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Pangolin: लुप्तप्राय वन्यजीव का वैश्विक बाजार में 20 बिलियन डॉलर का अवैध कारोबार, जीनोमिक्स करेगा खुलासा

Mon, 08 Jan 2024 06:14 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Mon, 08 Jan 2024 06:14 AM IST
सार

अध्ययनकर्ता जेन टिन्समैन ने कहा कि सिंगापुर में हाल में 18 टन पैंगोलिन बरामद हुए, जो मारे गए जानवरों की वास्तव में अकल्पनीय संख्या है।  वैज्ञानिकों ने नाइजीरिया को पैंगोलिनों के पहले प्रमुख वितरण केंद्र के रूप में पाया है।

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Illegal trade of endangered wildlife in the global market worth 20 billion dollars
File Photo

विस्तार

दुनिया में सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले स्तनपायी पैंगोलिन का आनुवंशिक स्रोत से लेकर आखिरी मंजिल तक का मानचित्रण करने में वैज्ञानिकों ने सफलता पाई है। इसकी मदद से वन्यजीव के अवैध शिकार का हॉटस्पॉट पता लगाने में मदद मिलेगी। इस वन्यजीवों का वैश्विक बाजार में 20 बिलियन डॉलर का कारोबार है, जो परिष्कृत अंतरराष्ट्रीय कार्टेल द्वारा संचालित होता है।

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अब तक पैंगोलिन के अवैध व्यापार को रोकना चुनौतीपूर्ण था। 23 देशों में पाई जाने वाली आठ प्रजातियों की सीमा 23 लाख वर्ग मील तक फैली है। उन्हें  पारंपरिक चिकित्सा के रूप में बिक्री के लिए दुनिया भर में ले जाया जाता है। सफेद पेट वाली अफ्रीकी प्रजाति आमतौर पर चीन और अन्य एशियाई देशों में भेजी जाती है। अब शोधकर्ताओं ने जीनोमिक्स का उपयोग कर एक नया तरीका विकसित किया है, जो अवैध शिकार और तस्करी के हॉटस्पॉट की पहचान करने में मदद करेगा।  शोध में  विकासवादी जीवविज्ञानी व कैलिफोर्निया विवि, लॉस एंजिल्स (यूसीएलए) के साथ यूएस फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस और चीन, गैबॉन, नाइजीरिया, कैमरून और चेक गणराज्य जैसे देशों के वैज्ञानिक शामिल हैं।

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सभी आठ प्रजातियां लुप्तप्राय
शोधकर्ताओं के अनुसार पैंगोलिन की सभी आठ प्रजातियां, चार अफ्रीकी और चार एशियाई लुप्तप्राय हैं। प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ ने उन्हें गंभीर रूप से लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध किया है। वन्यजीवों का वैश्विक व्यापार 20 बिलियन डॉलर का है, जो परिष्कृत अंतरराष्ट्रीय कार्टेल द्वारा संचालित होता है। शोधकर्ताओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का मानना है कि इसका उपयोग अवैध हथियारों के व्यापार जैसी गतिविधियों को वित्त पोषित करने के लिए किया जाता है।

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पैंगोलिन का पहला प्रमुख वितरण केंद्र नाइजीरिया
अध्ययनकर्ता जेन टिन्समैन ने कहा कि सिंगापुर में हाल में 18 टन पैंगोलिन बरामद हुए, जो मारे गए जानवरों की वास्तव में अकल्पनीय संख्या है।  वैज्ञानिकों ने नाइजीरिया को पैंगोलिनों के पहले प्रमुख वितरण केंद्र के रूप में पाया है। वहां से इन्हें चीन, थाईलैंड, वियतनाम, लाओस सहित अन्य देशों में भेजा जाता है।

ऐसे चलेगा अवैध शिकार का पता
विकासवादी जीवविज्ञानी और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स (यूसीएलए) के सेंटर फॉर ट्रॉपिकल रिसर्च के निदेशक अध्ययनकर्ता थॉमस स्मिथ कहते हैं कि आनुवंशिक जांच में कुछ दिन लगते हैं और यह लगभग 125 मील के भीतर किसी जानवर की उत्पत्ति का सटीक पता लगा सकती है। 

बाजार से निवास स्थान तक पैंगोलिन के व्यापार को ट्रैक करने के लिए अध्ययनकर्ताओं ने पैंगोलिन के जीनोम का मानचित्रण किया और आनुवंशिक रूप से विशिष्ट भौगोलिक आबादी का मानचित्रण करने के लिए मध्य अफ्रीका के ज्ञात इलाकों से इस प्रजाति के 111 नमूने एकत्र किए। इसके बाद शोधकर्ताओं ने जब्त 10 लाख जानवरों से नमूने लिए। दोनों का मिलान करके वे यह निर्धारित करने में सक्षम हुए कि सबसे तीव्र अवैध शिकार कहां हो रहा है। उन्होंने एक नक्शा भी तैयार किया जो अवैध व्यापार के मार्गों का पता लगाता है।

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