआईएस प्लेटफॉर्म यानी ई-सिट्रिप लागू किए गए हैं। सीमाओं पर दिसंबर 2025 तक सैकड़ों सर्विलांस केंद्र बन रहे हैं। अमेरिका से समझौते के तहत खरीदे जाने वाले आठ एमक्यू 9बी ड्रोन रिमोट युद्ध संचालन में मदद करेंगे। 

पूरी स्क्वाड्रन क्षमता पाने की चुनौती
फ्रांस से 36 राफेल पाने के बाद मजबूत वायुसेना की क्षमता एमक्यू 9बी ड्रोन से और बढ़ेगी। आधुनिकीकरण से गुजर रही वायुसेना के सामने इस समय पूरी 42 स्क्वाड्रन क्षमता हासिल करने की चुनौती भी है। 2030 से 2035 के बीच स्क्वाड्रन संख्या 35 से 37 तक पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं।

आत्मनिर्भरता से मजबूती
सितंबर 2022 में आईएनएस विक्रांत नौसेना में शामिल कर भारत 40,000 टन के विमान वाहक युद्धपोत बनाने की क्षमता वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया। 65 हजार टन के एक और युद्धपोत की जरूरत हिंद महासागर की जटिल सामरिक स्थिति को देखते हुए बताई जा रही है। खरीदे जा रहे 31 एमक्यू 9बी ड्रोन में से 15 ड्रोन नौसेना को मिलेंगे।

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China bans US chipmaker Micron - फोटो : Agency (File Photo)

सेमी कंडक्टर उत्पादन का हब बनेगा भारत
भारत को विश्व का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का पावर हाउस बनाने में सेमी कंडक्टर अहम साबित होंगे। इसे समझते हुए 1,000 करोड़ डॉलर के प्रोत्साहन के साथ कंपनियों को आकर्षित किया जा रहा है। परिणाम, अमेरिकी बहुराष्ट्रीय सेमी कंडक्टर निर्माता कंपनी एडवांस्ड माइक्रो डिवाइस, माइक्रॉन, फॉक्सकॉन देश में निवेश करने जा रही हैं। सेमी कंडक्टर को भविष्य का ईंधन कहा जा रहा है और भारत को इसका निर्माण केंद्र बनने का यह सही अवसर समझा जा रहा।

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पानी की टंकी - फोटो : अमर उजाला

हर घर-नलजल...बढ़ेगी प्रति व्यक्ति पानी की आपूर्ति
सरकार 2024 तक हर भारतीय के घर में नल द्वारा पेयजल पहुंचाने में जुटी है। जून 2023 तक करीब 55% लक्ष्य हासिल होने का दावा किया गया है। 2030 तक प्रति व्यक्ति 135 लीटर जल रोजाना मुहैया करवाने का लक्ष्य है। मौजूदा 55 लीटर से ढाई गुना है। 2047 तक गांवों में हर घर तक चौबीसों घंटे पेयजल आपूर्ति का प्रयास जारी है।

सरकार 2024 तक हर भारतीय के घर में नल द्वारा पेयजल पहुंचाने में जुटी है। जून 2023 तक करीब 55% लक्ष्य हासिल होने का दावा किया गया है। 2030 तक प्रति व्यक्ति 135 लीटर जल रोजाना मुहैया करवाने का लक्ष्य है। मौजूदा 55 लीटर से ढाई गुना है। 2047 तक गांवों में हर घर तक चौबीसों घंटे पेयजल आपूर्ति का प्रयास जारी है।

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वन्यजीव - फोटो : Facebook/Prabhat Sharma

वन्य जीव संरक्षण, 664 नई प्रजातियां मिलीं
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण ने जुलाई में बताया कि 2022 में देश में 664 नई प्रजातियों के जीव मिले। बीते दशक में यह सबसे बड़ी संख्या है। अफ्रीकी चीतों को देश में बसाने के प्रयास के बीच संकेत सकारात्मक हैं कि जंगल बढ़ने से वन्य जीवों का संरक्षण भी हो रहा है। 

तीन दशक में 33% जंगल का लक्ष्य
देश के 33% भूभाग पर जंगल होने चाहिए। 80 के दशक में यह सबसे कम 19.53  प्रतिशत बचे थे। इसके बाद इनका आकार लगातार बढ़ा, ताजा आंकड़ों में यह 24.62 प्रतिशत दर्ज हुए। वृद्धि बनाए रखें तो दो से तीन दशकों में यह लक्ष्य हासिल हो सकता है।

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कानपुर में बढ़ा प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

मौतें रोकने के लिए उस पर नियंत्रण
लेंसेट की रिपोर्ट के अनुसार 2019 में भारत में 16 लाख मौतें वायु प्रदूषण से हुईं। आने वाले वर्षों में प्रदूषण पर नियंत्रण न किया गया तो यह आंकड़ा बढ़ सकता है। दुनिया के 50 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में 35 भारतीय माने जा रहे हैं।

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साक्षरता - फोटो : Pixabay

साक्षरता : दशक के अंत तक सौ प्रतिशत
साक्षरता दर लगातार सुधरी है, हालांकि 100 प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य अब भी दूर है। 2021 में शुरू हुए साक्षरता अभियानों के जरिये 2030 तक हर व्यक्ति को कम से कम पढ़ना व लिखना सिखाने की कोशिश की जा रही है। सतत विकास लक्ष्यों में 2030 तक हर बच्चे को स्कूल भेजना शामिल है। 2022 में 1.5% बच्चे प्रवेश नहीं ले पाए थे। यह 2014 के 4.7 प्रतिशत से तो बहुत कम है, लेकिन संख्या अब भी लाखों में है। 16 साल का हर तीसरा बच्चा स्कूल में नहीं : 2015 में 55.8% बच्चे अपर सेकंडरी स्तर पर पंजीकृत थे। 2030 तक इसे 88% ले जाने का लक्ष्य है। आज विभिन्न समस्याओं से 16 साल तक का हर तीसरा बच्चा स्कूल से दूर हो जाता है।

1.4 करोड़ कॉलेज स्टूडेंट्स
यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के अनुसार साल 2030 तक भारत को 1500 उच्च शिक्षण संस्थानों व विश्वविद्यालयों की जरूरत होगी। इस दशक के अंत तक 1.4 करोड़ युवा कॉलेजों में पढ़ रहे होंगे।

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आवास। - फोटो : अमर उजाला।

आवास : ढाई करोड़ बनाने की जरूरत
भारतीय रियल एस्टेट उद्योग और अर्नस्ट एंड यंग की मार्च 2023 में आई रिपोर्ट ने दावा किया कि भारत में साल 2030 तक 2.5 करोड़ सस्ते घरों की जरूरत होगी। इसे पूरा किया तो सेक्टर का आकार मौजूदा 20 हजार करोड़ से पांच गुना यानी करीब 1 लाख करोड़ डॉलर तक बढ़ सकता है। जीडीपी में सेक्टर का योगदान भी 20 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
 

निर्यात 10 हजार करोड़ डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य
वस्त्र निर्यात प्रोत्साहन परिषद ने साल 2030 तक के लिए अनुमान दिए कि भारत दुनिया में वस्त्रों की अधिकतम मांग पूरी कर सकता है। यहां दुनिया की 23 प्रतिशत कपास उगाई जाती है, वह चौथा सबसे बड़ा कपड़ा उत्पादक भी है। वहीं सरकार का जोर है कि दशक के अंत तक भारतीय कपड़ा उद्योग 10 हजार करोड़ डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल करे।

शून्य पर लाने के लिए 50 प्रतिशत बढ़ाना होगा कृषि उत्पादन
नीति आयोग के अनुमानों के अनुसार 2030 तक भारत में सालाना खाद्यान्न उत्पादन मौजूदा के स्तर से 50 प्रतिशत बढ़ाना होगा। सतत विकास लक्ष्यों में भी 2030 तक जीरो-हंगर का लक्ष्य है। भारत के लिए इसे हासिल करना बड़ी चुनौती है।

जलवायु परिवर्तन के जोखिम से जूझना होगा
वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन को अन्न व फल-सब्जियों तक के उत्पादन में बड़ी बाधा मान रहे हैं। पृथ्वी के तापमान में 1.5 से 3 डिग्री तक की औसत वृद्धि गेहूं और धान का उत्पादन 30 प्रतिशत तक घटा सकती है। यह देखते हुए भारत ने बाजरा, जौ, रागी जैसे मोटे अनाज को अपनाने पर हाल में जोर दिया है। इन्हें जलवायु परिवर्तन के असर के प्रति ज्यादा सहनशील भी माना जा रहा है।

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गरीबी - फोटो : pixabay

ग्रामीण गरीबी 20% पर आएगी
विश्व आर्थिक मंच का अनुमान है कि 2018 की 33 प्रतिशत की तुलना में 2030 तक ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 20 प्रतिशत रह जाएगी। इसकी प्रमुख वजहें युवाओं द्वारा 10वीं से आगे भी पढ़ाई, बेहतर बुनियादी ढांचा, इंटरनेट व स्मार्टफोन के जरिये वित्तीय गतिविधियों से सीधा जुड़ाव मानी जा रही हैं।

और ग्रामीण अमीरी बढ़ेगी
प्राइस आईसीई रिपोर्ट 2023 का दावा है कि ग्रामीण भारत में शहरों के मुकाबले पारिवारिक आय तेजी से बढ़ेगी। यहां 2016 से 2021 के बीच सालाना 2 करोड़ या उससे अधिक आय वाले बेहद अमीर परिवारों की संख्या लगभग दोगुनी हुई है। 2030 और 2047 तक यह चलन बना रहेगा।

वर्ग में इजाफा भी
दशक के अंत तक मध्य वर्ग में करीब 14 करोड़ और उच्च मध्यम वर्ग में 2 करोड़ लोगों का इजाफा होगा। यह वर्ग भोजन, वस्त्र, गैजेट्स, ट्रांसपोर्ट, आवास पर ज्यादा खर्च करेंगे।

लैंगिक अनुपात : जारी रहेगा सुधार
2011 जनगणना में हर 100 लड़कियों पर 111 लड़के माने गए थे, इसके बाद नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार हालात में सुधार आया। 2016 में आंकड़ा 109 और 2021 में 108 तक पहुंचा। इस दशक में भी यह सुधार जारी रहेगा और लैंगिक अनुपात बराबरी के करीब आ सकता है।


 

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अमेरिकी वीजा - फोटो : PTI

विदेश जाने वाले सालाना 5 लाख होंगे
हर साल करीब 3 लाख लोग भारत छोड़कर बसने के लिए विदेश जा रहे हैं। यूएन के अनुसार 2030 के दशक में यह आंकड़ा साढ़े तीन लाख तक रह सकता है। 2030 के बाद 5 लाख तक भारतीय हर साल विदेश में बसने लगेंगे। प्रवासन का यह आंकड़ा सदी के अंत यानी 2100 तक जारी रह सकता है।

खर्च शक्ति : ढाई गुना तक बढ़ेगी
विश्व आर्थिक मंच के अनुसार 2030 तक भारतीयों की खर्च क्षमता 2019 के मुकाबले ढाई से चार गुना तक बढ़ सकती है। चूंकि हम धरती के सबसे युवा देशों में प्रमुख होंगे, सभी प्रमुख वैश्विक उत्पाद न केवल देश में नजर आएंगे, बल्कि मेक इन इंडिया के तहत बनाए भी जाएंगे।

औसत आय : 20 लाख सालाना
मध्य वर्ग के 102 करोड़ लोगों की औसत सालाना आय भी साल 2047 तक 20 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। सालाना 5 से 30 लाख कमाने वाले परिवारों को मध्य वर्ग में रखा जा रहा है।

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ओटीटी प्लेटफॉर्म्स - फोटो : सोशल मीडिया

ओटीटी : दशक के अंत तक ढाई गुना पहुंचने का लक्ष्य
सालाना 28.6 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए ओवर द टॉप स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म साल 2030 तक 30 हजार करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करने लगेंगे। इसमें नए स्टार्टअप अहम योगदान दे रहे हैं। 2024 में इसके 12 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचने और सालाना 20 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान सीसीआई द्वारा अप्रैल 2022 में दिया गया।

ऑनलाइन गेमिंग : मनोरंजन का दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र
फिल्मों के बाद दुनिया में मनोरंजन का दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर ऑनलाइन गेमिंग भारत में 30 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रहा है। करीब 42 करोड़ यूजर्स किसी न किसी ऑनलाइन गेम का हिस्सा हैं और 400 से अधिक कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। 2022 में इस उद्योग ने 280 करोड़ डॉलर का राजस्व अर्जित किया है, 2025 तक इसके 400 करोड़ डॉलर और 2030 तक 2500 करोड़ डॉलर तक पहुंचने के अनुमान हैं। इसके जरिए 1.60 लाख रोजगार मिलने की भी उम्मीद जताई जा रही हैं।

रक्षा उत्पादन व निर्यात
बीते 5 साल में भारत से रक्षा उपकरणों का निर्यात 334 प्रतिशत बढ़ा है, इन्हें 75 देशों को बेचा जा रहा है। करीब 200 स्टार्टअप काम कर रहे हैं। साल 2025 तक रक्षा मंत्रालय द्वारा उत्पादन व निर्यात 5 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। हाल में मलयेशिया ने 16 लड़ाकू जेट खरीदने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के बनाए तेजस को शॉर्ट लिस्ट किया तो वहीं अर्जेंटीना, मिस्र और बोत्सवाना भी इसमें रुचि ले रहे हैं। एचएएल ने फरवरी में बताया था कि उसके पास 84 हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं।

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मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

चिकित्सा सेक्टर : 1.20 करोड़ को रोजगार देने की क्षमता
साल 2022 में आई एस्पायर सर्किल फर्म की रिपोर्ट ने दावा किया कि भारत का स्वास्थ्य सेक्टर साल 2030 तक 77.4 हजार करोड़ डॉलर के बराबर राजस्व अर्जित कर सकता है। इससे 1.20 करोड़ लोगों को देश और विदेश में रोजगार मिल सकता है। कोविड महामारी में हुई लाखों मौतों के बाद लगभग पूरे देश में स्वास्थ्य क्षेत्र को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है, जिसके परिणाम भी इस दशक में नजर आएंगे। भारत में 2030 तक स्वास्थ्य कर्मियों की कमी हो सकती है। हर 1000 नागरिकों पर 1 डॉक्टर अनुपात पाने के लिए भी लाखों चिकित्सकों की जरूरत होगी।

चिकित्सा पर्यटन : 19% से वृद्धि
ओशियन फर्म के अनुसार, सालाना 19 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा चिकित्सा पर्यटन भारत को साल 2030 तक 2,500 करोड़ डॉलर अर्जित करवा सकता है। आयुष ग्रिड परियोजना के जरिये पारंपरिक व वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जा रहा। नीति आयोग के अनुसार देश में 2019 के मुकाबले 2022 तक एमबीबीएस की सीटें 32 प्रतिशत बढ़ाई गई हैं। मलेरिया को 2030 तक खत्म करने का लक्ष्य है। टीबी भी 2025 तक खत्म करने के लिए प्रयास हो रहे। अजीम प्रेमजी, प्रसिद्ध उद्योगपति का कहना है कि हमारे देश की चुनौतियों और संभावनाओं की मांग है कि हम क्षेत्र, धर्म, जाति और अन्य सभी विभाजनों को तोड़ते हुए एक साथ काम करें।

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