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Bullet Train: मुंबई में बुलेट ट्रेन सुरंग का उद्घाटन, वैष्णव बोले- अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी होगी परियोजना
Sat, 20 Sep 2025 07:46 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: बशु जैन
Updated Sat, 20 Sep 2025 07:46 PM IST
सार
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत निर्मित शिलफाटा और घनसोली के बीच 4.88 किलोमीटर लंबी सुरंग का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि सूरत-बिलिमोरा खंड पर हाई-स्पीड कॉरिडोर का पहला चरण दिसंबर 2027 में शुरू होगा।
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सुरंग उद्घाटन के दौरान मौजूद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव।
- फोटो : PTI
विस्तार
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत निर्मित शिलफाटा और घनसोली के बीच 4.88 किलोमीटर लंबी सुरंग का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उसी तरह लाभकारी साबित होगी, जैसे छह दशक पहले जापान को लाभ मिला था। सुरंग निर्माण को वैष्णव ने ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि सूरत-बिलिमोरा खंड पर हाई-स्पीड कॉरिडोर का पहला चरण दिसंबर 2027 में शुरू होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टोक्यो, नागोया और ओसाका जैसे प्रमुख केंद्रों को जोड़ने वाली दुनिया की पहली बुलेट ट्रेन ने जापान की पूरी अर्थव्यवस्था पर कई गुना प्रभाव डाला है। ऐसे ही यह परियोजना आणंद, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, वापी और मुंबई को एकल आर्थिक गलियारे के तौर पर विकसित करेगी।
उन्होंने कहा कि इससे एकीकृत बाजार का निर्माण होगा। पूरे मार्ग पर आर्थिक विकास में तेजी आएगी। साथ ही आर्थिक एकीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। उच्च उत्पादकता और व्यवसाय विस्तार के माध्यम से आर्थिक लाभ प्रारंभिक निवेश से कहीं अधिक होगा।
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अश्विनी वैष्णव ने कहा कि घनसोली और शिलफाटा की ओर से एक साथ सुरंग की खुदाई की गई। टीमों चुनौतीपूर्ण ढंग से पानी के नीचे काम किया। यह परियोजना अत्याधुनिक इंजीनियरिंग नवाचारों को बढ़ाती है। दो बुलेट ट्रेनों के लिए एकल सुरंग तकनीक का उपयोग और पुल निर्माण में 40-मीटर गर्डरों को लगाना महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि परियोजना में जापानी साझेदारों ने इस तकनीकी नवाचार की दक्षता और डिजाइन की तारीफ की है। भारत ने इसकी पूरी जानकारी हासिल कर ली है। मैंने परियोजना की समीक्षा के लिए जापानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों पक्षों ने प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में नवीनतम ई10 शिंकानसेन (जापान की अगली पीढ़ी की बुलेट ट्रेन) शुरू करने पर भी चर्चा हुई। जापान ने भारत को यह उन्नत रेल प्रणाली उपलब्ध कराने पर सहमति व्यक्त की है।
किराया उचित होगा, मध्यम वर्ग को होगा लाभ
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन मध्यम वर्ग के परिवहन के लिए होगी। इसका किराया उचित होगा। गूगल मैप पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय नौ घंटे दिखाया गया है, लेकिन बुलेट ट्रेन से लोग यह दूरी दो घंटे सात मिनट में तय कर सकेंगे।
वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना का पहला चरण 2027 में सूरत-बिलिमोरा खंड पर शुरू किया जाएगा। यह 2028 में ठाणे और 2029 में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स को कवर करेगा। 320 किलोमीटर पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। सभी जगह स्टेशन का निर्माण तेजी से चल रहा है।
उन्होंने कहा कि नदी पुलों का निर्माण किया जा रहा है। साबरमती सुरंग का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा होने वाला है। सेवाओं को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सुबह और शाम के व्यस्त समय में हर आधे घंटे में एक ट्रेन चलेगी। एक बार पूरा नेटवर्क स्थिर हो जाए, तो व्यस्त समय में हर 10 मिनट में एक ट्रेन चलेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के लिए टिकट आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं होगी और यात्री स्टेशन पर आकर ट्रेन में चढ़ सकेंगे।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टोक्यो, नागोया और ओसाका जैसे प्रमुख केंद्रों को जोड़ने वाली दुनिया की पहली बुलेट ट्रेन ने जापान की पूरी अर्थव्यवस्था पर कई गुना प्रभाव डाला है। ऐसे ही यह परियोजना आणंद, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, वापी और मुंबई को एकल आर्थिक गलियारे के तौर पर विकसित करेगी।
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उन्होंने कहा कि इससे एकीकृत बाजार का निर्माण होगा। पूरे मार्ग पर आर्थिक विकास में तेजी आएगी। साथ ही आर्थिक एकीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। उच्च उत्पादकता और व्यवसाय विस्तार के माध्यम से आर्थिक लाभ प्रारंभिक निवेश से कहीं अधिक होगा।
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अश्विनी वैष्णव ने कहा कि घनसोली और शिलफाटा की ओर से एक साथ सुरंग की खुदाई की गई। टीमों चुनौतीपूर्ण ढंग से पानी के नीचे काम किया। यह परियोजना अत्याधुनिक इंजीनियरिंग नवाचारों को बढ़ाती है। दो बुलेट ट्रेनों के लिए एकल सुरंग तकनीक का उपयोग और पुल निर्माण में 40-मीटर गर्डरों को लगाना महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि परियोजना में जापानी साझेदारों ने इस तकनीकी नवाचार की दक्षता और डिजाइन की तारीफ की है। भारत ने इसकी पूरी जानकारी हासिल कर ली है। मैंने परियोजना की समीक्षा के लिए जापानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों पक्षों ने प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में नवीनतम ई10 शिंकानसेन (जापान की अगली पीढ़ी की बुलेट ट्रेन) शुरू करने पर भी चर्चा हुई। जापान ने भारत को यह उन्नत रेल प्रणाली उपलब्ध कराने पर सहमति व्यक्त की है।
किराया उचित होगा, मध्यम वर्ग को होगा लाभ
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन मध्यम वर्ग के परिवहन के लिए होगी। इसका किराया उचित होगा। गूगल मैप पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय नौ घंटे दिखाया गया है, लेकिन बुलेट ट्रेन से लोग यह दूरी दो घंटे सात मिनट में तय कर सकेंगे।
वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना का पहला चरण 2027 में सूरत-बिलिमोरा खंड पर शुरू किया जाएगा। यह 2028 में ठाणे और 2029 में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स को कवर करेगा। 320 किलोमीटर पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। सभी जगह स्टेशन का निर्माण तेजी से चल रहा है।
उन्होंने कहा कि नदी पुलों का निर्माण किया जा रहा है। साबरमती सुरंग का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा होने वाला है। सेवाओं को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सुबह और शाम के व्यस्त समय में हर आधे घंटे में एक ट्रेन चलेगी। एक बार पूरा नेटवर्क स्थिर हो जाए, तो व्यस्त समय में हर 10 मिनट में एक ट्रेन चलेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के लिए टिकट आरक्षण की कोई आवश्यकता नहीं होगी और यात्री स्टेशन पर आकर ट्रेन में चढ़ सकेंगे।
बुलेट ट्रेन परियोजना
- फोटो : ANI
बटन दबाकर किया विस्फोट और सुरंग शुरू हुई
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घनसोली शाफ्ट स्थित सुरंग के एक द्वार पर खड़े होकर बटन दबाया। इसके बाद डायनामाइट विस्फोट हुआ। जिससे सुरंग की अंतिम परत टूट गई और पांच किलोमीटर की खुदाई पूरी हो गई।
ऑस्ट्रियन टनल विधि से खोदी गई सुरंग
न्यू ऑस्ट्रियन टनल मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके खोदी गई यह सुरंग, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) और शिलफाता के बीच 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत खंड का हिस्सा है। इसमें ठाणे क्रीक के नीचे सात किलोमीटर का खंड भी शामिल है। बुलेट ट्रेन सुरंग अब सावली शाफ्ट को शिलफाटा में सुरंग पोर्टल से जोड़ती है।
एनएचएसआरसीएल ने कहा कि सुरंग की खुदाई मई 2024 में तीन चरणों में शुरू हुई थी, और 2.7 किलोमीटर के खंड की पहली सफलता नौ जुलाई को हासिल की गई थी। घनसोली और शिलफाता दोनों तरफ से एक साथ खुदाई के लिए एक अतिरिक्त मध्यवर्ती सुरंग (एडीआईटी) का निर्माण किया गया था।
कहा गया है कि एनएटीएम सुरंग की आंतरिक चौड़ाई 12.6 मीटर है और इसका निर्माण चुनौतीपूर्ण भूवैज्ञानिक परिस्थितियों में ड्रिलिंग, विस्फोट, सर्वेक्षण कार्यों और सहायक प्रणालियों का उपयोग करके किया गया है। निगम ने कहा कि अगले चरण में वॉटरप्रूफिंग, लाइनिंग, फिनिशिंग और उपकरण स्थापना का काम शामिल होगा, जबकि शेष 16 किलोमीटर सुरंग निर्माण का काम टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) का उपयोग करके किया जाएगा।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घनसोली शाफ्ट स्थित सुरंग के एक द्वार पर खड़े होकर बटन दबाया। इसके बाद डायनामाइट विस्फोट हुआ। जिससे सुरंग की अंतिम परत टूट गई और पांच किलोमीटर की खुदाई पूरी हो गई।
ऑस्ट्रियन टनल विधि से खोदी गई सुरंग
न्यू ऑस्ट्रियन टनल मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके खोदी गई यह सुरंग, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) और शिलफाता के बीच 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत खंड का हिस्सा है। इसमें ठाणे क्रीक के नीचे सात किलोमीटर का खंड भी शामिल है। बुलेट ट्रेन सुरंग अब सावली शाफ्ट को शिलफाटा में सुरंग पोर्टल से जोड़ती है।
एनएचएसआरसीएल ने कहा कि सुरंग की खुदाई मई 2024 में तीन चरणों में शुरू हुई थी, और 2.7 किलोमीटर के खंड की पहली सफलता नौ जुलाई को हासिल की गई थी। घनसोली और शिलफाता दोनों तरफ से एक साथ खुदाई के लिए एक अतिरिक्त मध्यवर्ती सुरंग (एडीआईटी) का निर्माण किया गया था।
कहा गया है कि एनएटीएम सुरंग की आंतरिक चौड़ाई 12.6 मीटर है और इसका निर्माण चुनौतीपूर्ण भूवैज्ञानिक परिस्थितियों में ड्रिलिंग, विस्फोट, सर्वेक्षण कार्यों और सहायक प्रणालियों का उपयोग करके किया गया है। निगम ने कहा कि अगले चरण में वॉटरप्रूफिंग, लाइनिंग, फिनिशिंग और उपकरण स्थापना का काम शामिल होगा, जबकि शेष 16 किलोमीटर सुरंग निर्माण का काम टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) का उपयोग करके किया जाएगा।