{"_id":"5b62d7114f1c1b9d3e8b4ade","slug":"iit-kharagpur-report-said-gutka-and-pan-masala-packets-are-the-prime-reason-of-waterlogging","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुटखा, पान मसाला है दिल्ली की सड़कों पर पानी का कारण: रिपोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
गुटखा, पान मसाला है दिल्ली की सड़कों पर पानी का कारण: रिपोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 02 Aug 2018 03:34 PM IST
विज्ञापन
यदि आप दिल्ली में रहते हैं तो आपको पता होगा कि यहां जरा सी बारिश होती नहीं है कि सड़कों और गलियों पर हर जगह पानी दिखाई देने लगता है। हर शख्स यही सवाल करता है कि आखिर क्यों बारिश होने से पहले नालियों और गटरों को साफ नहीं किया जाता है? अब इस मसले पर आईआईटी खड़गपुर की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार जलजमाव की इस समस्या के जिम्मेदार खुद दिल्ली वाले और उनकी गुटखा, पान मसाला खाने की आदत है।
विज्ञापन
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के 22 प्रतिशत से ज्यादा गटर केवल इस वजह से चोक हैं क्योंकि उसमें पान मसाला और गुटखे के पैकेट भरे हुए हैं। खड़गपुर के शहरी योजना और अनुसंधान विभाग ने पिछले दिनों जलजमाव की समस्या से संबंधित एक सर्वे कराया था। जिसमें यह बात सामने आई कि इसके पीछे पान मसाला और गुटखा के पाउच भी शामिल हैं। इस सर्वे के अनुसार जिस कचरे के कारण दिल्ली के गटर और नालियां चोक हो रहे हैं उसमें 39 प्रतिशत ठोस कचरा है जो घरों से निकलता है, 27 प्रतिशत प्लास्टिक है, 12 प्रतिशत कीचड़ है और 22 प्रतिशत पान मसाले के पाउच हैं।
विज्ञापन
रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि बारिश के बाद गटर के ओवरफ्लो होने की समस्या से तभी निपटा जा सकता है जब पैकिंग कचरे की समस्या का कुछ समाधान किया जा सके। खड़गपुर के शहरी योजना और अनुसंधान विभाग के प्रोफेसर टीएस रामाचंद्रन ने बताया कि दिल्ली के गटर गुटखा फैक्ट्री की तरह लगते हैं। इसकी पैकिंग सामान्य पॉलिथीन के कचरे से ज्यादा हानिकारक होती है। इस रिपोर्ट को रामाचंद्रन के साथ प्रवीननाथ और प्रशांत कुमार ने तैयार किया है।
विज्ञापन
तीन लोगों की टीम ने 2 से 15 जुलाई के बीच दिल्ली की 35 सड़कों का और उन गटरों का निरीक्षण किया जहां पानी नालों में जाता है। उन्होंने उन जगहों की छानबीन की। टीम को इन जगहों से 40 किलो से ज्यादा पान मसाला और गुटखे के पाउच बरामद हुए। पान मसाला और गुटखा के इन पाउच की रिसाक्लिंग वैल्यू जीरो होती है। यहां तक की कूड़ा बीनने का काम करने वाले लोग भी इन्हें नहीं उठाते हैं। जिसकी वजह से यह गटरों में चले जाते हैं।