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इंदिरा गांधी जैसी इच्छाशक्ति हो तो फौज दे सकती है आतंकवाद का माकूल जवाब

Fri, 15 Feb 2019 08:49 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: शशिधर पाठक Updated Fri, 15 Feb 2019 08:49 PM IST
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If you have the will power of Indira Gandhi then army can give good answer to terrorism
pulwama terror attack - फोटो : PTI
कारगिल युद्ध के हीरो रहे मेजर जनरल (रिटा.) लखविंदर सिंह का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसी राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो सेना के पास साधन, संसाधन और शक्ति सबकुछ है। सेना सही समय और स्थान चुनकर पुलवामा हमले को अंजाम देने वालों को जोरदार मुंहतोड़ जवाब दे देगी। वहीं उरी हमले और सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान सेना की सबसे प्रतिष्ठित, अग्रिम मोर्चे की 15वीं कोर के कमांडर रहे लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) सतीश दुआ के अनुसार सुरक्षा बलों के पास विकल्प की कमी नहीं है। भारतीय सुरक्षा बल पुलवामा जैसी कायर आतंकी घटना पर नानी याद दिला देने वाली कार्रवाई में सक्षम हैं।
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क्या हैं विकल्प?

लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ के अनुसार भारतीय सुरक्षा बलों के पास पड़ोसी देश के आतंक के पैरोकारों से निबटने के लिए कई विकल्प हैं। हमारे सुरक्षा बल आतंकी संगठनों की कमर तोड़ सकते हैं, स्थानीय स्तर पर बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं, पाकिस्तान के सुरक्षा बलों को सीधा जवाब दे सकते हैं, ताकि वे पाकिस्तान की सरहद से घुसपैठ करने वाले आतंकियों को आने न दें। जनरल सतीश दुआ के अनुसार चौथा विकल्प भी है और वह इसके बारे में मीडिया में चर्चा नहीं करना चाहते। 
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यह पूछने पर कि विस्फोटक लेकर टकराने वाला आतंकी कश्मीरी है, क्षेत्र भारत का है और हमला भारतीय सुरक्षा बल पर हुआ है तो क्या पाकिस्तानी सुरक्षा बल के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है? जनरल दुआ का कहना है कि पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला के तुरंत बाद पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इसकी जिम्मेदारी ले ली। उसके जिम्मेदारी लेने के बाद भी पाकिस्तान ने उसे इस आतंकी घटना को अंजाम देने के जुर्म में न तो गिरफ्तार किया और न ही कोई कार्रवाई की। 
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यह पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई का बड़ा कारण बन सकता है। यह पूछने पर कि क्या इससे पाकिस्तान और भारत सुरक्षा के सुरक्षा बलों के बीच में बदला लेने की स्थिति नहीं पैदा हो जाएगी, तो दुआ ने कहा कि इससे क्या फर्क पड़ता है। एक तरह से यह स्थिति है। आतंकी बिना पाकिस्तान के सुरक्षा बलों के समर्थन के ऐसा नहीं कर सकते।

इंदिरा गांधी जैसी इच्छाशक्ति चाहिए

मेजर जनरल लखविंदर सिंह ने कहा कि जिसका मुक्का उसी में दम है। इस पर अमल करते हुए जोरदार मुक्का मारकर वापस आ जाना है, लेकिन इसके लिए सुरक्षा बलों को खुली छूट और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसी इच्छाशक्ति की जरूरत है। इंदिरा जी ने यही किया था। पूरी दुनिया खिलाफ थी, लेकिन उन्होंने 1971 में पाकिस्तान को सबक सिखा दिया था। 

मेजर जनरल का कहना है कि सेना के मेजर गगोई जैसा प्रकरण नहीं होना चाहिए कि जहां एक मेजर ने मानव शील्ड बनाकर एक व्यक्ति को जीप के आगे बांधा। अपने साथियों की और खुद की जान बचाई। बाद में सेना का वहीं मेजर निशाने पर आ गया। मेजरल जनरल का कहना है कि ह्यूमन शील्ड का इस्तेमाल एक रणनीति है। आतंकी भी सुरक्षा बलों के खिलाफ ऐसा करते हैं।

कभी न रुकने वाला छद्मयुद्ध

मेजर जनरल सिंह के अनुसार आतंकवाद छद्म युद्ध है। यह कभी समाप्त होने वाला नहीं है, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद ही इसकी तीव्रता पर लगाम लगाई जा सकती है। जनरल लखविंदर सिंह का कहना है कि फौज के पास साधन, संसाधन, क्षमता सबकुछ है। बस सरकार के राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। ऐसा न हो कि संसद भवन पर 13 दिसंबर 2001 को हुए हमले के बाद आपरेशन पराक्रम जैसा हो। 

आपरेशन पराक्रम में हमने बारुदी सुरंग तक बिछा ली और फिर वापस आ गए। उल्टा बारुदी सुरंग बिछाने और हटाने में हमारे सैकड़ो जवानों की शहादत हो गई। मेजर जनरल का कहना है कि सबक सिखाने के लिए विकल्प की कमी नहीं है। सुरक्षा बल आतंकी कैंप, पाकिस्तान की सेना के सश भंडारण, अड्डे सबको उड़ा सकते हैं। हमें पाकिस्तान के परमाणु हथियार से भी संकोच करने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इसका इस्तेमाल फौज के लाहौर के आगे बढऩे के बाद ही होगा।

कारगिल में दिखाया था जौहर

मेजर जनरल के अनुसार कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान की फौज ऊंचाई पर थी। खूब गोले दाग कर हमारा नुकसान कर रही थी। द्रास में हमारी आर्टिलरी ब्रिगेड ने करारा जवाब दिया। मैंने नई रणनीति का इस्तेमाल किया। 56 तोप को एक साथ, एक समय में कुछ लक्ष्य पहचान कर 1000 गोले दागने की रणनीति अपनाई गई। ऊंचाई पर बैठे दुश्मन के दांत खट्टे हो गए। उसके बाद उधर से गोलीबारी बंद हो गई। आशय यह कि सरकार सुरक्षा बलों को पूरी छूट दे और मजबूत राजनीतिक इच्छा शक्ति के साथ पीछे खड़ी रहे।

क्या होना चाहिए

मेजर जनरल लखविंदर सिंह सैन्य कार्रवाई में रणनीतिकार की भूमिका निभा चुके हैं। उनका मानना है कि लड़ाई विकल्प नहीं है। यह देश को करीब दस साल पीछे ले जाएगी, लेकिन मुंह तोड़ जवाब दिया जाना चाहिए। इसके दो रास्ते हैं। पहला सुरक्षा बलों को खुली छूट। अभी श्रीनगर में स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर है कि जब तक कोई सुरक्षा बल पर गोली न चलाए, सुरक्षा बल किसी पर गोली न चलाए। यह सब स्थिति सुरक्षा बल के विवेक पर छोड़ दी जाए। क्योंकि आतंकी पाकिस्तान की सह पर आ रहे हैं। 

आतंकियों की भर्ती, प्रशिक्षण, उन्हें गोला-बारुद, हथियार, उपकरण, उसमें पारंगत बनाना, घुसपैठ कराना बिना सैन्य मदद के संभव नहीं है। मेजर जनर के अनुसार हम हर साल आतंकी मुठभेड़ में मारते हैं, हर साल नये आतंकी आते हैं और स्थानीय समर्थन से खतरा बना रहता है। इसे पूरी तरह खत्म करना होगा। दूसरा प्रयास राजनीतिक स्तर पर हो। केन्द्र सरकार पाकिस्तान से संवाद करे, दबाव बनाए। अंतरराष्ट्रीय स्तर का दबाव बढ़े। ताकि आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई को संतुलित रूप दिया जा सके।
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