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आजादी के 71 साल बाद : राज है नीति गायब

Tue, 14 Aug 2018 10:36 PM IST
डा. मुरली मनोहर जोशी, सांसद, भाजपा
डा. मुरली मनोहर जोशी, सांसद, भाजपा Updated Tue, 14 Aug 2018 10:36 PM IST
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independence day 2018: murli manohar joshi says 71 years after independence policy is still missing
murli manohar joshi
भारत अपने स्वतंत्रता दिवस की 72वीं सालगिरह मना रहा है, लेकिन यह चिंता की बात है कि देश की राजनीति में राज है लेकिन नीति गायब। आध्यात्मिक रचना गायब है। आध्यात्मिकता से नैतिकता आती है। यह सब हम पीछे छोड़ते चले जा रहे हैं। शिक्षा का धर्म भूल चुके हैं। अर्थव्यवस्था, राजव्यवस्था, समाज व्यवस्था का संतुलन चुनौती बनकर खड़ी है। हमारे ऋषियों, मनीषियों, ग्रंथो, मूल्यों ने बताया कि कोई भूखा न रहे। आज आदमी भूखा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब राज अनैतिक हो जाएं तो क्या रहेगा। 
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यह चुनौती केवल भारत के ही सामने नहीं है। पूरे विश्व में है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की बुनियाद पर खड़े भारत जैसे के देश के लिए यह महत्वपूर्ण है कि जो रास्ता आपने ले लिया है, वह सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक स्तर पर कितना संतुलन बना पा रहा है। पश्चिम के भौतिकवाद या यंत्रवाद को यहां तक जमीन उपलब्ध करा सकेगा। इसके बारे में हम सभी को सोचना होगा। क्योंकि यही हमारे देश की सच्ची आजादी से जुड़ा मसला है। 
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कर्ताधर्ताओं के लिए गंभीर विषय 

स्वाधीनता के 71 साल बाद हमारे सामने मनुष्य का मूलभूत अधिकार चुनौती बनकर खड़ा है। हमारे संविधान में यह अधिकार मनुष्य को प्रकृति प्रदत्त अधिकार की तरह है। पृथ्वी पर जन्म ले चुके मनुष्य के लिए भारतीय संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार मानवीय गरिमा के अधिकार हैं। इसमें मनुष्य को शिक्षा, समान अवसर, भोजन, जीवन रक्षा, काम को आगे ले जाने (विकास) का अधिकार मिलना चाहिए। 
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यह तभी संभव है जब सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक रचना इसे प्राप्त करने का अवसर देने वाली हो। जब तक इस तरह की संरचना नहीं बनती तब तक मनुष्य को यह अधिकार और न्याय नहीं मिल सकता। देश के लोगों को यह सब उपलब्ध कराने के लिए अभी काफी कुछ करना पड़ेगा। हमने संविधान में बता दिया कि जनता द्वारा जनता के लिए जनता की चुनी गई जनता की सरकार....आदि। 


यह बताने से कुछ नहीं होने वाला है। इसके लिए कुछ बड़े प्रयास भी करने होंगे। इसलिए स्वाधीनता के 71 साल बाद हम मनुष्य के मूल अधिकार के बारे में सोच रहे हैं तो यह देश के कर्ताधर्ताओं के लिए काफी गंभीर सवाल है।
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