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Teacher's day: सशक्त भारत के स्वप्न से सिद्धि तक की यात्रा में शिक्षकों की महती भूमिका
Mon, 05 Sep 2022 05:17 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 05 Sep 2022 05:17 AM IST
सार
पहली बार शिक्षा नीति बनाने के लिए ग्राम पंचायतों, ब्लॉकों और सभी जनपदों के शिक्षाविदों, अध्यापकों, जनप्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों, अभिभावकों के साथ ही, छात्र-छात्राओं के सवा दो लाख सुझावों पर मंथन किया गया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : pixabay
विस्तार
भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु या शिक्षक का स्थान इतना ऊंचा है कि उन्हें ‘साक्षात् परम ब्रह्म’ के समान माना जाता है। गुरु ब्रह्म के समान ही सृजन, निर्माण और समाज को दिशा देता । शिक्षकों की इसी महान भूमिका को याद करने-कराने के लिए ही महान दार्शनिक, शिक्षक और पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर पांच सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कहते हैं कि आगामी पीढ़ी के लिए शिक्षा से जुड़े प्रयासों की बागडोर शिक्षकों के ही हाथों में है। इस वर्ष 15 अगस्त को प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लिए गए पांच प्रणों-विकसित भारत, गुलामी के हर रूप से मुक्ति, अपनी विरासत पर गर्व, राष्ट्रीय एकता और नागरिकों में कर्तव्य भावना की प्राप्ति में शिक्षकों पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) लागू करने का मुख्य दायित्व है।
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पहली बार शिक्षा नीति बनाने के लिए ग्राम पंचायतों, ब्लॉकों और सभी जनपदों के शिक्षाविदों, अध्यापकों, जनप्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों, अभिभावकों के साथ ही, छात्र-छात्राओं के सवा दो लाख सुझावों पर मंथन किया गया। इस रूप में यह एक लोकतांत्रिक रीति से तैयार विश्व की पहली शिक्षा नीति है।
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संसार की शायद यह पहली शिक्षा नीति है, जिसे अंतिम रूप देने में किसी शासनाध्यक्ष ने भी सहयोग किया हो। एनईपी में भारतीय भाषाओं में अध्यापन पर बल दिया गया है। यह बच्चों में सहज व शीघ्र संप्रेषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण तो है। 14 साल के बच्चों तक सीमित ‘राइट टू एजुकेशन’ से आगे बढ़ते हुए ‘एजुकेशन फॉर ऑल’ का लक्ष्य रखा है।
वोकेशनल कोर्स मिडल स्कूल से ही शुरू हो जाएंगे, जिनमें ‘कोडिंग’ जैसे प्रशिक्षण के साथ-साथ स्थानीय हुनर भी शामिल होंगे। वोकेशनल कोर्सेस कॉलेज स्तर पर भी होंगे। इससे रोजगार मांगने वालों की जगह रोजगार देने वालों अथवा स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
नई नीति बच्चों को मूल्यपरक शिक्षा भी प्रदान करेगी। वशिष्ठ, चाणक्य और गुरु रामदास की परंपरा वाले देश में हमारे शिक्षक नई पीढ़ी में ‘आत्मनो मोक्षार्थम, जगत हिताय च’ के मूल्यों वाली शिक्षा प्रदान करें ताकि हमारे बच्चे न केवल सफल व्यवसायी, वैज्ञानिक या डॉक्टर, इंजीनियर, अफसर बनें, बल्कि उनमें गांधी, फुले, आंबेडकर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई, और भगवान बिरसा मुंडा की झलक भी दिखे। उनमें समाज-राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध और कर्तव्यपरायणता हो।
एनईपी-2020 अभिलेख में ‘शिक्षक’ तथा ‘शिक्षक शिक्षा’ नाम के दो अध्यायों में इसे रेखांकित किया गया है। तेजी से बदलते विश्व, समय और परिवेश के अनुसार शिक्षकों को भी अप-टू-डेट रहना अनिवार्य है। नीति में शिक्षकों के लिए नई तकनीक आधारित प्रशिक्षण और आकलन के प्रावधान हैं। इसके लिए ‘निष्ठा’ और दीक्षा’ कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 4-वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम भी अहम है।
नई संरचना के अनुसार शिक्षकों को मूलभूत, प्रारंभिक, मध्य और माध्यमिक चरणों के लिए तैयार करना है ताकि शिक्षण में उत्कृष्ट उम्मीदवार अवसर पाए। इसके अलावा यह नीति शिक्षकों को उद्योग, खेल, शोध एवं विकास प्रतिष्ठानों से सीधे जोड़ने और परस्पर सहयोग का मार्ग भी खोलती है।
2018 से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार योजना पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए दिशा-निर्देशों को संशोधित किया गया। ऑनलाइन स्व-नामांकन, त्रि-स्तरीय चयन प्रक्रिया, पुरस्कारों की तर्कसंगत संख्या, पारदर्शिता और वस्तुनिष्ठता सुदूर कोने के शिक्षक को भी सम्मान का गौरव मिल पा रहा है। वास्तव में यह राष्ट्र के उन सभी शिक्षकों का भी सम्मान है, जो अपनी निष्ठा और समर्पण से नई पीढ़ी का भविष्य संवार रहे हैं। यह सम्मान इस बात की प्रतीक है कि सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के स्वप्न से सिद्धि तक की यात्रा में शिक्षकों की महती भूमिका है।