आईआईटी मुंबई हो या दिल्ली सभी के पास वित्तीय संसाधनों का टोटा, वित्त मंत्री से पैसा मांगेंगे निशंक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईआईटी दिल्ली हो या मुंबई, खड़गपुर हो या कानपुर सबके पास वित्तीय संसाधनों का टोटा है। हालत यह है कि आईआईटी में ईडब्ल्यूएस कोटे के करीब 25 फीसदी अतिरिक्त छात्रों का भार बढ़ने वाला है, लेकिन इन संस्थानों के पास छात्रावास से लेकर अन्य मूलभूत संसाधनों की कमी चुनौती बनी हुई है। उच्च शिक्षा वित्त एजेंसी (हेफा) के कार्यक्रम में जब मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक के सामने आईआईटी निदेशकों ने अपनी जरूरत का पिटारा खोला तो एचआरडी मंत्री की विवशता सामने आ गई
जर्जर हालत में हैं आईआईटी की बिल्डिंग्स
आईआईटी मुंबई और दिल्ली को 2500 छात्र नए मिलने वाले हैं। क्रमश: 12000 और 13000 छात्रों का बोझ पहले से है। ऊपर से दिल्ली, मुंबई, कानपुर, खड़गपुर, रुड़की समेत अन्य संस्थानों के भवन काफी पुराने हो गए हैं। आईआईटी मुंबई के निदेशक ने एजेंसी की बैठक के दौरान बताया कि एक हादसा भी हो चुका है। मानव संसाधन विकास मंत्री ने भी माना कि आईआईटी के भवन पुराने हैं और कई भवन तो काफी जर्जर अवस्था में हैं। इनके तत्काल निर्माण की आवश्यकता है। उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि बैठक के दौरान डा. निशंक ने आईआईटी को संसाधन उपलब्ध कराने के मंत्रालय के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए हैं।
वित्त मंत्री से बात करेंगे निशंक
मानव संसाधन विकास मंत्री ने उच्चशिक्षा वित्त एजेंसी की बैठक के दौरान आईआईटी के निदेशकों, प्रतिनिधियों को आश्वत करते हुए कहा कि वह खुद आईआईटी की स्थिति को लेकर संवेदनशील हैं, उन्हें पता है कि भवन पुराने हो गए हैं। नए छात्रावास बनाए जाने हैं, संसाधनों का टोटा है और इसके अनुपात में वित्तीय अनुदान की समस्या है। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से कहा कि आईआईटी देश के प्रीमियर इंस्टीट्यूट हैं। इसलिए इन्हें साधन, संसाधन उपलब्ध कराना ही होगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्री ने अधिकारियों से आईआईटी को केंद्र में रखकर अलग से प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। उन्होंने आईआईटी के निदेशक और प्रतिनिधियों को भरोसा दिया कि जरूरत पड़ने पर वह खुद इस मामले को केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास ले जाएंगे, उनसे बात करेंगे। केन्द्र सरकार से वित्तीय मदद दिलाने की पहल करेंगे।