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उपचुनावों में भाजपा ही नहीं विपक्ष का भविष्य लगा है दांव पर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 28 May 2018 03:38 PM IST
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सोमवार को कैराना सहित देश के चार लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान किए जा रहे हैं। कर्नाटक में गठबंधन की सरकार बनने के महज कुछ दिनों बाद यह चुनाव बीजेपी, कांग्रेस और कई क्षेत्रीय पार्टियों के लिए नाक का सवाल बनी हुई हैं। आज चल रहे चार लोकसभा सीटों में मतदान में उत्तर प्रदेश के कैराना सहित महाराष्ट्र में भंडारा-गोंडिया, पालघर और नगालैंड संसदीय सीट बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
बता दें कि कैराना सीट पर संपूर्ण विपक्ष के एकसाथ आ जाने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में हार के बाद भाजपा ने इस सीट को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वोटों की गिनती 31 मई को होगी।
वहीं महाराष्ट्र में सभी बड़े दलों भाजपा, कांग्रेस, शिव सेना और एनसीपी ने लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए सभी संसाधन झोंक दिए हैं, क्योंकि इनके परिणाम पर ही सबका भविष्य निर्भर माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि बीजेपी के लिए यह चारों सीटों को जीतना बहुत बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि बीजेपी के हाथों से पिछले चार सालों में कई सीटें फिसली हैं और वह 282 से 272 पर ही टिक गई है। बीजेपी के हाथों से महज चार वर्षों में और उपचुनावों के दौरान ही सीटें हाथों से फिसली है। यही नहीं उत्तर प्रदेश से ही दो सीटें बीजेपी ने पिछले उपचुनाव में गंवाई हैं।
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कैराना लोकसभा सीट बीजेपी के लिए बड़ी नाक का सवाल बनी हुई है। यहां की संसदीय सीट बीजेपी के सांसद हुकुम सिंह की मृत्यु के बाद खाली हुई थी। जिसपर उनकी बेटी मृगांका चुनावी मैदान में हैं। उनका मुकाबला राष्ट्रीय लोग दल की तबस्सुम हसन से है। इनका समर्थन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी कर रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के शासन संभालते ही गोरखपुर के फूलपुर में हार का सामना कर चुकने के बाद वह कैराना किसी भी सीट पर हारना नहीं चाहते हैं। यही नहीं आने वाले लोकसभा चुनाव का इस चुनाव को सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है।
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बता दें कि कैराना सीट पर संपूर्ण विपक्ष के एकसाथ आ जाने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में हार के बाद भाजपा ने इस सीट को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वोटों की गिनती 31 मई को होगी।
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वहीं महाराष्ट्र में सभी बड़े दलों भाजपा, कांग्रेस, शिव सेना और एनसीपी ने लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए सभी संसाधन झोंक दिए हैं, क्योंकि इनके परिणाम पर ही सबका भविष्य निर्भर माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि बीजेपी के लिए यह चारों सीटों को जीतना बहुत बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि बीजेपी के हाथों से पिछले चार सालों में कई सीटें फिसली हैं और वह 282 से 272 पर ही टिक गई है। बीजेपी के हाथों से महज चार वर्षों में और उपचुनावों के दौरान ही सीटें हाथों से फिसली है। यही नहीं उत्तर प्रदेश से ही दो सीटें बीजेपी ने पिछले उपचुनाव में गंवाई हैं।
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कैराना लोकसभा सीट बीजेपी के लिए बड़ी नाक का सवाल बनी हुई है। यहां की संसदीय सीट बीजेपी के सांसद हुकुम सिंह की मृत्यु के बाद खाली हुई थी। जिसपर उनकी बेटी मृगांका चुनावी मैदान में हैं। उनका मुकाबला राष्ट्रीय लोग दल की तबस्सुम हसन से है। इनका समर्थन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी कर रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के शासन संभालते ही गोरखपुर के फूलपुर में हार का सामना कर चुकने के बाद वह कैराना किसी भी सीट पर हारना नहीं चाहते हैं। यही नहीं आने वाले लोकसभा चुनाव का इस चुनाव को सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है।
सीधी लड़ाई भाजपा और गठबंधन के साथियों के बीच है
महाराष्ट्र के भंडारा-गोंडिया और पालघर लोकसभा सीटों पर सीधी लड़ाई भाजपा और गठबंधन के साथियों के बीच है। महाराष्ट्र के भंडारा-गोंडिया और पालघर लोकसभा सीटों पर सीधी लड़ाई भाजपा और गठबंधन के साथियों के बीच है। जिसमें महाराष्ट्र की चार बड़ी पार्टियां जैसे कांग्रेस, बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी का भविष्य दांव पर है। इस चुनाव के नतीजों पर ही उनका भविष्य टिका है।
पालघर लोकसभा सीट पर उपचुनाव बीजेपी के सिटिंग सांसद चिंतामन वांगा के निधन के बाद किया जा रहा है। यहां पर बीजेपी की कुढन की वजह है शिवसेना है क्योंकि इस संसदीय सीट पर सांसद के बेटे श्रीनिवास वांगा चुनावी मैदान मे हैं। शिवसेना को उम्मीद है कि वांगा की वजह से सहानुभूति वोट मिलने की उम्मीद है। जबकि बीजेपी ने यहां से कांग्रेस से भगाए गए राजेंद्र गवित मैदान में है जबकि कांग्रेस ने पूर्व एमपी दामु शिंगदा को मैदान में उतारा है।
वहीं भंडारा गोंडिया में लोकसभा चुनाव की वजह बीजेपी के सांसद नाना पटोले के पार्टी छोडने की वजह से हो रहा है। इस समय वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन वह बहुत जोर-शोर से कांग्रेस और एनसीपी के लिए चुनाव प्रचार में जुटे रहे। एनसीपी कांग्रेस के उम्मीदवार मधुकर कुकडे का सीधा मुकाबला बीजेपी के हेमंत पटेल है।
नागालैंड लोकसभा चुनाव की बड़ी वजह नेफ्यू रियो का इस्तीफा है क्योंकि नेफ्यू रियो ने विधानसभा चुनाव में उतरे और नगालैंड के मुख्यमंत्री बने। रूलिंग पिपुल्स डेमोक्रेटिक गठबंधन ने अपना उम्मीदवार पूर्व मंत्री टोखेहो येप्थोमी है और उनका सीधा मुकाबला विपक्ष के नागा पिपुल्स फ्रंच के सी एपोक जमिर है।
पालघर लोकसभा सीट पर उपचुनाव बीजेपी के सिटिंग सांसद चिंतामन वांगा के निधन के बाद किया जा रहा है। यहां पर बीजेपी की कुढन की वजह है शिवसेना है क्योंकि इस संसदीय सीट पर सांसद के बेटे श्रीनिवास वांगा चुनावी मैदान मे हैं। शिवसेना को उम्मीद है कि वांगा की वजह से सहानुभूति वोट मिलने की उम्मीद है। जबकि बीजेपी ने यहां से कांग्रेस से भगाए गए राजेंद्र गवित मैदान में है जबकि कांग्रेस ने पूर्व एमपी दामु शिंगदा को मैदान में उतारा है।
वहीं भंडारा गोंडिया में लोकसभा चुनाव की वजह बीजेपी के सांसद नाना पटोले के पार्टी छोडने की वजह से हो रहा है। इस समय वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन वह बहुत जोर-शोर से कांग्रेस और एनसीपी के लिए चुनाव प्रचार में जुटे रहे। एनसीपी कांग्रेस के उम्मीदवार मधुकर कुकडे का सीधा मुकाबला बीजेपी के हेमंत पटेल है।
नागालैंड लोकसभा चुनाव की बड़ी वजह नेफ्यू रियो का इस्तीफा है क्योंकि नेफ्यू रियो ने विधानसभा चुनाव में उतरे और नगालैंड के मुख्यमंत्री बने। रूलिंग पिपुल्स डेमोक्रेटिक गठबंधन ने अपना उम्मीदवार पूर्व मंत्री टोखेहो येप्थोमी है और उनका सीधा मुकाबला विपक्ष के नागा पिपुल्स फ्रंच के सी एपोक जमिर है।
विधानसभा सीटों पर भी है कांटे की टक्कर
विधानसभा सीटों के लिए हो रहे उपचुनावों में केरल का चेंगानूर, उत्तर प्रदेश के नूरपुर, कर्नाटक के राजराजेश्वरी नगर मेघालय अमपती, झारखंड में सिलिया और गोमिया, बिहार में जोकिहाट, पश्चिम बंगाल में महेशताला, पंचाब सहकोट और उत्तराखंड में थराली पर चुनाव हुए । कर्नाटक के आरआर नगर का चुनाव को उपचुनाव के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। 10 हजार वोगस वोटर आईडी मिलने से यहां का चुनाव कैंसिल कर दिया गया था।
वहीं यूपी के नूरपुर का चुनाव की वजह बीजेपी विधायक लोकेंद्र सिंह की सड़क दुर्घटना में निधन है। बीजेपी ने सहानुभूति वोट पाने के लिए अवनी सिंह को मैदान में उतारा है। अवनि का सीधा मुकाबला समाजवादी पार्टी नयमुल हसन से सीधा मुकाबला है। बता दें कि आरएलडी और एसपी के अनुबंध है जबकि मायावति ने इसबार भी एक नया कदम चलने की कोशिश की है। इन सभी पार्टियों का मकसद सिर्फ बीजेपी को हराना है।
बिहार के जोकिहट विधानसभा सीट में सीधा मुकाबला जेडीयू और आरजेडी के बीच है। यहां भी दो सीटों के लिए विधानसभा उपचुनाव मार्च में हुए थे। जिसमें एक एक सीट बीजेपी और आरजेडी ने जीती थी। वहीं इसी दौरान हुए लोकसभा के उपचुनाव में अररिया आरजेडी ने वह सीट जीती थी। महागठबंधन के बाद यह अपने आप में जनता का अलग तरह का फैसला था। इस चुनाव को आगामी वर्ष में होने वाले लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना गया था।
वहीं बंगाल के माहेशतला उपचुनाव में टीएमसी, बीजेपी और सीबीआई एम को जोड़ कर देखा जा रहा है। इसमें कांग्रेस दूर तक दिखाई नहीं दे रही है। यहां बीजेपी टीएमसी मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं। यह हाल तब है जब बंगाल में हुए पंचायत चुनाव में टीएमसी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन यहां टीएमसी को सीधी टक्कर बीजेपी से मिल रही है।
वहीं पंजाब, केरल में भी विधानसभा उपचुनाव कांटे की टक्कर में कई क्षेत्रीय पार्टियों का भविष्य भी दांव पर लगा है। जिसमें सीपीएम, डेफ्ट डेमोक्रेटिक पार्टी, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ एनडीए भी शामिल है। जबकि पंजाब में शिरोमणी अकाली दल, आम आदमी पार्टी की शाख भी दांव पर लगी है।
वहीं यूपी के नूरपुर का चुनाव की वजह बीजेपी विधायक लोकेंद्र सिंह की सड़क दुर्घटना में निधन है। बीजेपी ने सहानुभूति वोट पाने के लिए अवनी सिंह को मैदान में उतारा है। अवनि का सीधा मुकाबला समाजवादी पार्टी नयमुल हसन से सीधा मुकाबला है। बता दें कि आरएलडी और एसपी के अनुबंध है जबकि मायावति ने इसबार भी एक नया कदम चलने की कोशिश की है। इन सभी पार्टियों का मकसद सिर्फ बीजेपी को हराना है।
बिहार के जोकिहट विधानसभा सीट में सीधा मुकाबला जेडीयू और आरजेडी के बीच है। यहां भी दो सीटों के लिए विधानसभा उपचुनाव मार्च में हुए थे। जिसमें एक एक सीट बीजेपी और आरजेडी ने जीती थी। वहीं इसी दौरान हुए लोकसभा के उपचुनाव में अररिया आरजेडी ने वह सीट जीती थी। महागठबंधन के बाद यह अपने आप में जनता का अलग तरह का फैसला था। इस चुनाव को आगामी वर्ष में होने वाले लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना गया था।
वहीं बंगाल के माहेशतला उपचुनाव में टीएमसी, बीजेपी और सीबीआई एम को जोड़ कर देखा जा रहा है। इसमें कांग्रेस दूर तक दिखाई नहीं दे रही है। यहां बीजेपी टीएमसी मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं। यह हाल तब है जब बंगाल में हुए पंचायत चुनाव में टीएमसी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन यहां टीएमसी को सीधी टक्कर बीजेपी से मिल रही है।
वहीं पंजाब, केरल में भी विधानसभा उपचुनाव कांटे की टक्कर में कई क्षेत्रीय पार्टियों का भविष्य भी दांव पर लगा है। जिसमें सीपीएम, डेफ्ट डेमोक्रेटिक पार्टी, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ एनडीए भी शामिल है। जबकि पंजाब में शिरोमणी अकाली दल, आम आदमी पार्टी की शाख भी दांव पर लगी है।