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सभापति के दरवाजे पर ही दम तोड़ सकता है महाभियोग प्रस्ताव

Sun, 22 Apr 2018 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Sun, 22 Apr 2018 01:20 AM IST
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impeachment Offer may dissolve at the President door
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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ आने वाला पहला महाभियोग का प्रस्ताव राज्यसभा के सभापति की देहरी लांघने की संभावना ना के बराबर है। दरअसल नोटिस में सीजेआई के खिलाफ लगाए गए ज्यादातर आरोपों के पक्ष में निश्चित तथ्य देने के बदले संभावनाएं जताई गई है। जबकि महाभियोग के लिए संवैधिनिक रूप से निश्चित और अकाट्य तथ्य पेश किया जाना जरूरी है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक सभापति नोटिस पर कानूनी राय ले रहे हैं। अगले हफ्ते वह इस संबंध में निर्णय ले सकते हैं। 
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गौरतलब है कि शनिवार को दिए गए नोटिस में सीजेआई के खिलाफ पांच आरोप लगाए गए हैं। इनमें से तीन में उन पर महज संदेह जताया गया है। जबकि दो अन्य मामलों में उनके खिलाफ सबूत या निश्चित तथ्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। प्रसाद एजुकेशनल ट्रस्ट में प्रवेश, दो जजहां के बेंच से जुड़े एक मामले को संवैधानिक बेंच को स्थानांतरित किए जाने और एक मामले में प्रशासनिक आदेश की तारीख बदलने जैसे मुद्दों पर तथ्य पेश करने के बदले महज उनकी भूमिका पर शक जताया गया है।
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इसके अलावा गलत हलफनामे के आधार पर जमीन लेने के मामले में उन पर सीधा आरोप तो लगाया गया है, मगर इस मामले में भी तथ्य पेश नहीं किए गए हैं। पांचवें और 4 सीनियर जजों के संवदेनशील मामलों को चुनिंदा बेंचों को सुनवाई के लिए देने के आरोपों का हवाला तो दिया गया है, मगर इसमें भी सबूत या निश्चित तथ्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। 
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संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के महासचिव रहे सुभाष कश्यप के मुताबिक इसे सभापति की मंजूरी मिलना संभव नहीं लगता। संविधान में प्रस्ताव लाने की वजह राजनीतिक नहीं हो सकती। न्यायाधीश जांच कानून 1968 के तहत जजों को हटाने के प्रस्ताव के लिए आरोप तथ्यपूर्ण और निश्चित होने चाहिए। मगर सीजेआई के खिलाफ लगाए गए आरोपों में संभावनाओं का भरमार है। ज्यादातर आरोपों के बारे में हो सकता है, ऐसा लगता है या ऐसी संभावना है जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। ऐसे में मुझे नोटिस को मंजूरी मिलने की संभावना नहीं दिखती। 
 
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