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भारत-पाक राजनयिक विवाद पर लगेगा विराम, इमरान सरकार ने दिए संकेत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 04 Sep 2018 08:11 AM IST
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इमरान खान-अजय बिसारिया
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पिछले 9 महीनों से भारतीय राजनयिक जिसमें उच्चायुक्त अजय बिसारिया भी शामिल हैं उनका इस्लामाबाद क्लब की सदस्यता पाने का आवेदन धूल फांक रहा है। इसकी वजह पाकिस्तान के गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें मंजूरी ना देना है। लेकिन अब पड़ोसी देश में नई सरकार है। भारत और पाकिस्तान ने अपने मुद्दों को सुलझाने का फैसला लिया है जिसकी वजह से पूर्व में उनके रिश्तों में दरार आई थी।
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साल की शुरुआत में दोनों देशों की राजधानी में राजनयिकों के कथित उत्पीड़न का मामला उठा था। पाकिस्तान अब भारतीय राजनयिकों की सदस्यता के आवेदन पर 'कोई आपत्ति नहीं' सर्टिफिकेट देने पर विचार कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि मंजूरी की प्रक्रिया जारी है। यदि मंजूरी मिल जाती है तो इसे दोनों देशों के बीच बिना किसी आधिकारिक बातचीत के रिश्तों में आत्मविश्वास आएगा।
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इमरान खान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत में दोनों ही रचनात्मक और अर्थपूर्ण वार्ता का भरोसा दिया है। पाकिस्तान की राजधानी में बसे इस्लामाबाद क्लब सभी विदेशी राजनयिकों का पसंदीदा बैठक स्थल है। भारत सरकार लगातार पाकिस्तान सरकार के सामने राजनयिकों को क्लब की सदस्यता देने का मुद्दा उठाती रही है।
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सरकार का कहना है कि भारतीय राजनयिकों को सदस्यता ना देना प्रतिकूल वातावरण में उनके खिलाफ भेदभाव है। पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिकों की सदस्यता को इसलिए ब्लॉ़क कर दिया था क्योंकि वह दिल्ली गोल्फ क्लब और जिमखाना में, उन्हीं दरों पर अपने राजनयिकों के लिए उसी तरह की सुविधाएं चाहता है। भारत ने हालांकि कहा था कि यह दोनों ही निजी क्लब है जिनका सरकार से कोई लेना-देना नहीं है।
माना जा रहा है कि राजनयिकों को लेकर दोनों ही देश जल्द अपने मुद्दों को सुलझा लेंगे। पाकिस्तान में चुनाव के बाद से ही दोनों ने राजनयिकों के शोषण को न्यूनतम कर दिया है। इस साल दोनों ने 1992 के कोड ऑफ कंडक्ट को रीवाइव किया था ताकि राजनयिकों को शोषण या धमकी का सामना ना करना पड़े। राजनयिक मामले को सुलझाने नई सरकार के लिए द्वीपक्षीय संबंधों की पहली चुनौती है।