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आईआईटी बॉम्बे खुदकुशी केस: एक हफ्ते बाद भी लॉक आईफोन नहीं खुला, अब दूसरी एजेंसियों से मदद लेगी क्राइम ब्रांच

Thu, 24 Sep 2026 07:38 PM IST
Sunil Mehrotra सुनील मेहरोत्रा
Updated Thu, 24 Sep 2026 07:38 PM IST
सार

आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत की जांच में उनका लॉक आईफोन क्राइम ब्रांच के लिए बड़ी चुनौती बना है। एक हफ्ते बाद भी फोन का डेटा रिकवर नहीं हो सका है। अब पुलिस दूसरी एजेंसियों से तकनीकी मदद लेने की तैयारी में है। आखिर फोन में क्या राज छिपे हैं? आइए, जानते हैं...

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IIT Bombay Sahil Wakode Case: Locked iPhone Remains Key Challenge for Mumbai Crime Branch
आईआईटी बॉम्बे में छात्र की मौत (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

आईआईटी बॉम्बे में सेकेंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे की खुदकुशी के मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने एक बड़ी तकनीकी रुकावट खड़ी हो गई है। घटना के एक हफ्ते बीत जाने के बाद भी राज्य की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी साहिल के लॉक आईफोन को अनलॉक करने में पूरी तरह असमर्थ रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस आईफोन में मौजूद डेटा पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी साबित हो सकता है। अगर पुलिस इस फोन से डेटा रिकवर करने में सफल हो जाती है, तो यह स्पष्ट तौर पर पता चल सकेगा कि परीक्षा के दौरान साहिल मोबाइल पर आखिर क्या सर्च कर रहा था, उसने किससे बातचीत की थी और अपनी जान देने से कुछ वक्त पहले उसके साथ क्या-क्या हुआ था।

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यह पूरी घटना 18 सितंबर की है, जब आईआईटी बॉम्बे कैंपस में परीक्षा चल रही थी। परीक्षा के दौरान प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ने साहिल पर मोबाइल फोन से chatgpt के इस्तेमाल करने का संदेह जताया था। परीक्षा हॉल के सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि प्रोफेसर दूल्ला साहिल को हॉल छोड़कर बाहर जाने के लिए कहते दिख रहे हैं। इसके तुरंत बाद साहिल ने खुदकुशी कर ली, जिससे कैंपस में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी किया। अब मुंबई क्राइम ब्रांच की पूरी जांच इसी बात पर टिकी है कि परीक्षा हॉल में वास्तव में क्या हुआ था और फोन में chatgpt में असल में क्या सर्च किया गया था, इसलिए साहिल का आईफोन इस केस का सबसे निर्णायक सबूत बन गया है।
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हालांकि, आईफोन का अत्याधुनिक सुरक्षा तंत्र क्राइम ब्रांच के आगे रोड़ा बना हुआ है। साहिल आईफोन का नया मॉडल इस्तेमाल कर रहा था और क्राइम ब्रांच के पास उसका पासकोड उपलब्ध नहीं है।क्राइम ब्रांच ने फोन को तुरंत फॉरेंसिक लैब भेजा था, लेकिन लैब का कहना है कि उनके पास फिलहाल ऐसा कोई टूल नहीं है जो इतने नए आईफोन से डेटा निकाल सके। साहिल के दोस्तों या किसी भी जानकार को भी उसके पासकोड के बारे में कोई जानकारी नहीं है। दरअसल, डिजिटल फॉरेंसिक टूल फोन के विशिष्ट मॉडल और ऑपरेटिंग सिस्टम के वर्जन के हिसाब से ही काम करते हैं। बाजार और फॉरेंसिक लैब्स में फिलहाल आईफोन 15 तक के मॉडलों को सपोर्ट करने वाले टूल ही उपलब्ध हैं, जबकि नए मॉडल और अपडेटेड सॉफ्टवेयर के लिए फॉरेंसिक टूल अपडेट होने में काफी समय लगता है।
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ऐसी जटिल स्थिति में क्राइम ब्रांच अब दूसरे तकनीकी रास्ते तलाश रही है। क्राइम ब्रांच उन अन्य राष्ट्रीय व खास जांच एजेंसियों से मदद लेने की योजना बना रही है जिनके पास ज्यादा एडवांस फॉरेंसिक टूल मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर, एपल कंपनी की नीतियां भी इस जांच में एक बड़ी सीमा तय करती हैं। एपल के सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक, iOS 8 और उसके बाद के वर्जनों वाले आईफोन से कंपनी खुद भी डेटा नहीं निकाल सकती, क्योंकि फोन का पूरा डेटा एन्क्रिप्टेड होता है और उसका पासवर्ड या डिजिटल कुंजी सिर्फ यूजर के पास होती है, कंपनी के पास भी नहीं।


सबूत जुटाने और जांच को आगे बढ़ाने के लिए क्राइम ब्रांच ने साहिल का लैपटॉप भी अपने कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। इसके अलावा, क्राइम ब्रांच परीक्षा हॉल के बाहर की लॉबी के सीसीटीवी फुटेज को बारीकी से खंगाल रही है, जहां साहिल और प्रोफेसर दूल्ला एक साथ देखे गए थे। क्राइम ब्रांच मुख्य रूप से दोपहर 12:38 बजे (जब साहिल को हॉल छोड़ने को कहा गया) से लेकर दोपहर 1:25 बजे (जब वह हॉस्टल के कमरे में दाखिल हुआ) के बीच की हर एक कड़ी को आपस में जोड़ने में जुटी है। शुरुआत में इस मामले में पवई पुलिस स्टेशन में प्रोफेसर दूल्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।।बाद में केस मुंबई क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया था।

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