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कोरोना का असर: राज्यों में लगाई गई पाबंदियों से परिवहन उद्योग को रोजाना 1000 करोड़ की चपत

Thu, 22 Apr 2021 01:01 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, मुंबई
एजेंसी, मुंबई Published by: देव कश्यप Updated Thu, 22 Apr 2021 01:01 AM IST
सार

  • एआईएमटीसी ने कहा...मदद को आगे आए सरकार, अन्यथा और बढ़ेगा नुकसान
  • 20 करोड़ से ज्यादा लोगों के रोजी-रोटी पर संकट, 50 फीसदी घटी वाहनों की मांग

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Impact of Corona Pandemic Transport industry daily loss of 1000 crores due to states restrictions to control Covid19
कोरोना पाबंदियों की वजह से परिवहन उद्योग को नुकसान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर पर काबू पाने के लिए राज्यों में लगाई गई पाबंदियों की वजह से परिवहन उद्योग को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। ट्रांसपोर्टरों के संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने बुधवार को कहा कि हालात पर काबू नहीं पाया गया और सरकार की ओर कोई मदद मुहैया नहीं कराई गई तो यह नुकसान आगे और बढ़ेगा। साथ ही इससे जुड़े 20 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजी-रोटी पर संकट उत्पन्न हो जाएगा। 

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संगठन ने कहा कि महाराष्ट्र में 12 अप्रैल को पाबंदियां लगाई गई थीं, तब से ट्रांसपोर्टरों को हर रोज करीब 315 करोड़ रुपये की चपत लग रही थी। अब दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, कर्नाटक और अन्य राज्यों में भी सख्ती बढ़ा दी गई है। गैर-जरूरी वस्तुओं का आवागमन रोक दिया गया है। इससे वाहनों की मांग करीब 50 फीसदी तक घट गई है।
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ऐसे में ताजा आकलन के अनुसार, सख्ती और उसकी अवधि बढ़ाए जाने के कारण उद्योग को प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। एआईएमटीसी ने कहा कि उद्योग को इस वित्तीय संकट से बचाने के लिए सरकार को ईएमआई और टैक्स भुगतान पर राहत देने जैसे कदम उठाने चाहिए। साथ ही ई-वे बिल की वैधता बढ़ाने पर भी विचार करना चाहिए। 
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बढ़ेगा बैड लोन...
संगठन ने कहा कि संक्रमण की पहली लहर से उबर रही अर्थव्यवस्था पर दूसरी लहर का प्रकोप फिर से दिखने लगा है। इससे परिवहन उद्योग भी अछूता नहीं है। खपत और मांग में कमी से उद्योग का भुगतान भी प्रभावित हो रहा है। इसका असर ट्रांसपोर्टरों के ईएमआई, टैक्स और अन्य भुगतान पर पड़ेगा, जिससे बैड लोन बढ़ने की आशंका है।

केयर रेटिंग्स ने तीसरी बार घटाया आर्थिक वृद्धि दर अनुमान 
केयर रेटिंग्स ने 2021-22 के लिए भारत के आर्थिक वृद्धि दर अनुमान को घटाकर 10.2 फीसदी कर दिया है, जबकि पहले 10.7 से 10.9 फीसदी रहने की संभावना जताई थी। एजेंसी ने कहा कि संक्रमण तेजी से बढ़ने के साथ विभिन्न राज्यों में लगाई जा रहीं पाबंदियां आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करेंगी। इसे देखते हुए वृद्धि दर अनुमान को कम किया गया है।

पिछले एक महीने में यह तीसरा मौका है, जब एजेंसी ने अनुमान में संशोधन किया है। इससे पहले केयर रेटिंग्स ने 24 मार्च, 2021 को आर्थिक वृद्धि दर 11 से 11.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। इसके बाद महाराष्ट्र में पाबंदी लगाए जाने के कारण एजेंसी ने 5 अप्रैल को 2021-22 के लिए वृद्धि दर अनुमान को घटाकर 10.7 से 10.9 फीसदी कर दिया था। 

अप्रैल में घटा शहरी उपभोक्ताओं का भरोसा 
संक्रमण के मामले बढ़ने के कारण शहरी उपभोक्ताओं के भरोसे में गिरावट आई है और यह अप्रैल में 1.1 फीसदी अंक घट गया। रिफिनिटिव-इप्सॉस प्राथमिक उपभोक्ता धारणा सूचकांक (पीसीएसआई) सर्वे के अनुसार, रोजगार, व्यक्तिगत वित्त, अर्थव्यवस्था और निवेश के मोर्चे पर उपभोक्ताओं का भरोसा कम हुआ है। यह ऑनलाइन सर्वे इस साल 26 मार्च से 9 अप्रैल के बीच किया गया।


इसके अनुसार, पीसीएसआई कर्मचारी विश्वास (रोजगार) उप-सूचकांक 0.6 फीसदी अंक नीचे आया। मौजूदा व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति (मौजूदा स्थिति) उप-सूचकांक में 1.5 फीसदी और निवेश वातावरण (निवेश) उप-सूचकांक में 0.9 फीसदी अंक की गिरावट रही। इस दौरान आर्थिक संभावना उप-सूचकांक 0.8 फीसदी अंक नीचे आया। इप्सॉस इंडिया के सीईओ अमित अदारकर ने कहा, संक्रमण की दूसरी लहर ने जीवनयापन और पहली लहर से उबर रहे कारोबार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। नौकरियों से जुड़ी भावनाओं, आय, बचत, निवेश और अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

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