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Hindi News ›   India News ›   IIT-Guwahati working on developing COVID-19 drug, Soon established a center for research

#LadengeCoronase: आईआईटी- गुवाहाटी कोरोना की दवा बनाने में जुटी, शोध के लिए स्थापित करेगी केंद्र

Mon, 30 Mar 2020 07:43 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, गुवाहाटी
पीटीआई, गुवाहाटी Published by: अनवर अंसारी Updated Mon, 30 Mar 2020 07:43 PM IST
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IIT-Guwahati working on developing COVID-19 drug, Soon established a center for research
IIT Guwahati

आईआईटी-गुवाहाटी ने सोमवार को कहा कि वह कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिए एक दवा विकसित करने और इस जानलेवा वायरस पर शोध के लिए एक समर्पित केंद्र स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है।

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संस्थान ने यह भी कहा कि इसने एक पोलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) मशीन विकसित की है, जो 12 घंटों में 1,000 नमूनों का विश्लेषण कर सकती है और ऐसी दो इकाईयां पहले ही गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) को आपूर्ति की जा चुकी हैं।
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आईआईटी-गुवाहाटी ने एक बयान में कहा कि चूंकि वर्तमान में कोरोना वायरस के इलाज के लिए कोई दवा उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए फैकल्टी सदस्य आधुनिक जैव-तकनीकी उपकरणों का उपयोग करके कोविड-19 के उपचार के लिए छोटे अणुओं अवरोधकों को विकसित करने की प्रक्रिया में कार्य कर रहे हैं।

संस्थान ने कहा कि यह समग्र विचार कोरोना वायरस से संक्रमित रोगियों और अन्य भयानक वायरल संक्रमणों के इलाज के लिए सुरक्षित, प्रभावी और सस्ती दवा विकसित करना है। बयान में कहा गया है कि जैव-विज्ञान और जैव-इंजीनियरिंग विभाग में वैक्सीन विकसित करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि अन्य विभाग विभिन्न वायरल संक्रमणों की शुरुआत का पता लगाने के लिए नैदानिक और चिकित्सीय दृष्टिकोण रखने के लिए कई मार्गों को खोजने में लगे हुए हैं।

इसमें कहा गया है कि जैव-विज्ञान और जैव-इंजीनियरिंग और रसायन विज्ञान विभाग और सेंटर फॉर नैनो टेक्नोलॉजी के फैकल्टी सदस्यों ने भी कोरोना का मुकाबला करने के लिए शोध शुरू किया है। संस्थान कोविड-19 के विश्लेषण के लिए एक उन्नत अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया में है, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र को कोरोना वायरस और ऐसे अन्य घातक वायरस का पता लगाने के लिए परीक्षण करने में मदद करेगा।


आईआईटी-गुवाहाटी के निदेशक टी जी सीताराम ने कहा कि हमारा विचार पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए इस अत्याधुनिक सुविधा को बनाना है। भविष्य में यह केंद्र संक्रमण के प्रारंभिक चरण में विभिन्न संक्रामक रोगों के निदान और उनकी रोकथाम के लिए अत्यधिक सक्षम जनशक्ति विकसित करने में मदद करेगा।

बयान में कहा गया है कि ये मशीनें अगर 12 घंटे लगातार चलती हैं तो 1,000 नमूनों का विश्लेषण करेंगी और अगर 24 घंटे चलेगी तो 2,000 नमूनों का विश्लेषण किया जा सकता है। 

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