कोविड-19: अभी टला नहीं है कोरोना वायरस का खतरा, वैक्सीन लेने के बाद भी हो सकते हैं नये म्यूटेशन के शिकार
इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल बोले, वायरस का नया स्वरूप वैक्सीन लगवाने वालों को भी कर सकता है प्रभावित, वैक्सीन को प्रतिबंधित करना नहीं है समाधान...
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विस्तार
देश में एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। बीते 24 घंटों में देशभर में कोरोना के 28,900 नये मामले देखे गए। कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या को देखते हुए महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और कर्नाटक के कई शहरों में नाइट लॉकडाउन लगा दिया गया है। इसी बीच दिल्ली में कोरोना के ‘दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन’ की भी पुष्टि कर दी गई है। विशेषज्ञ लगातार नये वैरियंट और उसके स्ट्रेन पर शोध कर रहे हैं, इस संदर्भ में सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) के अंतर्गत आने वाले आईजीआईबी (इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) की भूमिका अहम है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने हाल ही में पंजाब में कोरोना के दो मामलों में नये म्यूटेट स्ट्रेन N440K की पुष्टि की है। एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को कई देशों में प्रतिबंधित किए जाने सहित कई विषयों पर आईजीआईबी के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने अमर उजाला डॉट कॉम से विस्तृत बात की।
सवाल: देश मे अचानक कोरोना के मामले बढ़ने लगे। क्या ऐसा संभावित था या कोई और वजह है?
हम बहुत पहले से कह रहे हैं कि संक्रमण का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। वायरस कभी भी वापस आ सकता है। वायरस के म्यूटेशन की पूरी संभावना रहती है, इस तरह के वायरस म्यूटेशन वैक्सीन प्राप्त करने वाले लोगों को भी प्रभावित करेगा और संक्रमण का खतरा भी बढ़ाएगा। निश्चित रूप से वायरस नये म्यूटेशन से संक्रमण को बढ़ाएगा, और ऐसा भारत में ही नहीं अन्य कई देशों में भी देखा जा रहा है। कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही वायरस के म्यूटेशन का खतरा भी बढ़ेगा।
सवाल: क्या अभी एक नये सीरो सर्वे की जरूरत है देश में, अब लोग कैसे बचें?
निश्चित रूप से महामारी के खतरे को देखते हुए हर कुछ महीनों में सीरो सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए। इस संदर्भ में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने राष्ट्रीय स्तर का सर्वेक्षण कराया है, हम सीएसआईआर में भी देशभर की सम्बद्ध लैबोरेटरी के माध्यम से चयनित लोगों के समूह में सीरो सर्वेक्षण करते रहते हैं। इससे हमें संक्रमण के बारे मे लोगों की अधिक सटीक प्रतिक्रिया और जानकारी प्राप्त होती है।
सवाल: कोविड काल में आईजीआईबी की क्या भूमिका रही है?
सीएसआईआर, आईजीआईबी कोविड काल में कई तरह से कार्य करती रही हैं। हमने आरटीपीसीआर जांच को विकसित करने में सहायता की। आईजीआईबी की आधुनिक तकनीक की सहायता से देश में वायरल जीनोम सैंपल, बड़े स्तर पर वायरस के संक्रमण की स्क्रीनिंग, संक्रमण की प्रारंभिक स्तर पर जांच सहित कोरोना के लिए नई जांच तकनीक सीएसआईआर की सहायता से आईजीआईबी में ही विकसित हुई हैं। पहली बार देश में एयरपोर्ट सीक्वेंसिंग लैबोरेटरी बनाई गई, डिजिटल टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से चेस्ट एक्स-रे और संक्रमण का पता लगाने की जांच किट विकसित की गई।
सवाल: कुछ राज्यों में नाइट कर्फ्यू लगा दिया है, इसका क्या लाभ होगा?
कर्फ्यू की सहायता से हम एक जगह एकत्रित होने वाली भीड़ को रोक सकते हैं। रात्रि कर्फ्यू के दौरान रात में केवल अति आवश्यक सेवाओं के कार्य करने की ही अनुमति दी जाती है, इससे बेवजह भीड़ को रोका जा सकता है।
सवाल: क्या आप यह मानते हैं कि लॉकडाउन से बेहतर है कि सभी के लिए टीकाकरण कार्यक्रम शुरू कर दिया जाए?
सरकार पहले से ही कोरोना टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है। जितनी अधिक संख्या में लोग कोरोना वैक्सीन लेने के लिए आगे आएंगे, उतनी ही जल्दी हम संक्रमण को नियंत्रित कर सकेंगे। हमें सरकार के हर ऐसे प्रयासों पर अपनी सहभागिता निभानी चाहिए।
सवाल: एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को कुछ देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया, क्या हम वैक्सीन से होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर नहीं हैं?
हमारे पास कोविशील्ड की सुरक्षा और प्रभावों को लेकर पर्याप्त संतोषजनक सफल परिणाम मौजूद हैं, इस आधार पर हम कह सकते हैं कि बिना कोरोना वैक्सीन लगवाए संक्रमण के खतरे को बढ़ावा देने से बेहतर है कि वैक्सीन पर भरोसा करें। कोविशील्ड के जिस तरह के संभावित दुष्प्रभावों की चर्चा की जा रही है, बहुत संभव है कि वैक्सीन न लेने की वजह से प्रभाव इससे भी अधिक घातक हों, इसलिए मुझे लगता है कि दुष्प्रभावों के आधार पर वैक्सीन को प्रतिबंधित करना उचित निर्णय नहीं है।
सवाल: सीएसआईआर ने खुद अपने संस्थान में सीरो सर्वेक्षण कराया है, उसके बारे में कुछ बताएं?
पिछले साल सीएसआईआर की 37 लैबोरेटरीज और केन्द्रों में हमने एक सीरो सर्वेक्षण कराया। सर्वेक्षण में सीएसआईआर के वैज्ञानिक, छात्र, सुरक्षा, सफाई कर्मचारी और हाउसकीपिंग के लोगों को शामिल किया गया। इस समूह में न केवल विभिन्न सामाजिक आर्थिक समुदाय के बल्कि विभिन्न जनसंख्या घनत्व के लोग भी थे। सर्वेक्षण कोरोना के अति गंभीर समय अगस्त से सितंबर 2020 तक के बीच किया गया। रिपोर्ट में हमने कोरोना के सौ मिलियन मामले देखे, जबकि वास्तव में यह आंकड़ा तीस गुना अधिक था। हमने यह भी देखा कि पचास फीसदी ऐसे लोग थे, जिनमें एंटीबॉडी देखी गई उनमें कोरोना संक्रमण के किसी भी तरह के लक्षण नहीं देखे गए थे।
सवाल: इसका मतलब यह है कि आप वैक्सीन को लेकर आश्वस्त हैं?
जी हां, वैक्सीन को लेकर हम पूरी तरह आश्वस्त हैं और वैक्सीन लगवाना एक समझदारी का काम है। ऐसे सभी लोग जिन्हें संक्रमण जल्दी हो सकता है उन सभी को वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। जब भी वैक्सीन लगवाने के लिए मेरे परिवार का नंबर आएगा, तब मुझे अपने परिवार को वैक्सीन लगवाने में किसी भी तरह की कोई झिझक नहीं होगी और यह मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।