Pakistan: चुनाव में देरी पर इमरान खान ने शहबाज सरकार पर किया हमला, कहा- वह सिर्फ बातचीत का ढोंग कर रहे
पाकिस्तान के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी पीटीआई की सरकार थी। चुनाव कराने के लिए पीडीएम पर दबाव बनाने के लिए इमरान ने 14 जनवरी को पंजाब तो 18 जनवरी को खैबर पख्तूनख्वा विधानसभाओं को भंग कर दिया था।
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने सत्ता पक्ष पर ढोंग करने के आरोप लगाए हैं। इमरान का कहना है कि सत्तादल के गंठबंधन ने अब तक उनसे औपचारिक रूप में बातचीत करने नहीं आई है। एक इंटरव्यू में खान ने कहा कि पीडीएम ने चर्चा के लिए अभी तक पीटीआई के साथ संपर्क नहीं किया है। खान ने कहा कि सरकार सिर्फ समय खरीदने के लिए ऐसी बयानबाजी कर रही है, जिससे वे चुनावों को अक्टूबर से आगे बढ़ा सकें।
पाकिस्तानी नेशनल असेंबली का कार्यकाल खत्म होने वाला है
पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल असेंबली और चारों प्रांतों के विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने की तारीखों पर सभी राजनीतिक दल से सहमति बनाने के लिए कहा था। इसपर पीडीएम ने कहा कि पीटीआई के साथ अदालत की निगरानी में बातचीत नहीं हो सकती। पाकिस्तानी नेशनल असेंबली के पास साल का कार्यकाल इसी अगस्त में पूरा हो जाएगा। पाकिस्तानी संविधान के अनुसार, निचले सदन का चुनाव 90 दिनों के भीतर होंगे।
महमूद कुरैशी को बातचीत के लिए किया नियुक्त
खान आम चुनावों को समय से पहले कराने पर जोर दे रहे हैं। पाकिस्तान के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी पीटीआई की सरकार थी। चुनाव कराने के लिए पीडीएम पर दबाव बनाने के लिए इमरान ने 14 जनवरी को पंजाब तो 18 जनवरी को खैबर पख्तूनख्वा विधानसभाओं को भंग कर दिया था। खान का कहना है कि उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरैशी को बात करने के लिए नियुक्त किया था।
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव कराने का दिया था आदेश
पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस उमर अता बांदियाल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने महीने की शुरुआत में पंजाब विधानसभा के लिए चुनाव की नई तारीख 14 मई तय की थी। कोर्ट ने आयोग के चुनावों की तारीखों को 10 अप्रैल से 8 अक्टूबर करने के फैसले को रद्द कर दिया था।
यह है पूरा कार्यक्रम
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक दिन बाद ही पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने एलान किया था कि पंजाब में 14 मई को मतदान होंगे। नामांकन पत्र के खिलाफ अपील दाखिल करने की आखिरी तारीख 10 अप्रैल होगी। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव न्यायाधिकरण 17 अप्रैल तक अपीलों पर फैसला करेगा और उम्मीदवारों की नई सूची प्रकाशित करने की अंतिम तिथि 18 अप्रैल होगी। नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि 19 अप्रैल होगी और प्रत्याशियों को 20 अप्रैल को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।
लागू नहीं कर सकते आदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठबंधन सरकार ने विरोध जताया था। बलूचिस्तान अवामी पार्टी के विधायक खालिद मागसी ने नेशनल असेंबली में आदेश के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया था, जिसे संविधान के विपरीत कहत हुए सदन ने पारित कर दिया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को कैबिनेट को संबोधित करते हुए कहा था कि अदालत का फैसला संविधान और कानून का मजाक है। इसे लागू नहीं कर सकते।