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अगर बालाकोट स्ट्राइक न होती तो झेलने पड़ सकते थे पुलवामा जैसे कई बड़े हमले!

Tue, 25 Aug 2020 10:05 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 25 Aug 2020 10:05 PM IST
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If Balakot Strike did not happen against Pakistan based terrorists there could be many attacks like Pulwama
सांकेतिक तस्वीर

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ बस पर हुए आतंकी हमले के मामले में मंगलवार को चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसमें खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा जैसे कई बड़े हमलों की साजिश रची थी। हमले के कुछ ही दिन बाद अगर भारत, पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ बालाकोट एयर स्ट्राइक न करता तो पुलवामा जैसे कई आत्मघाती हमलों की पीड़ा देश को झेलनी पड़ती।

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हमलों की बड़ी साजिश का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान के आतंकी संगठनों ने जम्मू-कश्मीर के स्थानीय आतंकियों को ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान में मौजूद अल-कायदा, तालिबान, जैश-ए-मोहम्मद और हक्कानी जैश-ए-मोहम्मद समूहों के पास भेजा था। भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की यह साजिश 2016 से चल रही थी। चार्जशीट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जैश-ए-मोहम्मद लगातार जम्मू-कश्मीर के आतंकियों के संपर्क में था।

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अफगानिस्तान में काम करती हैं आतंकी संगठनों की टीम

पुलवामा हमले को अंजाम देने वाला मोहम्मद उमर फारूख भी अफगानिस्तान पहुंचा था। विस्फोटकों से भरी गाड़ी को किस तरह से टारगेट तक पहुंचाना है और उसे बस, जीप या कार के किस हिस्से के साथ टकराना है, इन सबके लिए उन्हें डेमो दिया गया था। अफगानिस्तान में अल-कायदा, तालिबान, जैश-ए-मोहम्मद और हक्कानी की कई टीमें काम करती हैं। इन्हें बम बनाने और आईईडी लगाने की खास तकनीक हासिल है। 

पुलवामा हमले का प्लान 2016 में बना था। उस वक्त लोकल आतंकियों की एक सूची तैयार की गई थी। अफगानिस्तान में ट्रेनिंग के लिए कौन जाएगा, इसके लिए लोकल आतंकियों के साथ कई बार बातचीत हुई थी। उनका टेस्ट भी लिया गया था। सीआरपीएफ बस को उड़ाने का प्लान तैयार करने वाला आतंकी मोहम्मद उमर फारूख भी करीब डेढ़ साल तक अफगानिस्तान में रहा था। ट्रेनिंग लेने के बाद साल 2018 में वह जम्मू के सांबा सेक्टर से भारत में घुसा था।

पुलवामा जैसे कई हमले करने की थी योजना

जैश-ए-मोहम्मद ने उसे पुलवामा का आतंकी कमांडर बना दिया। वह पाकिस्तानी आतंकी मो. कामरान, इस्माइल उर्फ सैफुल्ला और कारि यासीर के संपर्क में बना रहा। पुलवामा हमले की कड़ियों को कैसे जोड़ना है, यह निर्देश उसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से ही मिलते थे। उसके लोकल आतंकी साथी समीर डार और आदिल अहमद डार ने पुलवामा हमले का नक्शा तैयार किया था। इसे भी पाकिस्तान भेजा गया था। वहां से मंजूरी मिलने के बाद आईईडी बनाने का काम शुरू हुआ था।

पुलवामा हमले की तैयारियों पर नजर रख रहे जैश के चीफ मसूद अजहर, राउफ अजगर और अमर अलवी उर्फ चचा ने जनवरी 2019 में हमले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया था। उन्होंने अन्य आतंकियों को भी ट्रेनिंग दी थी। इनकी साजिश थी कि पुलवामा के बाद घाटी के दूसरे हिस्सों में भी ऐसे हमलों को अंजाम दिया जाए। बालाकोट एयर स्ट्राइक होने और मोहम्मद उमर फारूख को सुरक्षा बलों द्वारा मार गिराए जाने के बाद आतंकियों का वह प्लान आगे नहीं बढ़ सका।

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