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लड़ेंगे कोरोना से: इलाज में इंटोमेथासीन दवा काफी प्रभावी, आईआईटी मद्रास की ओर से तैयार किए गए ट्रायल में मिले सबूत
Fri, 22 Apr 2022 11:06 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 22 Apr 2022 11:06 PM IST
सार
इस शोध को लेकर आईआईटी मद्रास की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि इंडोमेथासीन एक पुरानी दवा है जिसका इस्तेमाल 1960 के दशक से होता आ रहा है। कोरोना मरीजों में इस दवा के असर को पहली बार भारतीय शोधार्थियों ने दिखाया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
विस्तार
आईआईटी मद्रास में शोधार्थियों की ओर से तैयार किए गए ट्रायलों में कोरोना के हल्के और मध्यम लक्षणों वाले मरीजों के इलाज में इंडोमेथासीन दवा का शानदार प्रभाव देखने को मिला है। इस नॉन-स्टेयरॉइडल एंटी-इन्फ्लेमैटरी दवा का इस्तेमाल एक एंटीवायरल एजेंट के तौर पर किया गया। इस शोध को काफी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
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इस अध्ययन में सामने आईं जानकारियां प्रतिष्ठित जरनल नेचर साइंटिफिर रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुई हैं। यह अध्ययन पनिमालार मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में डॉ. राजन रविचंद्रन के नेतृत्व में किया गया। डॉ. राजन आईआईटी मद्रास में सहायक फैकल्टी और एमआईओटी हॉस्पिटल्स में नेफ्रोलॉजी के निदेशक हैं।
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इसे लेकर आईआईटी मद्रास की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि इंडोमेथासीन एक स्थापित दवा है जिसका इस्तेमाल 1960 के दशक से होता आ रहा है। अकेले अमेरिका में ही हर साल 20 लाख से अधिक नुस्खों में डॉक्टर इस दवा को लेने के लिए कहते हैं।
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बयान में आगे कहा गया कि भारतीय शोधार्थियों ने पहली बार एक रैंडम क्लिनिकल ट्रायल के जरिए इंटोमेथासीन दवा की प्रभावकारिता प्रदर्शित की है। हालांकि, इसके वैज्ञानिक आधार पर इटली और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने शोध किया था। इस पूरे अध्ययन के लिए फंडिंग आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र और एक्सिलर वेंचर्स के चेयरमैन क्रिस गोपालकृष्णन ने की है।
डॉ. राजन रविचंद्रन ने कहा कि इंडोमेथासीन एक सुरक्षित और समझी हुई दवा है। मैं अपने पेशे में पिछले 30 वर्षों से इसका इस्तेमाल करता आ रहा हूं। उन्होंने कहा कि यह दवा कोरोना के सभी वैरिएंट पर काम करती है। हमने दो ट्रायल किए हैं। पहला कोरोना की पहली लहर में और दूसरा दूसरी लहर में किया गया था। दोनों के परिणाम एक जैसे रहे थे।