फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   IIT's tool will tell whether the content is real or made by AI, preparations to launch this tool

एआई की पहचान: अब मोबाइल पर दिखेगा फर्क, IIT जोधपुर बना रहा पहचानने वाला टूल; जल्द होगा लॉन्च

Mon, 05 May 2025 07:38 AM IST
शुभम कुमार शैलेश अरोड़ा
शैलेश अरोड़ा Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 05 May 2025 07:38 AM IST
सार

केंद्र सरकार ने एआई से बनी फर्जी सामग्री की पहचान के लिए IIT जोधपुर को टूल बनाने का प्रोजेक्ट दिया है। यह तकनीक 2-3 महीने में लॉन्च होगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, तकनीक से पैदा खतरे का हल भी तकनीक से ही निकलेगा।
 

विज्ञापन
IIT's tool will tell whether the content is real or made by AI, preparations to launch this tool
Artificial Intelligence(AI) - फोटो : Freepik

विस्तार

आप अपने मोबाइल पर जो वीडियो या अन्य सामग्री देख रहे हैं वह ओरिजनल है या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा तैयार, आने वाले दिनों में इसे जानना मुश्किल नहीं होगा। केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट के तहत आईआईटी जोधपुर ऐसा तकनीकी टूल तैयार कर रहा है जिससे एआई की मदद से तैयार सामग्री को आसानी से पकड़ा जा सकेगा।
विज्ञापन


केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि, दो से तीन महीने में इस तकनीक को लॉन्च किया जा सकता है। मुंबई के जिओ वर्ल्ड सेंटर में आयोजित ‘विश्व दृश्य श्रव्य और मनोरंजन सम्मेलन’ (वेव्स) के दौरान मीडिया ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से एआई के खतरों और चुनौतियों से जुड़ा सवाल पूछा। इस पर केंद्रीय मंत्री ने माना कि एआई में खतरा तो है। इसीलिए यह चर्चा का महत्वपूर्ण बिंदु है। तकनीक की दुनिया में हमें नुकसान से कैसे बचना इसके कई अप्रोच हो सकते हैं। जैसे, उसे बंद करके ताला लगा दो या फिर कानून बना दो। लेकिन, हमारा मानना है कि दृष्टिकोण ऐसा होना चाहिए जिससे समस्या का व्यवहारिक समाधान हो सके।  
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- कृषि में नई क्रांति: शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किए दो जीनोम-एडिटेड चावल की किस्म, लागत घटेगी और पानी बचेगा
विज्ञापन
विज्ञापन


तकनीक का समाधान, तकनीक से संभव
हमने महसूस किया कि तकनीक का समाधान तकनीक से ही निकलता है। इसी दृष्टिकोण के साथ हमने एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट के तहत देश के विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) को बहुत से अलग-अलग प्रोजेक्ट दिए हैं। उन्हें कहा है कि वह ऐसे तकनीकी टूल्स बनाएं जिससे एआई के नुकसान को रोका जा सके। इसी के तहत एक प्रोजेक्ट आईआईटी जोधपुर को दिया गया है। यह संस्थान ऐसा तकनीकी टूल बना रहा है कि जो कंटेंट आपको दिखता है वह एआई जेनरेटेड है या ओरिजनल। यह पता करने के लिए उन्होंने एक तकनीक विकसित की है जो दो-तीन महीने में पूरी होकर लॉन्च भी कर दी जाएगी।

ये भी पढ़ें:- नमामि गंगे कार्यक्रम: गंगा हुई स्नान योग्य, पर यूपी के दो हिस्सों में अब भी संकट; कचरा निपटान में बड़ी कमी

एआई के खतरों से निपटने के लिए जागरूकता भी जरूरी
एआई के खतरों को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिर्फ कानून बनाने से सब कुछ नहीं हो जाता है। बल्कि समाज को शिक्षित, जागरूक करना पड़ेगा। तकनीकी टूल बनाने पड़ेंगे, उन्हें कैसे लागू करना यह देखना होगा। सबको साथ लेकर चलना पड़ेगा। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर हम काम कर रहे हैं। दुनिया, भारत के इस विचार को लीडरशिप मान रही है। चार दिन तक आयोजित वेव्स के विभिन्न सत्रों में भी एआई के फायदों और नुकसान पर चर्चा हुई हैं। जब पीएम मोदी ने वेव्स का उद्घाटन करने के बाद क्रिएटर्स से मुलाकात की तो उनकी चर्चा में एआई का भी जिक्र आया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed