सोमनाथ चटर्जी की बात मानते तो आज अलग होती तस्वीर- अतुल अंजान
मैं इस बात के लिए खुद को खुशकिस्मत समझता हूं कि मुझे सोमनाथ चटर्जी का विशेष स्नेह प्राप्त था। इसका कारण यह था कि मेरे दादा जी स्व. श्री शशिभूषण सिंह बांग्ला भाषा के विद्वान थे। उनकी पुस्तक 'व्याकरण कौमुदी' आज भी पश्चिम बंगाल में बेहद लोकप्रिय है।
उसी कारण मैं भी बांग्ला बहुत अच्छी बोल लेता हूं। अपनी भाषा से विशेष स्नेह रखने वाले सोमनाथ दादा से जब मैं बांग्ला में बात करता था, तो वे बेहद खुश होते थे। वे हमेशा संसद की कार्यवाही देखने के लिए मुझे व्यक्तिगत पास भेजते थे।
मेरा व्यक्तिगत मानना है कि पार्टी में कुछ शीर्ष नेताओं से मतभेद के कारण उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया था। अगर ऐसा न होता तो वे आज कहीं ज्यादा बड़ी शख्सियत के रुप में हमारे सामने होते और देश को बड़ा लाभ होता। जब देवेगौड़ा को पीएम बनाने से पहले ज्योती बसु को पीएम बनाने का प्रस्ताव आया था, तब पार्टी के कुछ नेता इससे सहमत नहीं थे। अगर उनकी बात मान ली गई होती तो आज देश में कम्यूनिस्ट पार्टियों की तस्वीर कुछ अलग होती।
जहां तक उनकी विचारधारा की बात है, आज मैं यहां तक कहना चाहूंगा कि जिस तरह गांधी और अंबेडकर की विचारधारा के बिना हिंदुस्तान को आगे बढ़ाना संभव नहीं है, उसी तरह सोमनाथ चटर्जी की सोच को आगे बढ़ाना भारत की आत्मा को बचाए रखने के लिए आवश्यक है। वे हर परिस्थिति में देश और राष्ट्रीयता को महत्त्व देते थे और उसको मजबूत करने की कोशिश किया करते थे।
बांग्लाभाषी होने के बावजूद हिंदी को बहुत प्यार करते थे। देश को आगे बढ़ाने के लिए हिंदी के महत्त्व को मानते थे। वे सबका सम्मान करते थे, चाहे कोई उनसे सहमत हो या नहीं। जबकि आज देश का जो हाल है, उसके बारे में सभी जानते हैं।
कराई थी लोकसभा टीवी की शुरुआत
लोकसभा की कार्यवाही को पूरे देश की जनता के सामने रखने के लिए ही उन्होंने लोकसभा टीवी की शुरुआत कराई थी। उनका मानना था कि सिर्फ वोट देना ही किसी नागरिक का कर्तव्य नहीं है। उसे इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि उसके जन प्रतिनिधि संसद में पहुंचकर क्या कर रहे हैं। आज लोकसभा टीवी की भूमिका के कारण ही देश संसद में नेताओं की भूमिका को देख पा रही है। इससे लोकतंत्र को बड़ी मजबूती मिलेगी।
उनकी वैज्ञानिक सोच को आज देश में फैलाए जाने की जरुरत है। उनके पिता एक दूसरी विचारधारा से संबंध रखते थे, लेकिन उन्होंने कोलकाता के टॉप बैरिस्टर होने के बाद कम्यूनिस्ट विचारधारा को अपनाया। वे वैज्ञानिक समाजवाद को देश-समाज के विकास के लिए आवश्यक मानते थे। उनका मानना था कि जनता में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास किए बिना देश और समाज का विकास नहीं हो सकता।
(कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव अतुल अंजान से बातचीत पर आधारित)