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आईएमए पोंजी स्कीम केस: मुख्य आरोपी मोहम्मद मंसूर खान 23 जुलाई तक ईडी की हिरासत में भेजा गया
Sat, 20 Jul 2019 05:31 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 20 Jul 2019 05:31 PM IST
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मोहम्मद मंसूर खान
- फोटो : Social Media
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एक विशेष पीएमएलए अदालत ने शनिवार को करोड़ों रुपये के पोंजी योजना केस के सिलसिले में आईएमए ज्वेल्स के मालिक मोहम्मद मंसूर खान को 23 जुलाई तक तीन दिनों के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हिरासत में भेजा है। निवेशकों को कथित तौर पर धोखा दिया गया है।
खान दुबई भाग गया था। भारत वापस लौटते ही शुक्रवार को नई दिल्ली में उतरने के बाद ईडी के अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
अधिकारियों ने बताया कि उसे शनिवार को वापस बेंगलुरु लाया गया और मनी लांड्रिंग रोधक कानून (पीएमएलए) अदालत में पेश किया गया, जहां ईडी ने उसकी कस्टडी रिमांड मांगी।
विशेष जांच दल (एसआईटी) और ईडी दोनों ने खान के खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर जारी किया था। एसआईटी ने कहा था कि दुबई में उसके सूत्रों ने खान को वापस आने और कानून के समक्ष खुद को पेश करने के लिए दबाव डाला।
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आईएमए ज्वेल्स में एक लाख से ज्यादा लोगों ने निवेश किया था, जिसने 17 कंपनियां बना रखी थीं। खान ने पांच ऐसी कंपनियों में निवेश करने के लिए लोगों को आमंत्रित किया था, जिसमें ज्यादातर मुस्लिम थे।
एसआईटी ने कहा कंपनी में कुल 4,084 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। साथ ही बताया कि खान को अपने निवेशकों को लगभग 1,400 करोड़ रुपये वापस करने थे।
खान करीब डेढ़ महीने पहले दुबई भाग गया था, जिससे हजारों निवेशक सकते में आ गए थे। उसने भारत लौटने और उनके पैसे वापस करने का वादा किया था। हजारों शिकायतों के आधार पर एसआईटी ने उसके और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
एसआईटी ने अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनमें खान, फर्म के 12 निदेशक, बंगलूरू शहरी जिले के उपायुक्त विजय शंकर, सहायक आयुक्त एल सी नागराज, बैंगलोर विकास प्राधिकरण के एक अधिकारी, बीबीएमपी के एक नामित पार्षद और एक ग्राम लेखाकार शामिल हैं।
भागने से पहले, खान ने शिवाजीनगर से कांग्रेस विधायक आर रोशन बेग पर उनसे 400 करोड़ रुपये लेने और पैसे नहीं लौटाने का आरोप लगाया था। बेग ने इस आरोप को "झूठा और आधारहीन" करार देते हुए इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया था।
पार्टी के खिलाफ बगावत करने वाले इस विधायक को कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित कर दिया था। बाद में बेग ने भी अन्य बागी विधायकों के गुट में शामिल हो गया और अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
एसआईटी ने बेग को 15 जुलाई को उसके सामने पेश होने के लिए नोटिस दिया था, लेकिन उसने 26 जुलाई तक का समय मांगा था। एसआईटी ने तब उसे 19 जुलाई को पेश होने के लिए कहा था।
जिस दिन बेग को एसआईटी के सामने पेश होना था, उसने एक विशेष चार्टर्ड विमान से मुंबई जाने की योजना बनाई थी, लेकिन एसआईटी ने उसे हिरासत में ले लिया और उससे विस्तृत पूछताछ की। एसआईटी ने बेग को रिहा कर दिया और उसे 19 जुलाई को फिर से पेश होने को कहा।
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खान दुबई भाग गया था। भारत वापस लौटते ही शुक्रवार को नई दिल्ली में उतरने के बाद ईडी के अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
अधिकारियों ने बताया कि उसे शनिवार को वापस बेंगलुरु लाया गया और मनी लांड्रिंग रोधक कानून (पीएमएलए) अदालत में पेश किया गया, जहां ईडी ने उसकी कस्टडी रिमांड मांगी।
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विशेष जांच दल (एसआईटी) और ईडी दोनों ने खान के खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर जारी किया था। एसआईटी ने कहा था कि दुबई में उसके सूत्रों ने खान को वापस आने और कानून के समक्ष खुद को पेश करने के लिए दबाव डाला।
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आईएमए ज्वेल्स में एक लाख से ज्यादा लोगों ने निवेश किया था, जिसने 17 कंपनियां बना रखी थीं। खान ने पांच ऐसी कंपनियों में निवेश करने के लिए लोगों को आमंत्रित किया था, जिसमें ज्यादातर मुस्लिम थे।
एसआईटी ने कहा कंपनी में कुल 4,084 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। साथ ही बताया कि खान को अपने निवेशकों को लगभग 1,400 करोड़ रुपये वापस करने थे।
खान करीब डेढ़ महीने पहले दुबई भाग गया था, जिससे हजारों निवेशक सकते में आ गए थे। उसने भारत लौटने और उनके पैसे वापस करने का वादा किया था। हजारों शिकायतों के आधार पर एसआईटी ने उसके और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
एसआईटी ने अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनमें खान, फर्म के 12 निदेशक, बंगलूरू शहरी जिले के उपायुक्त विजय शंकर, सहायक आयुक्त एल सी नागराज, बैंगलोर विकास प्राधिकरण के एक अधिकारी, बीबीएमपी के एक नामित पार्षद और एक ग्राम लेखाकार शामिल हैं।
भागने से पहले, खान ने शिवाजीनगर से कांग्रेस विधायक आर रोशन बेग पर उनसे 400 करोड़ रुपये लेने और पैसे नहीं लौटाने का आरोप लगाया था। बेग ने इस आरोप को "झूठा और आधारहीन" करार देते हुए इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया था।
पार्टी के खिलाफ बगावत करने वाले इस विधायक को कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित कर दिया था। बाद में बेग ने भी अन्य बागी विधायकों के गुट में शामिल हो गया और अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
एसआईटी ने बेग को 15 जुलाई को उसके सामने पेश होने के लिए नोटिस दिया था, लेकिन उसने 26 जुलाई तक का समय मांगा था। एसआईटी ने तब उसे 19 जुलाई को पेश होने के लिए कहा था।
जिस दिन बेग को एसआईटी के सामने पेश होना था, उसने एक विशेष चार्टर्ड विमान से मुंबई जाने की योजना बनाई थी, लेकिन एसआईटी ने उसे हिरासत में ले लिया और उससे विस्तृत पूछताछ की। एसआईटी ने बेग को रिहा कर दिया और उसे 19 जुलाई को फिर से पेश होने को कहा।