{"_id":"5f9f290e8ebc3edc1f66464b","slug":"in-the-year-2019-20-there-are-more-number-of-girls-in-adopted-orphan-children","type":"story","status":"publish","title_hn":"वर्ष 2019-20 में गोद लिए गए अनाथ बच्चों में लड़कियों की संख्या अधिक","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
वर्ष 2019-20 में गोद लिए गए अनाथ बच्चों में लड़कियों की संख्या अधिक
Mon, 02 Nov 2020 03:00 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 02 Nov 2020 03:00 AM IST
सार
- कुल 3,531 बच्चों में अपनाई गई 2,061 लड़कियां
- महाराष्ट्र में गोद लेने वाले बच्चों की संख्या अधिक
- केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण ने जारी किए आंकड़े
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
विस्तार
भारत में 31 मार्च को समाप्त हुए एक साल में कुल 3,531 बच्चों को गोद लिया गया। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक पाई गई। सरकारी आंकड़ों में दी गई जानकारी के अनुसार सभी राज्यों में से महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बच्चे गोद लिए गए। इनमें 3,531 बच्चों में 2,061 लड़कियां थी।
विज्ञापन
केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के आंकड़ों के अनुसार एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 के बीच 1,470 लड़कों और 2,061 लड़कियों को गोद लिया गया।
विज्ञापन
देशभर में बेटों को प्राथमिकता देने के चलन के परिप्रेक्ष्य में एक अधिकारी ने कहा कि अब लोगों की मानसिकता धीरे-धीरे बदल रही है और वे लड़कियों को गोद लेने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा, हम उन्हें तीन विकल्प देते हैं, वे लड़का या लड़की में से एक को चुनें या (बच्चे को गोद लेने के लिए आवेदन करते समय) कोई प्राथमिकता न रखें। बहुत से लोग बच्ची को गोद लेने में रुचि दिखाते हैं।
विज्ञापन
हालांकि, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि ज्यादा लड़कियां इसलिए गोद ली जा रही हैं क्योंकि ऐसे बच्चों में लड़कियों की संख्या ज्यादा है। गैर लाभकारी संगठन ‘सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च’ की कार्यकारी निदेशक अखिला शिवदास ने कहा, किसी गोद लेने वाली संस्था में आप ऐसे ही चले जाइए तो पता चल जाएगा कि गोद लेने के लिए लड़कों से ज्यादा लड़कियां हैं। इसलिए इसे प्रगतिशील मानसिकता से जोड़कर देखना ठीक नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि बहुत से परिवारों में लड़कों को ही प्राथमिकता दी जाती है और वे बच्चा पैदा होने से पहले उसके लिंग का निर्धारण करने और गर्भ में लड़की होने पर गर्भपात कराने की सीमा तक चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग लड़की पैदा होने पर उसका परित्याग तक कर देते हैं।
महाराष्ट्र के आंकड़े सबसे अधिक
आंकड़ों के अनुसार पिछले साल अप्रैल से लेकर इस साल मार्च के बीच 0-5 वर्ष की आयु के 3,120 बच्चों को गोद लिया गया। इस दौरान 5-18 साल की आयु के 411 बच्चों को गोद लिया गया। आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में सर्वाधिक 615 बच्चों को गोद लिया गया।
इसके अलावा कर्नाटक में 272, तमिलनाडु में 271, उत्तर प्रदेश में 261 और ओडिशा में 251 बच्चों को गोद लिया गया। अधिकारी ने कहा कि सामान्य तौर पर महाराष्ट्र में गोद लिए गए बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा इसलिए होती है क्योंकि वहां 60 से अधिक दत्तक-ग्रहण एजेंसियां हैं जबकि अन्य राज्यों में ऐसी औसतन 20 एजेंसियां हैं।