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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल में बढ़ रही अंदरूनी कलह और असंतोष
Tue, 16 Jun 2020 08:28 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 16 Jun 2020 08:28 AM IST
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बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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पश्चिम बंगाल में 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी कलह और असंतोष बढ़ता जा रहा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता चक्रवाती तूफान अम्फान के बाद पुनर्वास कार्यों और कोरोना वायरस महामारी से निपटने के ममता सरकार के तरीके के खिलाफ सुर बुलंद कर रहे हैं।
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पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर बढ़ रहे असंतोष ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने ऐसे वक्त में मुसीबत उत्पन्न कर दी है जब राज्य में विधानसभा चुनाव में मात्र 10 माह ही बचे हैं। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों से राज्य की सियासत में अहम बदलाव के संकेत मिले थे जहां भाजपा टीएमसी के लिए तगड़े विपक्ष के तौर पर उभरी थी। इसको देखते हुए टीएमसी के लिए इस बार काफी कुछ दांव पर है और चुनाव से पहले पार्टी में सब कुछ दुरुस्त करने के लिए ममता के पास समय बहुत कम बचा है।
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पार्टी के कई विधायकों और सांसदों का पाला बदलना टीएमसी के लिए लोकसभा चुनाव में महंगा साबित हुआ था। भाजपा ने 42 लोकसभा सीटों में से 18 पर जबकि टीएमसी को 22 पर जीत मिली थी। सूत्रों के अनुसार, सधन पांडे, सुब्रत मुखर्जी और सांसद महुआ मोइत्रा जैसे नेताओं की नाराजगी ने सियासी बहस छेड़ दी है।
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टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बड़े नेताओं की सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर करना चिंता का विषय है। पार्टी ने उनसे अपने विचार जनता के सामने नहीं रखने को कहा था तो फिर वे जनता के बीच क्यों गए? क्या वे कोई संदेश देना चाहते हैं, इस पर गौर करने की जरूरत है। भले ही ममता ने हाल में पार्टी की एक बैठक में किसी का नाम लिए बिना असंतुष्ट नेताओं से पार्टी को भीतर से कमजोर करने के बजाय इसे छोड़कर जाने को कहा लेकिन चीजें फिर भी ठीक होती नहीं दिख रही हैं।
सधन पांडे ने जहां चक्रवात के बाद के पुनर्वास के कार्यों में पार्टी नीत केएमसी की भूमिका पर सवाल उठाए थे, वहीं मुखर्जी ने चक्रवात से बुरी तरह प्रभावित उत्तर और दक्षिण 24 परगना में राज्य के मंत्रियों समेत टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए।
पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं लोकसभा सांसद मोइत्रा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र कृष्णानगर में खर्च नहीं की गई निधि और गैर नियोजित कार्यों को लेकर पार्टी संचालित ग्राम पंचायतों पर हमला बोला था और लोगों से स्थानीय नेताओं के भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होने की अपील की थी।
कभी टीएमसी में नंबर दो रहे और अब भाजपा नेता मुकुल रॉय ने दावा किया कि ममता की पार्टी के कई शीर्ष नेता उनके संपर्क में हैं। वे उचित समय आने पर पार्टी में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि कुछ महीनों का इंतजार करें, आप टीएमसी को ताश के पत्तों की तरह बिखरते देखेंगे।